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सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यानन 'अज्ञेय' के बारे में

अज्ञेय जी का जन्म 7 मार्च, 1911 को जिला गोरखपुर के गाँव कसिया में हुआ था. बचपन 1911 से '15 तक लखनऊ में बिता। अज्ञेय की घरेलू शिक्षा का प्रारम्भ लखनऊ में और विद्यालीय शिक्षा का समापन लाहौर में हुआ । बाद में पिता की सरकारी नौकरी के चलते इन्होने लाहौर विश्वविद्यालय से बीएस सी परीक्षा ऊतीर्ण की. एम ए अंग्रेजी साहित्य में करते हुए ये स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े और जेल भी गये. इन्होने कुछ समय तक फौज में भी नौकरी की एवं आसाम के जंगलों में घुमते रहे. अज्ञेय घुमक्कड़ी स्वभाव के रहे हैं. सुदूर दक्षिण भारत से लेकर उत्तर पूर्वी भारत के कई स्थानों पर रहे.अज्ञेय का व्यक्तित्व बहुमुखी था. वे एक सफल वक्ता, कवि, उपन्यासकार, संसमरणकार एवं यात्रा लेखक के रूप में स्मरण किये जाते हैं. ये स्पष्टवादी, गम्भीर चिंतक एवं अन्तर्मुखी व्यक्तित्व के धनी थे. लोगों से कम मेल मुलाक़ात करना एवं अधिक घुल मिल जाना इन्हें प्रिय नहीं था. इनका जीवन सतत रूप से लेखन कार्य में ही व्यतीत हुआ. ये निबंधकार और आलोचक थे. इन्होने विदेश यात्राएं भी की. साहित्यिक क्षेत्र में ये पश्चिम के कवि समीक्षक इलियट से अधिक प्रभावित थे. इनकी कविताओं में तथा उपन्यास और कहानी के क्षेत्र में भी उच्च कोटि की रचनाये की | सम्पादक और पत्रकार के रूप में अज्ञेय जी की विशेष ख्याति की | अज्ञेय एक प्रयोगवादी कवि थे। उनके साहित्य का उनके काव्य का भाव पक्ष और कला पक्ष समान रूप से समृद्ध है। उनके शुरुआती साहित्य में छायावाद और रहस्यवाद का एक मिश्रित पुट मिलता है। अज्ञेय जी ने अपने साहित्य में राष्ट्रीय चेतना को भी प्रकट किया है। उन्होंने अपने काव्य में तीखे व्यंग्य भी शामिल किए हैं। उनके काव्य में अनुभूति की गहनता सागर की गहनता के समान देखी जा सकती है। अज्ञेय के काव्य भाषा की सर्जनात्मक विशिष्टता 'असाध्यवीणा' में सबसे अधिक प्रकट है । उन्होंने छाय

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सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यानन 'अज्ञेय' की पुस्तकें

"अज्ञेय" जी की  रोचक कविताएँ

"अज्ञेय" जी की रोचक कविताएँ

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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210 रचनाएँ

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"अज्ञेय" जी की  रोचक कविताएँ

"अज्ञेय" जी की रोचक कविताएँ

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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नदी की बाँक पर छाया

नदी की बाँक पर छाया

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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नदी की बाँक पर छाया

नदी की बाँक पर छाया

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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चिन्ता

चिन्ता

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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चिन्ता

चिन्ता

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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'अज्ञेय' जी  की रचनाएँ

'अज्ञेय' जी की रचनाएँ

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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'अज्ञेय' जी  की रचनाएँ

'अज्ञेय' जी की रचनाएँ

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ

पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ

पहले मैं सन्नाटा बुनता हूँ

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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भग्नदूत  'अज्ञेय'

भग्नदूत 'अज्ञेय'

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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भग्नदूत  'अज्ञेय'

भग्नदूत 'अज्ञेय'

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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अरी ओ करुणा प्रभामय

अरी ओ करुणा प्रभामय

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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अरी ओ करुणा प्रभामय

अरी ओ करुणा प्रभामय

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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क्योंकि मैं उसे जानता हूँ

क्योंकि मैं उसे जानता हूँ

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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क्योंकि मैं उसे जानता हूँ

