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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २६)

17 नवम्बर 2023

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धीरेन्द्र का , रात्रि के खाने पर ,नीलिमा प्रतीक्षा करती है ,उसके माता -पिता नीलिमा से कहते भी हैं -यदि वो दोस्तों के संग गया है ,तो शीघ्र नहीं आने वाला है किन्तु नीलिमा उसकी प्रतीक्षा करती है। नीलिमा के ससुर मोहनलाल जी ,बहु के इस व्यवहार से प्रसन्न हैं। वो अपने बेटे धीरेन्द्र को ,फोन करते हैं और उसे समझाते हुए बतलाते भी हैं कि बहु तुम्हारी प्रतीक्षा में है। तब धीरेन्द्र भी ,अपने दोस्तों का साथ छोड़कर ,घर के लिए प्रस्थान करता है। धीरेन्द्र भी नीलिमा के इस व्यवहार से प्रसन्न होता है ,दोनों साथ ही खाना खाते हैं। शयनकक्ष में भी दोनों संग -संग ही जाते हैं। नीलिमा को लाल गाउन में देखकर ,धीरेन्द्र नीलिमा को अपने समीप पलंग पर खींच लेता है। अब तो नीलिमा भी उसका विरोध नहीं करती है ,वो भी शर्माकर उसके सीने से लग जाती है। देर तक दोनों इसी तरह ,एक -दूसरे को महसूस करते रहे।







 तब अचानक से ,धीरेन्द्र नीलिमा से पूछता है -तुम कहाँ -कहाँ घूमी हो ?



नीलिमा बोली -अपने घर से कॉलिज और कॉलिज से घर या फिर मौहल्ले -पड़ोस में....... 



क्या......??तुम आजतक कहीं बाहर घूमने गयीं ही ,नहीं। तब नीलिमा ने सोचा -धीरेन्द्र उसे किसी भी तरह से नीचा न महसूस करा दे ,बोली -पढ़ने में रहते थे ,पापा का भी वहीं ऑफिस था। घूमने भी किसके पास जाते ?उस समय यो घूमने का अर्थ -किसी रिश्तेदारी में जाना ही होता था। तब नीलिमा जाती भी कहाँ ?मामा के घर तो बसरों से माँ ही नहीं गयी ,तब बच्चे कैसे जा पाते ? बुआ से पापा की बनती नहीं थी। यही सब सोचकर ,वो शांत रही। तभी धीरेन्द्र बोला -कश्मीर ,शिमला ,या फिर विदेश !!!



ये सब तो नीलिमा सोच भी नहीं सकती थी ,ऐसे स्थलों पर तो विवाह के पश्चात ,दीदी को जीजाजी ले गए थे। तब बोली -ऐसी जगहों पर तो ,शादी के बाद ही तो जाते हैं ,हनीमून के लिए...... 



उसकी बात सुनकर धीरेन्द्र हँसा और उसकी सादगी पर मर मिटा ,उसने हँसकर नीलिमा को अपनी बाजुओं में भींच लिया। नीलिमा थोड़ा कसमसाई और उसने भी अपने को ढीला छोड़ दिया। 



जब धीरेन्द्र ने उसके नजदीक अपने होंठ लाने चाहे ,नीलिमा को अब उसके मुँह से गंध आई और बोली - क्या तुम पीते हो ?



नहीं तो.... आज हमारी सुहागरात हैं न.... दोस्तों ने ज़िद करके एक पैग पिला दिया। कहते हुए उसने नीलिमा का गाउन उसके तन से जुदा कर दिया और उसे घुर-घुरकर देखने लगा। नीलिमा बुरी तरह शर्मा कर बैठ गयी ,जब उसे कुछ सुझा नहीं ,तब उसने एकदम से लाइट बंद कर दी। पहले तो तनिक धीरेन्द्र झुंझलाया किन्तु नीलिमा की सोचकर चुप रहा और वो उसके बदन को अँधेरे में ही छूकर महसूस करने लगा। नीलिमा भी उसके स्पर्श से मदहोश सी होने लगी थी। दूर....... कहीं ,उस एकांत में किसी के रेडियो के गाने की आवाज आ रही थी -''दो सितारों का जमीं पर है ,मिलन आज की रात ,आज की रात। ''



आज नीलिमा एक अलग ही दुनिया का अनुभव कर रही थी ,जैसे किसी दूसरे ही लोक में विचरण कर रही थी। सुबह नीलिमा की जब आँख खुली तो उसने अपने को ,धीरेन्द्र की बांहों में ,पाया। अपनी उस अवस्था को दिन के उजाले में देखकर ,स्वयं पर ही शर्मा गयी और फुर्ती से उठी और अपना गाउन पहनकर स्नानागार में चली गयी। वहाँ से नहा धोकर वो बाहर आई ,धीरेन्द्र अभी भी सो रहा था। उसे देखकर मुस्कुराई और नीचे चल दी। वहाँ उसके ससुर ही उसे दिखे ,उसने उनके पैर छुए और पूछा -अभी मम्मी जी नहीं उठीं। 



वो उठेगी ,जब मैं उसे चाय बनाकर दूंगा ,बिना चाय के वो नहीं उठती है मोहनलाल जी ने उसकी सास के विषय में उसे जानकारी दी। 



क्यों ,कांता नहीं है ?



