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आज का विषय: अलविदा बचपनएक कविता के रूप में......खिलखिलाती सी एक उम्र को जी लियाएक मुस्कराहट से हर गम को पी लियाऊँगली थाम के अब कोई चलाता नहींयह बचपन फिर लौट कर आता नहींन भूख की चिंता थी और न थी कल की

जैसे की ये कहानी देव की परेशान जिंदगी से शुरू हो कर शैतान के सौदे तक का सफर तय करती है और देव जो के सीधा साधा इंसान जिसकी जिंदगी घर से ऑफिस तक ही रही थी आज वो एक कातिल बन चुका था। जो अब भगवान का साथ छ

  शीर्षक ----अलविदा बचपन अलविदा बचपन कैसे कह दूँये तो यादों में हर पल रहता है।बचपन का घर जहाँ रहती थी,बचपन की सारी खुशियाँ होती थी।जहाँ दादा दादी का प्यार होता था,जहाँ माँ बाबा का लाड़ होता थ

मेरा बचपन जिसको मैंने कभी भूला ही नहीं ,अपनी यादों में संजो कर रखा है ,जो मेरी सुनहरी यादों में कस्तूरी सा महकता रहता है ।हर समय यादों के झरोखों में बसने वाली मुझे  बचपन याद ना आए ऐसा हो नहीं सकत

फाइब जी का कमाल                                                   

हे बचपन तेरी यादें आती है,तू था जब हम खुशनसीब थे। कितनै सौभाग्यशाली थे,जब मां बाप के करीब थे।ना द्वेष ,दंभ लेशमात्र था,निर्मल मन और दिल में प्यार था।सिर पर था पिता का हाथ, मां के आंचल का खुशी संस

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तुम्हें-याद है,मैंने-रुंधे स्वर में,जब 'इजाजत'मांगी थी,तुमसे-अपने,दिल पर,पत्थर रखकर।तुम भी-सिसकियों पर,पहरा! बिठा-भर्रायी आवाज में,बोल पड़ी थी-'इजाज़त' है।इस-इजाज़त के बीच-बस!एक दरिया,रह गयी थी-आंसुओ

प्रणाम!कैसे हैं आप सब?आशा करते हैं कि सब कुशल से होंगे,,।आज नवरात्र का पांचवां दिन हैं और इस दिन में माता दुर्गा के स्कन्द माता स्वरूप की पूजा की जाती हैं।हम सब पूजा करते समय अपने सुख, दुःख की बातें म

आजकल के बच्चे अपने बचपन के आनंद को खो रहे हैं। ये दुनिया बदल रही है और उनके लिए नया और विभिन्न अनुभव मौजूद है, जो उन्हें अपनी समझ से पार होते हुए जीने की ज़रूरत होती है। बच्चों के लिए खेलना, उत्साह, न

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मै स्कूल जा रहा हूँ। मै स्कूल जा रहा हूँ। कभी जनगण कभी वन्देमातरम गा रहा हूँ। स्वच्छता का संदेश देते क्रम से जा रहा हूँ। मै स्कूल जा रहा हूँ। मै------- अनुशासन व नैतिकता का पाठ पढ़

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तारों में चाँद जैसीधूप में छाँव जैसीशहरों में गाँव जैसीमँझधार में नाव जैसीहोती है माँ...अविश्वास में विश्वास जैसीहताशा में उल्लास जैसीनिराशा में आस जैसीतिमिर में प्रकाश जैसीहोती है माँ...नुकसान में नफ

मेरी आँखों से गुजरी जोबीते लम्हों की परछाईंन फिर रोके रुकी ये आँखें झट से भर आयींवो बचपन गुजरा था, जो घर के आंगन में लुढ़कता सा मैं भीगा करती थी जिसमें वो सावन बरसता सायाद आई मुझे म

आज याद आ रहा है ना जाने मुझे क्यों वह आंगन, वह हरे भरे खेतों में दौड़ना, वह कच्चे आमों की सुगंध, वह तितलियों के संग भागना, वो करनी सहेलियों से चिढ़हन, वह भाई के साथ पंजा लड़ाना, उसके जीत जाने पर करनी

आज याद आ रहा है ना जाने मुझे क्यों वह आंगन, वह हरे भरे खेतों में दौड़ना, वह कच्चे आमों की सुगंध, वह तितलियों के संग भागना, वो करनी सहेलियों से चिढ़हन, वह भाई के साथ पंजा लड़ाना, उसके जीत जाने पर करनी

बचपन हर व्यक्ति की जिंदगी में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बचपन की शरारतें बचपन की मस्ती बचपन के दोस्त  बचपन का भोलापन फिर वापस नहीं आता। बचपन को याद करना मतलब और महत्वपूर्ण पलों को याद करना जो आपकी

  शीर्षक ----अलविदा बचपन अलविदा बचपन कैसे कह दूँये तो यादों में हर पल रहता है।बचपन का घर जहाँ रहती थी,बचपन की सारी खुशियाँ होती थी।जहाँ दादा दादी का प्यार होता था,जहाँ माँ बाबा का लाड़ ह

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आज सब्जी में नमक ज्यादा है,चावल थोड़ा गीले हो गए हैंरोटी जल गई ,चाय में मीठा कम हैभोजन तो अच्छा है, स्वाद नहीं है।अभी तो मैंने पोछा लगाया हैगीला तौलिया बिस्तर पर फेंका हैकितना काम करू, मैं भी इंसान हूँ

25 जनवरी 2022, शाम 4 बजे। '1 फरवरी को वापस ज्वाइनिंग'। जनवरी की उस सर्द शाम में मैंने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को जो ईमेल भेजा था, उसका यही सब्जेक्ट लाइन था। उस महीने की शुरुआत में, मुझे BharatPe से अनुप

 यह  एक व्यवसाय/जीवनी की किताब है, इसे खूबसूरती से लिखा गया है, इसलिए अगर आपने शार्क टैंक इंडिया देखी है तो आपको यह किताब पसंद आएगी। इसके अलावा, यदि आप अशनेर को नहीं जानते हैं, तो भी इसे आजमाएं, यह पु

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी भारतीय राजनीतिक इतिहास की एक बड़ी किरदार रही हैं। बांग्लादेश का जन्म, इमरजेंसी, ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी बड़ी घटनाएं उनके नाम हैं। विष्णु शर्मा की नई किताब 'इंदिरा फ