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चम्बल की बदलती तस्वीर

20 सितम्बर 2021

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चम्बल की बदलती तस्वीर  साथियों एक समय हुआ करता था जब चंबल का नाम संपूर्ण हिंदुस्तान में डकैतों के नाम से जाना जाता था हम चंबल के स्थानीय लोग कभी किसी बड़े शहर में जाते थे और होटल में रूम बुक करने के लिए कहते थे तो होटल मालिक जब हमारा एड्रेस नोट करता तो कलम एक तरफ रख देता और कहता हमारे होटल में आपके लिए कमरा नहीं है तब बड़ा कष्ट होता कि आखिर हमारे चंबल में ऐसा क्या है कि लोग चंबल के लोगों से इतना घबराते हैं पर वास्तविकता यह नहीं थी जैसे लोगों में प्रसारित हुई थी वास्तविकता कुछ और थी चंबल ग्रामीण क्षेत्र है जंगल का एरिया है यहां चंबल सिंध और कुंवारी नदी का संगम है जिस कारण यहां घने जंगल होने से लोगों का शिक्षा का स्तर ठीक नहीं रहा जब हिंदुस्तान का हर शहर विकसित हो चुका था तब भी भिंड और मुरैना काफी पीछे थे डकैत नाम से प्रसिद्ध इस क्षेत्र के वास्तविक लोग बहुत ही भोले वाले और जुबान के धनी हैं जो कहते हैं वही करते हैं दूसरी बात इनके अंदर यह है यह लोग किसी को धोखा नहीं देते जो कुछ कहते हैं मुंह पर कह डालते हैं वास्तविक विषय यह है चंबल के डकैतों को हम डकैत नहीं कह सकते उन्हें बागी कहना ठीक रहेगा क्योंकि सिस्टम के खिलाफ बगावत करने वालों को हम डकैत नहीं कह सकते चंबल में सीधे-साधे सज्जन और किसान निवास करते हैं जब-जब इन भोले भाले लोगों पर कोई परेशानी आई बाहुबली लोगों ने जमीनों पर कब्जे करने का प्रयास किया तब इन भोले वाले किसानों ने शासन और प्रशासन के सामने गुहार लगाई तो शासन और प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए भोला भाला किसान आखिर क्या करता उसने बंदूक उठाई और स्वयं इंसाफ करने बीहड़ों की राह पकड़ ली

सूबेदार पान सिंह तोमर इसका जीता जागता उदाहरण है पान सिंह तोमर एक फौज का सिपाही के साथ थी एथलेटिक्स चैंपियन भी था उसने विदेशों में हिंदुस्तान का नाम रोशन किया लेकिन अपने गांव की 1 बीघा जमीन के लिए शासन और प्रशासन के सामने गुहार लगाई लेकिन शासन और प्रशासन ने आंखों पर पट्टी बांध ली तो मजबूरन एक सेना के सूबेदार पद पर तैनात व्यक्ति को भी बंदूक उठानी पड़ी और चंबल के बीहड़ का रास्ता अपनाना पड़ा कोई भी इंसान मां के पेट से डकैत बनकर जन्म नहीं लेता सिस्टम उसको डकैत बना देता है समय रहते वह ऐसे मजलूम की सहायता शासन और प्रशासन करता तो क्यों भोले-भाले लोग इंसाफ के लिए खुद ही बंदूक उठा लेते जब जब शासन और प्रशासन निष्क्रिय हुआ है तब तक चंबल ने एक पान सिंह को जन्म दिया है

लेकिन अब चंबल की तस्वीर बदलती जा रही है चंबल के हजारों नौजवान भारतीय सेना में अपनी वीरता के करतब दिखा रहे हैं कारगिल युद्ध इसका जीता जागता उदाहरण है चाहे भिंड का सैनिक सुल्तान सिंह नरवरिया हो या कोई अन्य जिन्होंने कारगिल के युद्ध में पूरे विश्व में अपनी वीरता का परिचय दिया था इसके अलावा कई नौजवान फिल्मों में अपना हुनर दिखा रहे हैं भिंड के विकास के लिए राजनेता वैसा काम नहीं कर रहे जैसा एक लोक सेवक को करना चाहिए यहां रोजगार के लिए कोई साधन नहीं है किसानों के बेटे अपनी आजीविका चलाने के लिए पढ़ लिख कर रेत उत्खनन का व्यवसाय कर रहे हैं जो अवैधानिक है क्योंकि भिंड जिले की धरती पर मालनपुर कस्बे में कई बड़े उद्योग तो हैं पर स्थानीय लोगों को उन उद्योगों में नौकरियां नहीं मिलती भिंड जिले की धरती पर बने उद्योग इस जिले की बिजली और पानी का तो उपयोग कर रहे हैं पर इस जिले के बेरोजगार नौजवानों को नौकरियां नहीं देते यह एक बड़ी समस्या बनती जा रही है वैसे तो पूरे हिंदुस्तान में बेरोजगारी निरंतर बढ़ती जा रही है फिर भी अगर स्थानीय उद्योगों में जिले के नौजवानों को अगर नौकरियां मिलेंगी तो निश्चित रूप से इस जिले के नौजवानों की तस्वीर बदल जाएगी नौजवानों की तस्वीर बदल जाएगी देखने में आया है किस जिले में राजनेता बेरोजगार युवकों का अपने राजनीतिक फायदे में यूज करते हैं और उन युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल देते हैं राजनेताओं को चाहिए कि वह हमारे जिले के लिए उद्योग लेकर आए जिससे इस जिले के नौजवानों को रोजगार मिल सके इस जिले का विकास भी मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से काफी कम है पड़ोसी जिला मुरैना भिंड जिले से ज्यादा विकसित है पर इस जिले के विकास के लिए राजनेता ज्यादा प्रयास नहीं करते । साथियों इस आर्टिकल को आप अधिक से अधिक शेयर करें जिससे चंबल के नौजवानों की आवाज देश के कोने कोने तक पहुंचे लोग चंबल के प्रति जैसी मानसिकता बनाए हुए हैं वह मानसिकता बदल जाए साथ ही देश के राजनेता इस क्षेत्र के विकास तथा नौजवानों के लिए कुछ प्रयास करें धन्यवाद

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