नहीं बेटा ,वो तो नौ बजे आएगी और नाश्ता बनाएगी ,घर की सफाई करेगी। 



कोई बात नहीं ,आज चाय! मैं बना देती हूँ ,आज ही क्या ?अब से आपके और मम्मी जी के लिए ,मैं ही चाय बना दिया करूंगी ,मुस्कुराकर बोली -आज से आपकी छुट्टी !



उसकी मुस्कान और उसकी बातें सुनकर ,वे भाव -विभोर हो उठे और बोले -जुग -जुग जियो बेटा !!!



नीलिमा ने चाय बनाई और मोहनलाल जी से पूछा -पापा जी ,ये क्या लेते हैं ?



अभी तो चाय ही पियेगा ,उसके बाद जूस पीता है तब तक तो कांता भी आ जाएगी ,उसी से पूछ लेना। 



आज मोहनलालजी ,मुस्कुराते हुए अपनी पत्नी के लिए चाय लेकर जाते हैं। 



उन्हें देखकर पल्ल्वी पूछती है -क्यों ,क्या हुआ आज बड़ा मुस्कुरा रहे हो ?



अब क्या मैं मुस्कुरा भी नहीं सकता ? मेरे मुस्कुराने पर भी बंदिश लगाओगी वे तुनकते हुए बोले। 



पल्ल्वी ने चाय का एक घूंट ही भरा था और बोली -ये चाय क्या तुमने बनाई है ?



मोहनलाल जी घबराते से बोले -क्यों ,क्या हुआ ?चाय अच्छी नहीं बनी। 



नहीं ,चाय तो अच्छी है ,किन्तु थोड़ा स्वाद में फ़र्क है। 



मोहनलाल जी ने सोचा ,अब तो सच्चाई बताने में कोई बुराई भी नहीं है और बोले -आज चाय बहु ने बनाई है। 



ह्म्मम्म्म्म ,तभी सोचूं, आपके चेहरे पर मुस्कुराहट देखकर ही ,मुझे एहसास हो गया था कि कुछ तो गड़बड़ है। मन ही मन सोचने लगी ,इसे बड़ा चाव चढ़ा है ,घर के कामों का ,इसका ये शौक भी पूर्ण कर दूंगी। प्रत्यक्ष बोली -बहु को अभी क्यों रसोईघर में घुसने दिया ,अभी तो उसकी ''मुँह दिखाई '' रसोई की रस्म भी पूर्ण नहीं हुई। उससे कहो -अभी ,ये कार्य न करे ,बस धीरेन्द्र पर ध्यान दे। 



पल्ल्वी की बातों से ,मोहनलाल जी समझ नहीं पाए कि वो प्रसन्न है या नहीं। 



नीलिमा फ़िल्मी तरीक़े से ,धीरेन्द्र के लिए चाय लेकर गयी और बोली -उठिये ! चाय लीजिये। 



एक -दो आवाज में तो वो उठा नहीं ,शायद वो गहरी नींद में था और झल्लाकर बोला -अभी मुझे ,और सोना है। 



नीलिमा बोली -मैं भी तुम्हारे संग ही सोइ थी और तुमसे एक घंटा पहले उठ गयी। नीलिमा की आवाज सुनकर अब वो जैसे गहरी नींद से जागा और फुर्ती के साथ उठ बैठा। रात्रि की सभी बातें उसे स्मरण हो आईं ,तब तक नीलिमा भी पलंग के पास ही रखे स्टूल पर चाय रख चुकी थी। नीलिमा आज उसे और भी प्यारी लग रही थी ,झट से उसे अपने करीब खींच लिया। नीलिमा कहती रह गयी -चाय पी लीजिये ,ठंडी हो जाएगी।



 हो जाने दो ! कहकर उसके चेहरे पर अपने प्यार की मुहर लगाने लगा और बोला -कल की तरह ,एक पारी फिर से हो जाये। 



नीलिमा उसके इरादों को भांपकर ,बोली -चलो ,उठो !मैं नहा चुकी हूँ और तुम अभी भी....... कहकर उसने मुँह बना दिया।



 अच्छा जी !अब हमारा साथ अच्छा नहीं लग रहा ,रात को तो कैसे लिपट गयी थी ? मेरे चेहरे पर ये देखो ! किसने ये निशान लगा दिए ?और ये नाखूनों के निशान उफ..... अभी मम्मी को दिखाकर आता हूँ और मम्मी से पूछता हूँ ,पता नहीं ,रात्रि में किसी चुड़ैल ने मेरे शरीर पर ये निशान बना दिए। 



उसकी बातें सुनते हुए नीलिमा शर्मा रही थी ,किन्तु जब धीरेन्द्र ने'' किसी चुड़ैल'' शब्द कहे तो उसे मारने दौड़ी ,और बोली - मैं चुड़ैल हूँ। 



मैंने तो तुम्हारे विषय में कुछ कहा ही नहीं ,मैं तो उसकी बात कर रहा हूँ , जिसने ये निशान बनाये जो मुझसे रात्रि को लिपट रही थी ,मुझे प्रेम कर रही थी उसने ठंडी और गहरी श्वांस लेते हुए कहा -उफ़.... क्या नशा था ?तुम कौन हो ?तुम वो रात्रि वाली लड़की नहीं ,तुम तो मुझे देखकर मुँह बना रही हो और वो...... हाय कहकर धीरेन्द्र ने तकिये को गले लगा लिया। 



नीलिमा को ,धीरेन्द्र का इस तरह ,तकिये से लिपटना अच्छा नहीं लगा और बोली -जब मैं यहाँ हूँ ,तब इस तकिये का क्या काम ?







