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सुमन शर्मा की डायरी

सुमन शर्मा

3 अध्याय
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suman sharma ki dir

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पुस्तक के भाग

1

उपहार

23 जून 2016
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समझो मेरे नैनों की मौन भाषा समझो मेरा सच्चा प्रेम दे रही हूँ सर्वस्व अपना उपहार में तुम्हें। सारे वृक्षों के फूल और कलियाँ सारी भौरें की गुंजन और तितलियां प्यारी मध्यान्ह के चमकते सूर्य की गर्मी और जंगल की हरी छाया दे रही हूँ सर्वस्व अपना उपहार में तुम्हें। अनन्त नीला आकाश उसमें उड़ते हुए बादल सार

2

उम्मीद

24 जून 2016
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नारी

25 जून 2016
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नारी "-ईश्वर की सर्वश्रेष्ठतम कृति ================== ‘नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास रजत नग, पग-तल में, पीयूष स्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में।' वास्तव में नारी इन पक्तियों को चारितार्थ करती है।नारी श्रद्धा,प्रेम,समर्पण और सौंदर्य का पर्याय है। नारी अमृत तुल्य है क्योंकि वह जीवन देती है,

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