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भाग (11)

13 सितम्बर 2022

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अंजना छलोत्रे 'सवि' की अन्य किताबें

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रचनाएँ
अगर तुम न होते
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विविध रंगों से भरे इस जीवन में अनेक ऐसी संभावनाएँ हैं जहाँ सकारात्मक सोच कर जीवन को सुगम और सरल बना सकते हैं स्वच्छ और पवित्र भावनाओं का केंद्र बिंदु जहाँ प्रेम कर्त्तव्य की वेदी से होकर रूह में समाहित हो समर्पित हो रहा है इस उपन्यास "अगर तुम ना होते" में।
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भाग (1)

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कुछ दिनों से चर्चा चल रही थी कि नये बस आने वाले हैं और आखिर वह दिन आ भी गया, वह आ गए, इन छः दिनों से ऑफिस में बहुत ही गहमागहमी चल रही है जब से नए बाॅस का आगमन हुआ है तब से ही ऐसा लग रहा है जैसे ऑफिस स

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भाग (2)

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जिया लंबी, बड़ी-बड़ी आँखों वाली सांवली सी लड़की है, उसका ध्यान हमेशा ऑफिस में काम पर केन्द्रित रहता है। प्राइवेट कंपनी है बड़ी मुश्किल से यहाँ काबलियत को ध्यान में रखकर नौकरी मिली है, और इसे वह छोड़ना नहीं

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भाग (3)

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बहुत से ऐसे पल है जिन्हें वह अक्सर याद करती, ओर उनमें से कुछ न कुछ तलाशने की कोशिश करती, कोई तो ऐसा सुराग मिल जाये कि जो वह सोच रही है कहीं न कहीं कुछ अंश में सच हो। कभी लगता अनुज को वह पसंद करती है

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भाग (4)

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जिया आपने टेबल पर आई और उसने अपने अन्य विभाग के अधिकारियों से बात की, दोपहर तीन बजे की मीटिंग फाइनल कर ली, जिस विषय पर उसे चर्चा करनी थी उसने उसका खाका खींचा और एक कच्चा नक्शा बना लिया उसने यह भी देखा

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भाग (5)

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"सर, ड्रायवर साहब से पूछते हैं,"...जिया ने समस्या का समाधान बुझाया। "हां यही सही है, क्या नाम है आपका ड्रायवर साहब,"... अनुज ने आगे झुककर गाड़ी चला रहे चालक से पूछा। "साहब जी, मेरा नाम पारीक है,"...

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भाग (6)

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इतना बेहतरीन संग्राहलय देखने के बाद, उस पर अनुज का हाथों में हाथ ने जिया को शांत मन में आहट सुनाई दी, वह अपनी इन्हीं नटखट अहसास को भरसक दबाते रहती है। चेहरे पर जाने कैसे सहमें हुए भाव उभरे कि अनुज ने

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भाग (7)

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जिया सुबह ऑफिस पहुँची तो पूरा मन बना कर आई है कि आज  अपनी बात कहेगी, लेकिन सुबह के ग्यारह बज गए, अनुज ऑफिस में दिखाई ही नहीं दिया। आज वह चाह रही हैं कि अनुज से मुलाकात हो, पूरा दिन इंतजार करते निकल गय

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भाग (8)

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"नहीं जिया, आप अभी नहीं जाओगी, पहले पूरी बात बताओ फिर जाना,"... अनुज ने बढ़कर उसका हाथ थाम लिया। जिया वहीं की वहीं जड़ हो गई, उसे उम्मीद नहीं थी कि अनुज इस तरह उसका हाथ पकड़ लेगा, पता नहीं क्या हुआ क

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भाग (9)

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"जिया, मेरी बातों से आप परेशान मत होना, मैं यह सब कुछ इसलिए बता रहा हूँ कि आप मुझे अच्छे से जान समझ लो, क्योंकि मुझे पता है आपको मेरे बारे में कुछ भी पता नहीं है, आपका ऐसा स्वभाव है कि आप सामने से मुझ

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भाग (10)

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कुछ समय बाद जिया ने अपने आप को सामान्य किया, घर के अन्य काम करने लगी, घर के सदस्यों को पता है जिया जब तक खुद नहीं बोलेगी, वह सामान्य नहीं होती, उसकी बहुत सी आदतों से घर के सभी लोग परिचित भी है, जिस बा

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भाग (11)

13 सितम्बर 2022
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इस समय ऑफिस में काफी अफरातफरी चल रही है, हेड ऑफिस से एक टीम आ रही है जो इस ऑफिस का मुयाना करेगी और नये काम की प्रगति देखेगी, अनुज ने अपने ऑफिस को नए प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तुत किया था, वह उसपर काम भी क