अब यही तो मेरा साथी है ,वो तो परी...... रात वाली परी कहीं चली गयी। 



मैं यहीं हूँ ,कहकर नीलिमा उसके क़रीब आ खड़ी हुई ,धीरेन्द्र जो इतनी देरी से भूमिका बना रहा था ,नीलिमा के करीब आते ही उसे फिर से अपने क़रीब खींच लिया और अब तो वो सीधे उसके ऊपर जाकर गिरी। तब तक धीरेन्द्र के हाथों ने तेजी से कार्य किया और नीलिमा की साड़ी उसके तन से अलग कर दी।नीलिमा कहती ही रह गयी ,मम्मी -पापा जाग गए हैं ,धीरेन्द्र ने उसकी एक भी नहीं सुनी और उसके मुँह पर अपना हाथ रख दिया ,अब दोनों साथ ही नहाये और तैयार होकर बाहर निकले ,अब तक कांता भी आ चुकी थी और नाश्ते की तैयारी में जुटी थी। मोहनलाल जी बेटे की चेहरे की चमक और बहु की शर्म से झुकी जा रहीं पलकों को देखकर ,प्रसन्न थे और मन ही मन सोच रहे थे। इस घर में इतने दिनों से जो ग्रहण लगा था ,शायद छंट जाये। 



बड़ी बहु जब आई थी ,तब भी कुछ दिनों तक तो घर में खुशहाली रही किन्तु बड़ा तो अपनी माँ का ही कहा मानता था।बहु अच्छे बड़े घर की ली थी ,दहेज भी बहुत लाई थी किन्तु सास झुकने के लिए तैयार नहीं तो बहु भी अपने को किसी से कम नहीं मानती थी। दोनों की ही ,बात -बात में नाक कट जाती थी बेइज़्जती हो जाती थी। बड़ा बेटा अभी इतना नहीं कमाता था कि अपनी पत्नी की जायज़ और नाज़ायज मांग पूर्ण कर सके।बहु थी कि खर्चे ही बताती रहती थी ,किट्टी में जाना ,होटल में पार्टियों में जाना ,नए -नए गहने खरीदना ,बस यही उसका जीवन था। कम तो मेरी श्रीमती जी भी नहीं थीं ,तब दोनों में तकरार बढ़ने लगी।    

क्या निलिमा इस घर में और घर के लोगों के दिलों में अपनी जगह बना पायेगी ? क्या ये उदास घर फिर से खुशियों से भर पायेगा   क्या धीरेंद्र की मम्मी कभी निलिमा से खुश होगी या नही   ?जानना है तो पढ़ते रहिये -ऐसी भी ज़िंदगी
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रचनाएँ
ऐसी भी ज़िंदगी
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यह कहानी निलिमा सक्सेना के जीवन की कहानी है,जो इस समाज की एक इकाई है,नारी जाति पर अनेक कहानियाँ लिखी गयी हैं और लिखी जाती रहेंगी किंतु हर नारी के जीवन का एक अलग ही पहलू उभरकर आता है,जो एक कहानी बन जाता है।ऐसी एक नारी है "निलिमा सक्सेना " जो एक मध्यमवर्गीय परिवार से है,और आज के समय में वो एक "समाज सेविका" है। इस बीच एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की के साथ उसकी ज़िंदगी में ऐसा क्या घटित हो गया ? जो नारी जाति की उपेक्षा सहन करती है,जिसके परिवार में लड़कियों को लड़कों से कम आँका जाता है,उसने उपेक्षा झेली जिसमें लड़कियों की शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता,सभ्य समाज का हिस्सा होने पर भी,उसे आगे बढ़ने नहीं दिया जाता उसकी जीवन के ऐसे कौन से पहलू हैं जो सोचने पर मजबूर करते हैं
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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १)

31 अक्टूबर 2023
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प्यारे भाइयों और बहनों ,दोस्तों ,जैसा भी माने , सम्मानित पाठकों ! मेरा अभिवादन स्वीकार करें।अभी तक मैंने कई धारावाहिक लिखे ,जिनमें सबसे बड़ा धारावाहिक ''बदली का चाँद ''है ,जो अभी भी चल रहा है। अभी मैं

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २)

31 अक्टूबर 2023
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नीलिमा सक्सैना ''जो एक ''समाज सेविका '' है ,उसके तीन बच्चे हैं - दो बेटी एक बेटा ,जो अब बड़े हो चुके हैं ,उसकी छोटी बेटी तो अब विदेश में ,पढ़ाई करने गयी है ,दूसरी भी परा स्नातक में है ,बेटा अभी कुछ -कुछ

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३)

