आदतन मोहब्बत नहीं हुई थी मुझकोआदतन उसका यूँ टकरा जाना याद आता रहाआदतन बेखौफ बढ़ता रहा मैं उसकी ओरआदतन वो मिलने का दस्तूर निभाता रहाआदतन मैं रेत पर घर बनाता रहाआदतन वो मेरा सब्र परखता रहाआदतन मैं ख्वाब बुनता रहाआदतन वो उनसे नज़रें चुराता र
थक चूका हूँ , पर हारा नहीं हूँमैं निरंतर चलता रहूँगाआगे बढ़ता रहूँगाउदास हूँ ,मायूस हूँपर मुझे जितना भी आज़मा लो ,मैं टूटूँगा नहीं ,मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा,पर अपनी तक़दीर को, तक़दीर केहवाले सौंप , हाथ बाँधबैठूंगा नहीं ,मैं निरंतर कोशिश करता रहूंगा ,अपनी तक़दीर को कोसूंगा
मेरी कलम , जिससे कुछ ऐसा लिखूँके शब्दों में छुपे एहसास कोकागज़ पे उतार पाऊँऔर मरने के बाद भी अपनीकविता से पहचाना जाऊँमुझे शौक नहीं मशहूर होने काबस इतनी कोशिश है केवो लिखूं जो अपने चाहने वालोंको बेख़ौफ़ सुना पाऊँये सच है के मेरे हालातोंने मुझे कविता करना सीखा दियारहा तन्हा
जाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेबस इतना सुकून हैजैसा तुमने कियावैसा नहीं किया मैंनेजाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेहाँ खुद से प्यार करती थीमैं ज़रूरपर जितना तुमसे कियाउस से ज़्यादा नहींतुम्हारी हर उलझनों कोअपना लिया था मैंनेजाओ तुम्हें माफ़ किया मैंनेतुम्हारी लाचारियाँ मज़बूरियाँसब स्वीकार थी मुझकोसिर्फ उस रिश्ते
आओ दिखाऊं तुम्हें अपनी चमचमाती कारजिस के लिए ले रखा है मैंने उधार दिखावे और प्रतिस्पर्धा में घिर चूका हूँ ऐसे समझ में नहीं आता कब कहा और कैसे किसी के पास कुछ देख के लेने की ज़िद्द करता हूँ एक बच्चे के जैसे और फिर पूरा करता हूँ उधार के पैसे कटवा के अपना वेतन हर बार आओ
आज कल ओझल हो गयी है हिंदी एसेमहिलाओं के माथे से बिंदी जैसेकभी जो थोड़ा बहुत कह सुन लेते थे लोगअब उनकी शान में दाग हो हिंदी जैसेलगा है चसका जब से लोगों अंगरेजियत अपनाने काअपने संस्कारों को दे दी हो तिलांजलि जैसेअब तो हाय बाय के पीछे हिंदी मुँह छिपाती हैमात्र भाषा हो