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भाग (12)

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तीन महीने की ताबड़तोड़ मेहनत के बाद अनुज ने आज फाइनल रिपोर्ट तैयार करवाई,  सभी के साथ बैठकर उसको मूर्त रूप दिया, छोटे-छोटे बिन्दूओं पर गौर किया गया, आज फाइनल रूप देने का आठवां दिन है और सभी अपनी तरफ़

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भाग (13)

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खूब सारी चर्चा होती रही, अगस्त्य अपने कॉलेज केम्पस की ऑफिस की ढेर सारी बातें बताता रहा, शगुन ने भी कॉलेज के दिलचस्प  किस्से सुनाये, बहुत ही सामान्य सी बातें हो रही है, हल्का व खुशनुमा माहौल है, कहीं क

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भाग (14)

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सुकून से, आश्वासन से, विश्वास कसे, यूं ही साथ रहने के वादों का निमंत्रण दोनों स्वीकार कर रहे हैं, जो इस जन्म में तोड़ने, छोड़ने का साहस दोनों नहीं करेंगे। आसमान में चॉदनी छिटकी हुई है, चॉद अपनी आगोश

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भाग (15)

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जिया को अपने दुस्साहस पर बहुत आश्चर्य हो रहा है मैं ऐसा कैसे कर दिया वह समझ नहीं पाया किसी ने यह सब करवाया है अब वह किस तरह अनुज का सामना करेंगी, इतनी बेशर्म बा किस तरह होगा उसने अपनी सारी मर्यादा ही

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भाग (16)

13 सितम्बर 2022
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लगभग ग्यारह बजे अनुज आया, सरसरी नजर सब पर ड़ालते हुए केबिन में चला गया, जिया ने देखा तो जान में जान आई, हिम्मत ही नहीं हो रही थी कि अनुज को फोन लगा ले, उसकी नज़रों का कसूर है या फिर दिल में चाहत का शु

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भाग (17)

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ऑफिस में आज सुबह से ही अफरा-तफरी मची हुई है क्योंकि आज बारह बजे से ही मीटिंग है, सभी अपने-अपने कामों में लगे हुए हैं, पूरी तैयारी चल रही है बहुत ही अच्छी बात है अनुज बहुत ही शांत नजर आ रहा हैं, या तो

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भाग (18)

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अनुज ने जिया की तरफ देखा तो वह दूसरी तरफ देख रही थी उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।  "तो चलिए ना मांजी, मेरे साथ एक बार और साड़ियाँ खरीदते हैं, आप पसंद करा दीजिए,"...अनुज ने मां को दुकान के अंदर ले जात

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भाग (19)

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रात को पलंग पर लेटते ही जिया सोचने लगी बचे तीन दिन किस तरह बिताएं, यह सोचकर ही परेशान हो रही है आज का दिन तो मां और अनुज के साथ ठीक निकल गया कल क्या करेगी। क्यों न तंगामणि से बात की जाए कितने दिन हो

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भाग (20)

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आज पर्याप्त समय मिला है मां बेटी को, अपने पुराने दिनों को याद करते हुए दोनों बेहद खुश हैं, भूली बिसरी यादें जब सांझा की जाती है तो सारा कुछ पिछ्ला चलचित्र की तरह सामने से गुजरने लगता है जैसे यह सब अभी

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भाग (21)

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जिया ने कुछ सोचा ही नहीं कि आज उसका क्या प्रोग्राम है, रही बात तंगामणि से बात करने कि यह तो उसने रात में ही सोच लिया था।कमरे की सफाई करना, कपड़े धोना यह सब तो बारह बजे तक काम पूरा हो गया। दोपहर के भोज

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भाग (22)

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अनुज पूरा दिन कोशिश करता रहा लेकिन काम की व्यस्तता में समय ही नहीं निकाल पाया, रात को घर पहुँचने का खाना टेबल पर लगा है और रसोईया अपने कमरे में सो गया है, उसने घड़ी की तरफ नजर दौड़ाई रात के बारह बजे ह

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भाग (23)

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"देखो, आज तो हमारी सुबह भी बड़ी अच्छी कर दी अनुज,"...मां को देखते ही जिया खड़ी हो गई, मां के हाथ से चाय की ट्रे ले ली मां आंचल से अपना हाथ पूछते हुए बैठ गई। जिया ने अनुज को चाय दी, मां की तरफ भी बढ़ा

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भाग (24)

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जिया ने पूरी तरह से प्रोजेक्ट को कम से कम लागत में बनाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना दिए लेकिन इससे कम बजट में प्रोजेक्ट की ना तो क्वॉलिटी मिलेगी और ना ही उसको हम बेहतर बना पाएंगे, तीन चार बार रीड रा