1 नवम्बर 2023
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नीलिमा अपने दफ़्तर में बैठी ,लोगों से बातें कर रही थी और अपने सहयोगियों से वार्तालाप में व्यस्त थी तभी एक महिला रोते हुए आती है और कहती है - मैडम देख लो !अब मैं क्या करूं ? मेरा पति ,मेरी बच्ची का विवा

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४)

2 नवम्बर 2023
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नीलिमा आज कोई सहमी ,झिझकी सी ,शर्मीली लड़की नहीं ,उसने अपने को आज इतना मज़बूत बना लिया ,आज वो मीट की दुकान पर जाकर ,स्वयं ही अपने बेटे के लिए मीट लाती है , उसकी दवाई गोली ,संस्था का कार्य सभी काम वो स्व

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५)

2 नवम्बर 2023
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आपको क्या लगता है ? जो लड़की इतनी व्यस्त रही ,और इतनी परेशानियाँ देखीं ,आज तीन बच्चो की माँ है ,क्या उसकी ज़िंदगी में ,कभी प्यार ,रोमांस भरे दिन, कभी आये भी होंगे ?हाँ ,आये थे ,जब वो दसवीं कक्षा में थी।

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६)

3 नवम्बर 2023
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नीलिमा की ज़िंदगी में भी हलचल होती है ,जब उसे एक लड़का अपनी साईकिल से ,उसका पीछा करते हुए आता है, उसे अपने होने का एहसास दिलाता है। वो तो स्वयं भी नहीं समझ पा रही थी कि ये प्यार है या महज़ आकर्षण ,बस उसे

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७)

4 नवम्बर 2023
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जो लड़की घर से ,स्कूल और स्कूल से घर का रास्ता ही जानती है ,उसे एक लड़के ने ''प्रेम पत्र ''लिखा ,वो ''प्रेम पत्र ''ही था या कुछ और...... किसी लड़की को ,चुपचाप कोई पर्ची देता है ,तो वो ''प्रेम पत्र ''ही म

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ८)

4 नवम्बर 2023
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नीलिमा का विवाह तय तो हो जाता है ,किन्तु न ही उसने लड़के की कोई तस्वीर देखी है , न ही उसके विषय में कोई जानकारी है। नीलिमा की दीदी आकर ,लड़के के विषय में पापा से जानकारी लेना चाहती है और जब उसकी तस्वीर

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ९)

5 नवम्बर 2023
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नीलिमा को आज अचानक न जाने किसका फोन आ गया ? उसके घर में ये फोन भी तो, अभी कुछ दिनों से ही लगा है या यूँ कहें ,जब से नीलिमा के रिश्ते की बात चली है। अभी तक तो उसने किसी को नंबर दिया भी नहीं, फिर किसका

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १०)

5 नवम्बर 2023
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नीलिमा को ,धीरेन्द्र का फोन आता है ,उसे तो आप जानते ही होंगे ! नहीं जानते हैं तो ,मैं बताये देती हूँ ,''धीरेन्द्र सक्सैना '' और कोई नहीं ,नीलिमा का होने वाला पति है। बातचीत से तो बड़े ही खुले दिल का और

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ११)

6 नवम्बर 2023
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नीलिमा को ,अपनी नई ज़िंदगी में प्रवेश करने से ड़र लग रहा है ,यही ड़र वो अपनी माँ को बताती है ,उसके ड़र को देखकर ,उसकी मम्मी पार्वती उसे समझा तो देती है किन्तु स्वयं ,ज़िंदगी के तीस बरस पीछे चली जाती है। जब

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १२)

6 नवम्बर 2023
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पार्वती ''जो नीलिमा की माँ है ,वो नीलिमा के ड़र को दूर करने के लिए , उसे समझाती हैं किन्तु स्वयं अपनी ज़िंदगी के तीस बरस पीछे पहुंच जाती है। जब उसे गुजरात के एक गांव से ,पहली बार यहाँ लाया गया। उस रात्र

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १३)

7 नवम्बर 2023
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पार्वती से विवाह करके ,तरुण अपने घर आता है, किन्तु राह में रूककर ,पार्वती के लिए कुछ कपड़े ,सामान वगैरह लेकर रात्रि में, दिल्ली शहर में ,रुककर रात्रि वहीं बिताना चाहते हैं। बंद कमरे में दोनों अकेले होत

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १४)

9 नवम्बर 2023
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नीलिमा की मम्मी पार्वती को ,अपनी बेटी के ,अपने से दूर जाने का दुःख है ,तो दूसरी तरफ उसे एक अच्छी ससुराल मिलने की प्रसन्नता भी है। बेटी की प्रसन्नता में , अपने सभी दुःख भुला देना चाहती है ,किन्तु कुछ ग़

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १५)

9 नवम्बर 2023
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नीलिमा सक्सैना ''जिसने अभी बाहरवीं क्लास ही पास की है ,उसके पिता ,एक अभियंता ''धीरेन्द्र सक्सैना ''से उसका विवाह निश्चित कर देते हैं। न ही ,धीरेन्द्र ने नीलिमा को देखा है ,न ही नीलिमा ने धीरेन्द्र क

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १६)

