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धनुर्वेद

Kuldeep

5 अध्याय
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कहते हैं की जो महाभारत की कथाओं में नहीं है वह अन्यत्र कहीं नहीं है और जो महाभारत में है वह हर जगह है. कालचक्र में महाभारत की कुछ अनकही कहानियों का नाटकीय रूप से वर्णन किया गया है. और एक नवजात बालक जो बाणों के साथ इस धरती पर प्रगट हुआ, कैसे वह महाभारत के महान योद्धाओं से संबंधित है. उपन्यास में आगे आपको महाभारत के बाद कि कहानियाँ पड़ने को मिलेगी. महाभारत के बाद कौन-कौन से महान गुरु भारत वर्ष में हुये. ये उपन्यास शुरुआती कलयुग के समय की कहानियों का संग्रह है. 

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पुस्तक के भाग

1

कालचक्र - भाग 3 ( द्रोण का जन्म )

7 मार्च 2022
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1
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रात के काले बादल दूर कहीं बरस चुके थे… महर्षि भारद्वाज गुफा के मुहाने आकर सुबह की पहली धूप का स्वागत कर रहे हैं… फिर से पायल की मधुर आवाज… एक स्त्री… स्वेत वत्र धारण किये हुये… नदी कि ओर जा

2

कालचक्र - भाग 2 ( कृप का जन्म )

7 मार्च 2022
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समय का पहिया कितनी जल्दी घूमता है. अठारह साल हो गये जब ऋषि गौतम को शरव्दान मिला था. इन अठारह वर्षों में शरव्दान ने योग और वेद का ज्ञान अपने पिता से प्राप्त कर लिया था.दिन का तीसरा पहरपश्चिम दिशा में स

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कालचक्र - भाग 1 ( धनुर्वेद का पुनरागमन )

8 मार्च 2022
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एक सुबह जब सूरज आकाश को नीला करने के लिए पूरी उन्मुक्तता के साथ अपनी रोशनी फैला रहा था, उसी समय गंगा नदी में स्नान के बाद ऋषि गौतम सूर्य को अर्घ दे रहे थे, कमर के नीचे धोती पहने हुये, उनके बायें कंधे

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कालचक्र - भाग 4 (एक योद्धा की बापसी )

8 मार्च 2022
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कोई अज्ञात व्यक्ति ऋषि गौतम की आश्रम की ओर बढ़ रहा था… उसके पूरे शरीर मे कई दिनों की धूल-मिट्टी लगी हुई थी… उसके लंबे बाल पेड़ की बेलों की तरह उसके कंधे तक आ रहे हैं… लगता है कोई तपस्वी बहुत दिनों बाद अ

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कालचक्र - भाग 5 ( धनुर्वेद का निर्माता )

8 मार्च 2022
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ऐसा नहीं है कि सतयुग में सब कुछ अच्छा होता है या कलयुग में सबकुछ गलत ही होता है. हर युग मे धर्म और अधर्म दोनों होता है. इस समय ये जो अंधकार द्वापर को दिख रहा है, प्रकाश भी कहीं न कहीं से होगा, वह

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