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आओ ,कुछ नया सीख लें !जीवन को, ज्ञान का प्रकाश दें। भाषा माध्यम है,एक -दूजे से जुड़ने का। और पल-पल आगे बढ़ने का। शब्दों की लहरों से जुड़ने का।उड़ती तितलियों सा छूने का।  आओ ,कुछ

हर वक्त जिन्दगी से गिले शिकवे ठीक नहीं, कभी तो छोड़ दीजिए कश्तियों को लहरों के सहारे! 

कोई आया ही नहीं कितना बुलाया मैंने,उम्र भर ज़माने को भी जगाकर रखा मैंने।तुम्हारे बिना वक्त भी अपाहिज हो चला था,ना दिन खिसकता था आगे ना राते चलती थी।सुहाने मौसम में तुम साथ तो चले थे पर लेकर चरित्र द

उम्र उसी रिश्ते की लंबी होती है जहां... लोग एक दूसरे को समझते है, परखते नहींना जाने कितने रिश्ते खत्म कर दिए उस भ्रह्म ने......"मै सही हूं, सिर्फ मैं ही सही हूं।"तेरा भी ये ब्रह्म एक दिन टूट ही जाएगा

रिश्ते यू ही ख़तम हो जाते हैंकुछ खूबसूरत रिश्ते यू ही ख़तम हो जाते हैथोड़े दिन दिल से निभाने का दिखावा कर  लोग दिमाग लगा जाते हैंकुछ लफ्ज़ भी मिठास सी घोल देते हैजैसे मै तो बस तुम्हारा हूंमतलब नि

कुछ खूबसूरत रिश्ते यू ही ख़तम हो जाते हैथोड़े दिन दिल से निभाने का दिखावा कर  लोग दिमाग लगा जाते हैंकुछ लफ्ज़ भी मिठास सी घोल देते हैजैसे मै तो बस तुम्हारा हूंमतलब निकलते ही उन लफ्जो को नीम में ड

https://youtube.com/@jiwankibagiya?si=ta5H2YRqZnQHFZxO अक्सर रिश्तों को रोते हुए देखा है मैनेअपनों की ही बाँहो में मरते हुए देखा है मैनेटूटते, बिखरते, सिसकते,कसकतेरिश्तों का इतिहास, दिल पे लिखा ह

बारिश की बूंदे भी कुछ तुम्हारी जैसी हो गई, हमने छतरी तो लगाई पर वो मुझे भिंगो गई! 

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मैं समय के साथ बदला हूं , या समय मेरे साथ । जो भी हो पर अब , अंतर पहले से बहुत हो गया है । लाली गुम और , गाल गुठली आम हो गया है । उमर अभी खास नहीं मगर , लगते बुजुर्ग 60 पार हो गया है ।।

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प्रेम तो-बंधन चाहता,जबकि-विवाह! स्वतंत्रता का,पक्षधर है।तभी तो-डूबती रहती है,झील सी-आंखों के दायरे में,आत्मा।अन्त में,होता यही है,कि कोई-भूल जाता है,और-कोई भूलने के,प्रयास के बाद भी,नहीं भूल पाता

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आखिर -पायल ने,पाज़ेब से-बतियाते हुई,बोली-"क्या हुआ? मालकिन हमें,सोने के,जेवरों जैसा,तवोज्जो! नहीं देती हैं।लेकिन- साथ तो,हमीं देते हैं,हरपल।वो सोने वाले,जेवर!धरे के धरे,रह जाते हैं,या ग

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न शिकायत!न धन्यवाद!!आये-और चल दिए।मैं तो!समझा था,वो,मेरे- करीब होंगे।क्योंकि- शिकवा और गिला!अपने ही तो,करते हैं।लेकिन- यूं जाना उनका,पता नहीं क्यों?खटकता रहा।सुनो!जब कभी लगे,मैंने कुछ-ग

"मरम्मत इश्क़ का करता हूं और दिल पर पैबंद लगाता हूं नुक्सा लिखा करता हूं आंखों पर और ज़माने को इज़हार ऐ इश्क बताता हूंसुनो तुम डूबना नहीं इश्क़ काम है निक्कमों काकामगारों को, मैं इससे ब

"गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागू पाएं बलिहारी गुरु आपने गोविंद देव मिले"गुरु है शिक्षा का सागर ज्ञान बाटे सबको बराबर पूजा हो जिसकी ईश्वर सी, स्थान पाता सबसे ऊपर  जीवन दाता भी आता बा

गुरु के चरणों में दुनिया है स्वर्ग जैसी । गुरु की महिमा जग में ईश्वर जैसी।।ज्ञान के सागर अथाह नहीं सागर जल सम।‌गुरू का आशिर्वाद जितना मिले उतना ही कम।। भटके हुए को राह दिखाते, दुखी जन क

पुरुष जो, लंबे समय से, संचित कर रहे होते है अपने दुःख, किसी करीबी के आ जाने पर, लावा की तरह फूट पड़ते है

"सपनों को सच करने से पहले सपनों को ध्यान से देखना होता है।”

हर कोई यहां फसा हुआ है वक्त की जंजीरों में, हर कोई यहां हंसता है केवल तस्वीरों में!

जरूरी नहीं है की इश्क बाहों के सहारे मिलें,किसी को जी भर के महसूस करना भी मोहब्बत है! 

      फिल्मी दिमाग  अक्सर हम अपनी निजी जिंदगी को फिल्मी जिंदगी से मेल करके देखते है। खासकर वह लोग इसके ज्यादा शिकार होते है। जिन लोगों को नॉलेज का अभाव होता है।   फिल्मों में कुछ ऐसे इफ्ेक्ट, ब

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