10 नवम्बर 2023
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नीलिमा और नीलिमा का परिवार ,हरिद्वार के एक होटल में जाता है ,वहीँ नीलिमा का विवाह होना तय हुआ था। उन सभी की ,हर सुविधा का ख़्याल रखा गया था। सभी लोग इतनी पैसे की चकाचौंध देखकर ,आश्चर्य चकित हैं , उन्हे

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १७)

10 नवम्बर 2023
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नीलिमा की शादी में पार्वती जो नीलिमा की माँ है ,उसे अपने दिन स्मरण हो आते हैं। जब वो पहली बार अपनी ससुराल आई और उसे माँ [सास ]के पास घर गृहस्थी सिखाने के लिए छोड़ दिया गया ,तभी उसे पता चलता है। उसका तो

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १८)

11 नवम्बर 2023
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पार्वती ने तरुण को अपना लिया ,अब वो उसके संग रहकर अपनी सभी परेशानियों को भूल जाना चाहती है। यहां उसे नए वस्त्र ,आभूषण और रहने के लिए ,घर सभी कुछ तो मिला है। सम्मान देने वाला पति भी। आज पार्वती की मुँह

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग १९)

13 नवम्बर 2023
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पार्वती के बेटी तो हुई ,किन्तु तरुण का व्यवहार बदलने लगा। जब वो अपनी लड़की के संग होती ,तो वो झुंझला जाता। ये कैसी विडंबना है ? एक आदमी को औरत की चाह होती है किन्तु जब उसी के घर में ,एक कन्या जन्म लेती

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २०)

14 नवम्बर 2023
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बेटे के होने की ख़ुशी में ,ढ़ोल बजा और घर के बाहर थाली भी पीटी गयी। बेटा ,बिल्कुल अपने बाप पर ही गया था । दोनों बेटियों के बिल्कुल विपरीत ,किन्तु सभी की आँखों का तारा मयंक देखने में बिल्कुल भी अच्छा नही

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २१)

14 नवम्बर 2023
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नीलिमा की शादी धीरेन्द्र से हो रही है ,उसकी चाची और उनकी बेटी डिम्पी मंच पर दुल्हन को लाती हैं। लड़के और लड़की वालों में नोक -झोंक चलती है और इसी मस्ती के बीच नीलिमा और धीरेन्द्र एक दूसरे को वरमाला पहना

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २२)

15 नवम्बर 2023
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नीलिमा अपने माता -पिता को छोड़ ,अपने परिवार के लोगो को छोड़कर ,अपनी ससुराल आने के लिए गाड़ी में ,बैठती है ,उधर नीलिमा के माता- पिता और परिवारजन ,होटलवालों के व्यवहार से क्षुब्ध होकर घर वापस लौट जाते हैं।

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २३)

16 नवम्बर 2023
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नीलिमा और धीरेन्द्र कुछ घंटे , धीरेन्द्र के दोस्त के, होटल में ही व्यतीत करते हैं और अब अपने घर के लिए निकलते हैं। धीरेन्द्र का घर आ जाने पर ,नीलिमा के मन में ख़ुशी के साथ ही उसके दिल की धड़कने भी बढ़ने

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २४)

16 नवम्बर 2023
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नीलिमा ,धीरेन्द्र के संग अपनी ससुराल आती है ,किन्तु जैसा उसने सोचा था ,वैसा उसको कुछ भी देखने को नहीं मिला। वहाँ पता नहीं ,कैसा ?अज़ीब सूनापन नजर आ रहा था। देखकर कोई कह नहीं सकता, इस घर के लड़के

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २५)

17 नवम्बर 2023
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धीरेन्द्र ,नीलिमा को लेकर अपने घर आता है ,किन्तु उसकी मम्मी शायद उससे नाराज है ,ऐसा नीलिमा को उनके व्यवहार से लगता है। उसे लगता ही नहीं ,ये ही सच्चाई है। वो नही चाहतीं थीं कि उनका लाड़ला धीरेन्द्र किस

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २६)

17 नवम्बर 2023
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धीरेन्द्र का , रात्रि के खाने पर ,नीलिमा प्रतीक्षा करती है ,उसके माता -पिता नीलिमा से कहते भी हैं -यदि वो दोस्तों के संग गया है ,तो शीघ्र नहीं आने वाला है किन्तु नीलिमा उसकी प्रतीक्षा करती है। नीलिमा

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २७)

18 नवम्बर 2023
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नीलिमा के मधुर व्यवहार के कारण ,उसके ससुर प्रसन्न होते हैं किन्तु उसकी सास पल्ल्वी को बात कुछ जंचती नहीं ,उसका स्वभाव ही ऐसा है। कुछ घमंडी भी है ,नीलिमा के व्यवहार के कारण वो सोचते हैं -शायद इस घर में

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २८)

19 नवम्बर 2023
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बिजेंद्र जो पल्ल्वी और मोहनलाल जी का बड़ा बेटा है और नीलिमा का ,रिश्ते में जेठ भी है। उसका भी विवाह हुआ और उसकी पत्नी के गलत व्यवहार के चलते, उसका तलाक़ भी हो गया। नीलिमा के अच्छे व्यवहार को देखते हुए ,

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग २९)

