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gaurav के बारे में

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gaurav की पुस्तकें

gaurav के लेख

सहायता करने के पीछे की सोच का अंतर

31 जनवरी 2015
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एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा.... अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी। जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला। किन्तु उ

जीने की कला जानो तो मिलेगी सच्ची खुशी और शांति

27 जनवरी 2015
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ईश्वर: क्या तुमने मुझे याद किया? मनुष्य: आपको याद किया? आप कौन हैं? ईश्वर: मैं ईश्वर हूं। तुम्हारी प्रार्थना सुनी। सोचा बात करूं। मनुष्य: मैं प्रार्थना तो करता हूं। लेकिन अभी बिजी हूं। ईश्वर: चंचलता तुम्हें व्यस्त रखती है। लेकिन उत्पादक काम करोगे तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। मनुष्य: ये बताएं

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