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भाग (25)

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जिया पूरी तरह से प्रोजेक्ट में लगी हुई है और जब से उसे पता चला है कि अनुज नहीं जा रहा है तब से तो उसे लगता है कि पूरी टीम की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आ गई है और इसमें कामयाबी मिले इसका भरपूर प्रयास

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भाग (26)

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निश्चित दिन सभी तैयार हैं कि कल उन्हें प्रेजेंटेशन देने हैदराबाद जाना है ऑफिस से लगभग दस कर्मचारी गए । शाम सभी ने एक दूसरे को शुभकामनाएँ दी उनकी सफलता की कामना की सुबह दूसरे दिन की फ्लाइट से सभी हैदर

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भाग (27)

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शगुन, अगस्त्य बेचैन हो रहे हैं कि पूछे किस तरह दीदी ने प्रेजेंटेशन दिया और दीदी कैसी यह सब कर पाई, बहुत सारी बात सुनना चाह रहे हैं लेकिन मां ने इसारे से चुप करने को कह दिया था लेकिन जैसे ही रात का खान

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भाग (28)

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ऐसा लग रहा है कि जिया अपनी खींज के चरम तक पहुँच रही है, वह अपने में आये इस बदलाव से अपना स्वाभाविक व्यवहार खोती जा रही है, वह करें भी क्या, एक तो अनुज की तरफ से कोई प्रतिक्रिया का न आना उपर से नई सहयो

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भाग (29)

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अनुज ने ठान लिया है कि आज और कल दो दिन जिया को इतना सोचने पर मजबूर कर देना है कि जल्दी से जल्दी अपने दिल की बात सहजता से कह पाये। शाम को जैसे ही ऑफिस से जिया उतरी अनुज दौड़ता हुआ पहुँच गया। "जिया, मे

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भाग (30)

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"आप देख लीजिए सर, वैसे तो जगह बहुत अच्छी है, खूबसूरत भी है लेकिन बहुत बहुत पैसा लग जायेगा,"... थोड़ा हिचकते हुए बोली। "जिया निर्णय दो मैं यह वाला घर ले लूँ,"...अनुज ने फिर पूछा। "सर, बिल्कुल ले सकते

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भाग (31)

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अनुज को गये  चौथा दिन है किसी भी हालत में लौटना ही है शाम हो गई पर अब तक अनुज नहीं आया, हो सकता है देर तक आये। अनुज ने उसके कॉल का भी कोई जवाब नहीं दिया है पता नहीं क्या बात है जिया संकोच कर रह गई, का

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भाग (32)

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अगस्त्य निश्चित समय पर होटल के रूम में पहुँच गया उसने दरवाजा खटखटाया, दरवाजा खुला, सामने अनुज खड़ा है। "आ जाओ अगस्त्य, सुनाओ क्या हाल है तुम्हारी दीदी के, कुछ परिवर्तन महसूस हुआ,"... अनुज ने गहरी ठ

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भाग (33)

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देर रात अगस्त्य घर पहुँचा सभी सोने की तैयारी कर रहे हैं उसने देखा जिया दीदी के कमरे की लाइट जल रही है उसने झांककर देखा तो दीदी बैठी किसी किताब के पन्ने पलट रही हैं। "दीदी, अंदर आ जाऊँ क्या ?"...अगस

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भाग (34)

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"कुछ खास नहीं, लिखा है, ठीक है कल आ रहे हैं, हो सकता है यह मैसेज सभी को दिया हो, कोई जरूरी नहीं कि यह मैसेज मुझे ही दिया हो,"...जिया ने भी उकता कर कहां। "दीदी, यह भी तो हो सकता है कि यह मैसेज आपको

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भाग (35)

19 सितम्बर 2022
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जिया को अब अच्छा लग रहा है अब बेफिक्र है कि अनुज कल आ रहा हैं पर इस बार जो वह बेचैन हुई है उसके लिए जवाब तलब तो करना ही पड़ेगा, इस तरह कोई कैसे कर सकता है, अनुज समझ नहीं आता, पता नहीं कब कहाँ क्या कर

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अन्तिम भाग (36)

19 सितम्बर 2022
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अनुज सभी को संबोधित कर रहा है लेकिन जिया नहीं सुन पाई, न ही बाहर आने की उसने कोशिश की, वह समझ गई जो भी अनुज कहेगा वह बाद में पता लग ही जाएगा, लेकिन कहीं न कहीं अंदर एक खलबली भी है ऐसा क्या कह रहा है।

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