20 नवम्बर 2023
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पता नहीं ,ये ज़िंदगी भी न..... कहाँ कि कहाँ ले जाती है ? इंसान सोचता कुछ है और ये न जाने कहाँ लेजाकर पटक देती है ?कितने मन से ,अपने बेटे का विवाह किया। सुंदर और पैसेवाले घर की बहु भी आई ,सब कुछ ठीक ही

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३०)

20 नवम्बर 2023
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बिजेंद्र की पत्नी झुकने के लिए तैयार नहीं थी ,न ही ,उसे अपनी गलती का एहसास था। मालूम नहीं ,उसके घरवालों ने उसे समझाया भी या नहीं। अभी भी सबके दिमाग़ में ,एक उम्मीद बाक़ी थी शायद वो अभी भी आ जाये। एक दिन

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३१)

21 नवम्बर 2023
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कृति जो बिजेंद्र की पत्नी है ,या थी ,एक तरीक़े से उसका ये षड्यंत्र ही कह सकते हैं। जो उसने अपने पुराने दोस्त से मिलने के लिए रचाया। कितना बड़ा विश्वासघात किया ?इस परिवार के साथ...... पहले तो अपनी गेेरजि

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३२)

22 नवम्बर 2023
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नीलिमा और धीरेन्द्र हरिद्वार की सड़कों पर ,घरवालों से छुपकर ,रात्रि में घूम रहे थे। गंगा घाट पर पहुंचकर आइसक्रीम खाते हुए ,मस्ती कर रहे थे। धीरेन्द्र जानना चाहता था -कि नीलिमा हनीमून पर कहाँ जाना चाहती

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३३)

23 नवम्बर 2023
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नीलिमा ,' स्विट्जरलैंड 'की वादियों में अपने को पाती है ,उसने तो कभी सपने में भी, ऐसा नहीं सोचा था कि वो कभी विदेश यात्रा करेगी। उसे तो लग रहा था -जैसे ये जीवन और उस जीवन में कोई समानता ही नहीं। वो तो

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३४)

25 नवम्बर 2023
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आज घर में कई तरह की चीजें बनी हुई हैं ,' चंद्रिका' भी ,अपने मायके में ही आ गई है क्योंकि आज नीलिमा जो आई है। ' पग फेरे', की रस्म के लिए , वैसे तो उसके मायके से किसी ने बुलावा भी नहीं भेजा था। उसके मा

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३५)

25 नवम्बर 2023
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नीलिमा अपने घर में आती है ,और अपने परिवार के सभी लोगों को उपहार देती है। सभी उसके आने से प्रसन्न हैं ,उसकी बहन चंद्रिका भी ,नीलिमा से मिलने ,वहीं आ जाती है। सभी प्रसन्न हैं किन्तु पापा ऐसे ही हैं ,अब

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३६)

25 नवम्बर 2023
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साधू बाबा की बातें सुनकर ,नीलिमा का मन थोड़ा उदास हो गया था किन्तु अपने मन को समझा रही थी। पता नहीं ,बाबा ने क्या सोचकर कहा होगा ?जो भी होगा ,देखा जायेगा। यही सोचकर अपने मन को बहलाने का प्रयत्न कर रही

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३७)

26 नवम्बर 2023
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नीलिमा ने पहले पढ़ाई की इच्छा ज़ाहिर की ,उसके पश्चात ,कार सीखने लगी ,जब से उसे वो बाबा मिले तब से पता नहीं ,उसके मन मस्तिष्क में क्या चल रहा है ?कुछ कहा नहीं जा सकता। धीरेन्द्र ने तो उसे ,एक सीधी सी लड़क

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३८)

28 नवम्बर 2023
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टीना , बड़े झटके से उठी ,वो हाँफ रही थी जैसे बहुत दूर तक दौड़ी हो।आँखें खुलने के पश्चात भी ,वो अभी उसी सपने के विषय में सोच रही थी। उसे ये कोई सपना नहीं लग रहा ,उसे लग रहा था ,जैसे -वो किसी अनजान को जान

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ३९)

28 नवम्बर 2023
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धीरेन्द्र अपने कॉलिज के कार्यक्रम में , राजा दुष्यंत बनता है और टीना शकुंतला ,वो टीना जो अंग्रेजी उपन्यास पढ़ती है। बिल्कुल फिल्मी नायिकाओं की तरह रहती है ,गाड़ी चलाना जानती है ,घूमती-फिरती है, सुंदर है

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४०)

28 नवम्बर 2023
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टीना और धीरेंद्र की दोस्ती को छह माह हो गए ,धीरेन्द्र टीना की दोस्ती के लिए कुछ भी, करने को तैयार हो जाता है और अपने पापा से भी यही वायदा करता है।किन्तु उसके दोस्त तो जैसे ,उसकी ज़िंदगी को बर्बाद करने

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४१)

30 नवम्बर 2023
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नीलिमा गाड़ी चला रही थी अचानक गाड़ी रुक गयी। धीरेन्द्र को तेज झटका लगा और वो ख्यालों की दुनिया से बाहर आ जाता है। ये तुम क्या कर रही हो ?वो झल्लाकर बोला। गाड़ी चलाना सीख़ रही हूँ ,और जो मुझे गाड़ी चला

