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शायरी

18 दिसम्बर 2021

34 बार देखा गया 34
जो जमाने की पुरानी रीति है 
मैं भला कैसे ना उन पर काम करता 
छोड़ कर जाना मुझे पूरा था लाजिम 
मैं ही पागल था जो रोज उसको याद करता 

-Shivanshukla (शिvansh) 🖋❣️🖋

20 दिसम्बर 2021

Shivansh Shukla

Shivansh Shukla

22 दिसम्बर 2021

आभार🙏

Pragya pandey

Pragya pandey

बहुत सुंदर 🙏😊

19 दिसम्बर 2021

Shivansh Shukla

Shivansh Shukla

22 दिसम्बर 2021

शुक्रिया🙏

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हमने देखा है

1 सितम्बर 2021
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<blockquote><em><strong>प्रकृति को आज परेशा हमने देखा है... <br> <br> जो कल पेड लगा गए थे उन्हें काट

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शेर

4 सितम्बर 2021
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<h6><em><strong>फख़त मेरा बस एक चांद से वास्ता था.... </strong></em></h6> <h6><em><strong>वो रा

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लफ्ज़

7 सितम्बर 2021
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<blockquote><em><strong>अपने दिल के जजबातो को लफ्जो से बयाँ करता हूँ.. <br> उसे आज भी पता है कि मै उ

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मुस्कराती दुनिया

11 सितम्बर 2021
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<p>ज़िंदगी मे गमो का डेरा है..<br> <br> क्या पता कौन तेरा है कौन मेरा है..<br> <br> इस मुस्कराती दुनि

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फितरत

13 सितम्बर 2021
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<b><i>फितरत मेरी सुर्खियों में रहने की थी....</i></b><div><b><i><br></i></b><div><b><i>मुझे शानोशौकत

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खामोशी

13 सितम्बर 2021
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शीर्षक - *खामोशी*<div><br></div><div>तू नाराज है तो बता मुझको.. </div><div>मेरी गलतियों की दे

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शायरी

18 दिसम्बर 2021
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जो जमाने की पुरानी रीति है <div>मैं भला कैसे ना उन पर काम करता </div><div>छोड़ कर जाना मु

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