क्योंकि मैं उसे जानता हूँ

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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सागर-मुद्रा

सागर-मुद्रा

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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सागर-मुद्रा

सागर-मुद्रा

अज्ञेय जी का पूरा नाम सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय है। इनका जन्म 7 मार्च 1911 में उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया के कुशीनगर में हुआ। इस कविता का संदेश है कि व्यक्ति और समाज एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यक्ति का गुण उसका कौशल उसकी रचनात्

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सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यानन 'अज्ञेय' के लेख

जरा व्याध-2

14 जुलाई 2022
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 क्या यही है पुरुष की नियति कि बार-बार लोभ-वश किन्तु जो जीवन-कर्म है (जो नियति है!) उसे कैसे माना जाय लोभ? जाना मृग की टोह में और मर्माहत कर आना युग-युग के मृगांक को! कौन शरविद्ध हुआ, कृष्ण? त

जरा व्याध-1

14 जुलाई 2022
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 मर्माहत ही मिले मुझे फिर जालिक के ही पाश काट पानी को करते पापमुक्त वह चले गये। नर में ही बार-बार नारायण मरते हैं। भरते हैं उस में व्यथा बोध, उस का ही काम अधूरा है। नारायण? उन का तो खाता सदा शु

मेघ एक भटका-सा

14 जुलाई 2022
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 रीता घर सूना गलियारा वन की तरु-राजि बिसूर पियूर की हवा की थकी साँस : मेघ एक भटका-सा दो बूँदें टपका जाता है। ऐसे ही टुकड़ों में सहसा गँठ जाते हैं महाकाव्य व्याकुल प्रेत-व्यथा सब-कुछ से सब-कुछ

जा!

14 जुलाई 2022
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 जा! जाना है तो ऐसे जा  या तो गाते-गाते या फिर तम में जागे-जागे सहसा पाते वह जो गाना था, प्रकाश, वह यह पाया- यह-हाथ की पहुँच से, बस तिनका-भर आगे! हाथ बढ़ा और जा!

कालोऽयं समागतः

14 जुलाई 2022
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समागत है काल अब बुझ जाएगा यह दीप। यही क्या कहना कि होता इस समय तू एक समीप! जो अकेला रहा भरता रहा तेरी उपस्थिति के बोध से अपना चरम एकान्त क्यों न वह निबते समय भी मौन आवाहे वही आलोक धीरज का पर

स्वरस विनाशी

14 जुलाई 2022
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घड़े फूट जाते हैं कीच में खड़े हम पाते हैं कि अमृत और हलाहल दोनों ही अमोघ हैं दोनों को एक साथ भोगते हम अमर और सतत मरणशील सागर के साथ फिर-फिर मथे जाते हैं

वासुदेव प्याला

14 जुलाई 2022
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यह वासुदेव प्याला भरते ही कृष्ण का चरण-स्पर्श पा रीत जाता है और फिर भरता है अनवरत : इसमें कुछ आश्चर्य नहीं है। आश्चर्य यह है कि यह बाढ़ जिस के चरण छूती है वह नहीं है डलिया में सोया बाल-कृष्ण :

भोर : लाली

14 जुलाई 2022
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भोर। एक चुम्बन। लाल। मूँद लीं आँखें। भर कर। प्रिय-मुद्रित दृग फिर-फिर मुद्रांकित हों- क्यों खोलें? आँखें खुलती हैं। दिन। धन्धे। खटराग। ऊसर जो हो जाएगा पार वही लाली क्या फिर आएगी?

प्यार अकेले हो जाने

14 जुलाई 2022
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 प्यार अकेले हो जाने का एक नाम है यह तो बहुत लोग जानते हैं पर प्यार अकेले छोड़ना भी होता है इसे जो वह कभी नहीं भूली उसे जिसे मैं कभी नहीं भूला.

इतिहास-बोध

14 जुलाई 2022
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 इन्हें अतीत भी दीखता है और भवितव्य भी इस में ये इतने खुश रहते हैं कि इन्हें यह भी नहीं दीखता! कि उन्हें सब कुछ दीखता है पर वर्तमान नहीं दीखता! दान्ते के लिए यह स्थिति एक विशेष नरक था पर ये इस

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