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ममता का सागर

4 मई 2016

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ममता का सागर गहरा है इतना |  

जाऊँ जितनी गहराई में गहराता जाए वो उतना |

मेरे माँ कि विशेषता बतलाऊ मैं क्या ?

माँ तो सभी की विशेष होती है |

अतः जिस माँ का शिशु जब जब रोता है |

वो हर माँ उस शिशु के साथ रोती है |

जो भूखा हो बच्चा जिस जिस भी माँ का ,

वो हर माँ अपने हाथ का निवाला उसके हाथ देती है |

ममता के सागर में ज्यों मैने लगाई डुबकी,

तो पीड़ा जब भी हुई,जरुरत पड़ी ना मुझे रब की |

आशीष में माँ की इतना असर है |

जो हाथ वो रख दे हर दर्द बेअसर है |

कर्ज मैं उसका कैसे चुकाऊँ,

वो कहती है फर्ज था उसका, ना मानू मैं कर्ज और भूल जाऊँ |

इतने दयालु, इतने दयावान है |

हर माँ जग में सबसे महान है ||

संजना पाण्डेय

संजना पाण्डेय

जी हां, सच लिख है . माँ ऐसी ही होती हैं

7 मई 2016

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