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स्त्री विमर्श -


मां से मुझे बहुत कुछ कहना है जो मैंने हमेशा उनसे छुपाया है मां आपके प्यार करने का अंदाज मुझे हर बार जुदा सा लगता है मां ऐसा बहुत बार हुआ दूसरों का प्यार करने का तरीका ना जाने क्यों अजीब सा लग

क़ुदरत का ये उसूल है कि जिस चीज़ की मांग न रहे, वो ख़ुद-बख़ुद या तो रफ़्ता रफ़्ता बिलकुल नाबूद हो जाती है, या बहुत कमयाब अगर आप थोड़ी देर के लिए सोचें तो आप को मालूम हो जाएगा कि यहां से कितनी अजनास ग़ाय

मेरे दोस्त जान मुहम्मद ने, जब मैं बीमार था मेरी बड़ी ख़िदमत की। मैं तीन महीने हस्पताल में रहा। इस दौरान में वो बाक़ायदा शाम को आता रहा बाअज़ औक़ात जब मेरे नौकर अलील होते तो वो रात को भी वहीं ठहरता ताकि

मुझे चाय के लिए कह कर, वह उन के दोस्त फिर अपनी बातों में ग़र्क़ हो गए। गुफ़्तुगू का मौज़ू, तरक़्क़ी पसंद अदब और तरक़्क़ी पसंद अदीब था। शुरू शुरू में तो ये लोग उर्दू के अफ़सानवी अदब पर ताइराना नज़र

कुछ अर्से से अक़ल्लियतें अपने हुक़ूक़ के तहफ़्फ़ुज़ के लिए बेदार हो रही थीं। उन को ख़्वाब-ए-गिरां से जगाने वाली अक्सरियतें थीं जो एक मुद्दत से अपने ज़ाती फ़ायदे के लिए उन पर दबाओ डालती रही थीं। इस बेदार

उसे यूं महसूस हुआ कि उस संगीन इमारत की सातों मंज़िलें उसके काँधों पर धर दी गई हैं। वो सातवें मंज़िल से एक एक सीढ़ी कर के नीचे उतरा और तमाम मंज़िलों का बोझ उसके चौड़े मगर दुबले कांधे पर सवार होता गय

ये उन दिनों का वाक़िया है। जब मशरिक़ी और मग़रिबी पंजाब में क़तल-ओ-ग़ारतगरी और लूट मार का बाज़ार गर्म था। कई दिन से मूसलाधार बारिश होरही थी। वो आग जो इंजनों से न बुझ सकी थी। इस बारिश ने चंद घंटों ही में ठ

लाहौर से बाबू हरगोपाल आए तो हामिद घर का रहा न घाट का। उन्होंने आते ही हामिद से कहा, “लो, भई फ़ौरन एक टैक्सी का बंदोबस्त करो।” हामिद ने कहा, “आप ज़रा तो आराम कर लीजिए। इतना लंबा सफ़र तय करके यहां आए

हम गृहणियाँ होतीं बड़ी कमाल, रखते पूरे घर का ख्याल। चाहे हो खुद की साड़ी, या पति का रुमाल।रहती है हर चीज पर नजर, हर सदस्य की रहती खबर। होते घर के हर कोने से वाकिफ, इसी में बीत जाती है उमर। बन जाए दोस

मुस्कुराते हुए व्यक्ति के मुस्कुराहट के पीछे का वो दुःख देखो कभी कितना दर्द होता है उसे अपने ख़ुद के व्यक्तित्व को छिपा कर  ये सब नही वो मुस्कुराने वाला ही जान सकता है

सुनो तुम लड़की हो..... सुकून से जीने नही देंगे हम तुम्हें क्योंकि तुम लड़की हो  पैदा होने पर जन्मदिन नही मनाया जाएगा क्योंकि तुम लड़की हो...  पैरो में पायल और हाथो में कड़े पहनो क्योंकि तुम लड़क

मन उड़ने की तमन्ना में मुस्कुराने लगा, मैंने जब उसे रोका तो  अकुलाने लगा, बोला बांधो न मन को आज़ादी दो, मुझे उन्मुक्त हो उड़ना है परिंदा बन, तुमने वर्षों मुझे क़ैद कर  रूलाया है, अब उड़ने क

 जिम्मेदारियों का अहसास " जिम्मेदारियों ने समय से पहले ही रिया को बड़ा बना दिया है" रिया की मां सुनीता जी अपनी भाभी कुसुम से कह रही थीं उसी समय रिया पूरी तरह पानी में भीगी हुई घर के अन्दर दाखिल ह

अनुच्छेद 79          मेरी यादों के झरोखों से ------------------------------------------------------------------------------------------- सेठ जी की कोठी आज रंग बिरंगे बल्बों की

अनुच्छेद 78                    मेरी यादों के झरोखों से -------------------------------------------------------------------------------------मधु क

अनुच्छेद 77          मेरी यादों के झरोखों से ______________________________________________संसार मे आना जाना यह लगा हुआ है इसीलिये इसे सांसारिक नियम माना है, जिसकी मृत्यु हुई

अनुच्छेद  75        मेरी यादों के झरोखों से    ----------------------------------------------------------------------------------------- मधु की जिद के आगे परिवार के

 अनुच्छेद  74          मेरी यादों के झरोखों से-------------------------------------------------------------------------------------------सेठ रविशंकर जी का उनके परिजन

अनुच्छेद 72               मेरी यादों के झरोखों से------------------------------------------ - ------------------------------------------------------------------

अनुच्छेद 70                  मेरी यादों के झरोखों से ^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^           "मानव जीवन भी बड़ा