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जयशंकर प्रसाद द्विवेदी की डायरी

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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jaishankar prasad dvivedi ke dir

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जयशंकर प्रसाद द्विवेदी की अन्य किताबें

पुस्तक के भाग

1

गांधी तेरे देश में

1 अक्टूबर 2016
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1

बड़े बड़े घड़ियाल पड़े हैं धन से मालामाल बड़े हैलूट रहे हैं रोज देश कोनित्य नए गणवेश में || गाँधी तेरे ...... चोरी या पाकिटमारी है घोटालों की बीमारी हैबात बात में पैसा चाहिएसरकारी निवेश में || गाँधी तेरे ... कोई आता धमका जाता नेताओं को दिल्ली भातानिंदा फिर कड़ी ही करतेसंस

2

जबरी पहुना भइल जिनगी

21 जुलाई 2017
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कब दरक गइल जियरा उधियाइल भिनुसहरा अब टोवत बेवाई सभे अहमक़ कहाई । साटल पेवना भइल जिनगी ॥ घाव बाटे जियतारटकटोरत बार बार उहाँ उजार खोरियादेखीं जवने ओरिया काँच खेलवना भइल जिनगी ॥ बड़की बिटिया सयान सभे उझिलत गियानदाना ला मोहताजकइसे चली राज काजओद लगवना भइल जिनगी ॥ माँग बहोरि आंखि

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