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४२)

1 दिसम्बर 2023
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समझ नहीं आता ,ज़िंदगी ! नीलिमा के जीवन में क्या -क्या रंग भर रही है ?ये उसके लिए अच्छा है या बुरा। देखने में तो सब अच्छा ही लग रहा है, किन्तु कब क्या होने वाला है ?कोई नहीं जानता ,जो खबर उसके ससुराल वा

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४३)

2 दिसम्बर 2023
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रात भर धीरेन्द्र की तबियत बिगड़ी रही ,यहाँ तक कि धीरेन्द्र ने वमन कर ,चादर भी खराब कर दी। ऐसा नहीं कि नीलिमा उसे छोड़ कर भाग गयी। उसने उस समय उसकी सेवा की किन्तु अब उसे धीरेंद्र पर क्रोध भी बहुत आया ,एक

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४४)

2 दिसम्बर 2023
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ज़िंदगी भी ,क्या -क्या खेल दिखाती है ? आज माँ की वो लाड़ली बेटी दो बच्चियों की माँ बन चुकी है। अपने घर की देखभाल के साथ -साथ उन बच्चियों को भी पाल रही है। वो अपनी ज़िम्मेदारियों के चलते ,अपनी शिक्षा , अप

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४५)

3 दिसम्बर 2023
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नारी जीवन आसान नहीं , उसके मन की कोमलता ,निश्छलता हर पल उसे छलती रहती है। उसका कोमल मन किसी पर भी विश्वास कर लेता है , शक्ति का रूप होने के बावजूद भी ,वो किसी बेल की तरह किसी से लिपट जाना चाहती है , ए

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४६)

4 दिसम्बर 2023
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नीलिमा और धीरेन्द्र बाहर से घूमकर आये ,पल्ल्वी एकदम शांत थी ,कुछ देर पश्चात आकर बोली - बहुत हो चुका ,सम्भालो ! अपनी बेटियों को...... क्यों क्या हुआ ?धीरेन्द्र उनके उखड़े चेहरे को देखकर बोला।क्या ,

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४७)

5 दिसम्बर 2023
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नया घर ,नया वातावरण ,नई जगह सब कुछ तो अच्छा लग रहा है किसी की टोका -टाकी भी नहीं ,अपनी दोनों बच्चियों के साथ नीलिमा प्रसन्न थी। सारा दिन तो सामान लगाने और सजाने में चला गया। शाम तक थककर चूर हो गयी थी।

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४८)

6 दिसम्बर 2023
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अस्पताल में नर्सें ,इधर से उधर ,उधर से इधर आ जा रही थीं ,धीरेन्द्र वहीं चहलक़दमी कर रहा था ,उसे घर का भी स्मरण नहीं रहा कि उस घर में, उसकी दोनों बेटियां अकेली हैं। अंदर से नीलिमा की तड़पने की आवाज आ रही

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ४९)

6 दिसम्बर 2023
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धीरेन्द्र कई दिनों से थका हुआ था ,घर और नीलिमा को भी देखने जाता था किन्तु अबकि बार उसके बेटा हुआ था ,इसीलिए वो खुश था ,कल तो नीलिमा को आ ही जाना है। आज थोड़ा अपने मन को शांत महसूस कर रहा था। जिस

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५०)

7 दिसम्बर 2023
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नीलिमा के घर आ जाने पर भी, धीरेन्द्र उसके सामने बड़ी मिट्ठी और प्यारी बातें करता है,किन्तु अब बेटे के रोने का बहाना कर और रात्रि में नीद ख़राब न हो इसीलिए अपनी बेटियों के साथ ,सोने लगा। ये तो सिर्

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५१)

8 दिसम्बर 2023
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कुछ समझ नहीं आता ,जीवन में कब ,क्या घटित हो जाये ? जीवन को समझने के फेर में अच्छे - अच्छे चले गए ,बस इसको समझना नहीं है ,इसको एन्जॉय करना है।'' धीरेन्द्र ने अपने दोस्तों को अपना दृष्टांत दिया।आज धीरेन

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५२)

26 दिसम्बर 2023
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समझ नहीं आता ,ज़िंदगी भी न जाने, क्या खेल खेल रही है ? एक उम्मीद जगाती है ,दूसरे ही पल सोचने पर मजबूर भी कर जाती है या कोई एहसास दिलाती है कि वो स्वयं कुछ भी नहीं। वो नहीं खेल रहा वरन ज़िंदगी उसे अपने

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५३)

27 दिसम्बर 2023
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नीलिमा ,धीरेन्द्र को बिना कुछ भी कारण बताये ,अपने घर चली जाती है ,वो भी ,कभी न आने के लिए ही गयी थी किन्तु अपना इरादा सिर्फ़ ,उसने अपनी बहन चंद्रिका को बताया था। किन्तु यहाँ उसने महसूस किया कि वो अब उस

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५४)

28 दिसम्बर 2023
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आज सुबह ही अपने काम पर जाते हुए ,धीरेन्द्र को वो दिख गया ,जो दिखना नहीं चाहिए था। धीरेन्द्र गाड़ी की आड़ में जाकर खड़ा हो गया और सोचने लगा ,जब ये जाये ,तब मैं यहाँ से निकलूँ। वो तो शायद उसी से मिलने आय

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५५)

31 दिसम्बर 2023
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अगले दिन नीलिमा ने चम्पा से ,धीरेन्द्र की नाराज़गी का कारण पूछा किन्तु वो बता न सकी।किन्तु कुछ न कुछ तो बताना ही था ,तब वह बोली -वो तो साहब से, थोड़े पैसे उधार मांग रही थी। नीलिमा बड़े प्यार से बोली

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५६)

31 दिसम्बर 2023
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धीरेन्द्र को अपने बेटे' अथर्व ',की बीमारी का पता चलता है ,पता चलते ही ,वो तो जैसे शून्य हो जाता है। वो घर से बाहर आता है ,अपनी ज़िदगी के विषय में सोचता है ,इस ज़िंदगी से उसने क्या पाया ? वो बेहद ही ग़मगी

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५७)

3 जनवरी 2024
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धीरेन्द्र अपने बेटे की बीमारी के कारण दुखी था ,किन्तु अपने को संभालने का प्रयत्न कर रहा था। किन्तु मन में ,कहीं न कहीं ,कोई गांठ बन ही गयी थी। न चाहते हुए भी ,वो उस बात के लिए अपने को समझा नहीं पा र

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ५८)

3 जनवरी 2024
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कुछ समझ नहीं आता , ज़िंदगी हमारे साथ क्या खेल ,खेल रही है ?एक पल को ख़ुशी का एहसास होता है तो दूसरे ही पल वास्तविकता में ला पटकती है। नीलिमा प्रसन्न थी कि अब सब ठीक है ,किन्तु कहीं न कहीं कोई दबी चिंगा

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ऐसी भी ज़िंदगी (भाग ५९)

6 जनवरी 2024
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नीलिमा के मायके में ,उसकी मम्मी सुबह की चाय बना रही हैं , नीलिमा के पापा बाहर से घूमकर अभी आये हैं। अभी घर के और सदस्य उठे भी नहीं ,घर में शांति है ,तभी बड़े जोरों से फोन की घंटी बजती है। सुनसान वातावर

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६०)

6 जनवरी 2024
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नीलिमा के मायके में , इस बात पर किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा था। एक दो बार फोन भी किया किन्तु किसी ने उठाया नहीं। पार्वती और उनकी बेटी का तो रो -रोकर बुरा हाल था। जाना तो पड़ेगा ही ,सच्चाई क्या है ?व

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६१)

8 जनवरी 2024
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सम्पूर्ण वातावरण ग़मगीन था ,पुलिस अपना कार्य कर रही थी ,नीलिमा के चाचा और पापा कुछ लोगों के साथ मिलकर ''दाह संस्कार '' की तैयारी कर रहे हैं। सीधा सा केस है ,इसमें है ही क्या ?घर की परेशानियों से तंग आक

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६२)

8 जनवरी 2024
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धीरेन्द्र की अचानक मौत से सभी हतप्रभ रह गए ,किसी को समझ नहीं आया कि ये अचानक क्या हुआ ? पुलिस को उसकी लाश रेलवे ट्रैक पर ,टुकड़ों में पड़ी मिली किन्तु ये अच्छा हुआ, उसके चेहरे पर चोट लगने के बावज़ूद भ

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६३)

12 जनवरी 2024
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धीरेन्द्र के जाने से ,नीलिमा पर तो जैसे ,मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है किन्तु वो फिर भी ,अंदर से अपने को मजबूत कर, हर आने वाली परेशानी के लिए ,अपने को तैयार कर रही है। जो हो चूका ,उसे तो वापस लाया नहीं

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६४)

19 जनवरी 2024
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धीरेन्द्र के जाने पर ,सब कुछ अब नीलिमा को ही संभालना है। चंद्रिका भी कुछ दिनों तक उसके पास रहकर चली गयी। नीलिमा ने किसी स्कूल में पढ़ाने के लिए ,अपना आवेदन भी दिया है किन्तु अभी उन लोगों ने कोई सूचना न

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६५)

19 जनवरी 2024
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नीलिमा,अपनी बेटियों को उनके स्कूल भेजकर , घर के कार्य निपटा रही थी ,तभी उसके घर में कोई अजनबी आता है ,और उसे अपना परिचय देता है, कि वो उसके मामा का लड़का है। किन्तु इससे पहले नीलिमा ने न ही ,कभी मामा

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ऐसी भी ज़िंदगी (भाग ६६)

23 जनवरी 2024
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नीलिमा आज एक नई स्थिति से गुजरी है ,बाहर के शोर के कारण ,उसकी बेटियां बाहर आती हैं और पूछती हैं ,मम्मा बाहर से ,कहीं से शोर आ रहा था, क्या हुआ था ? कुछ नहीं बेटा ,पहले हुआ था ,अब नहीं है ,उसे समझ

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६७)

23 जनवरी 2024
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नीलिमा अपनी बेटियों के लिए , खाने में कुछ अच्छा सा बनाने की सोच रही थी ,और वो अपने कार्य में जुट गयी। वो सोच रही थी - दुनिया में सभी तरह के लोग हैं ,बुरे हैं ,तो अच्छे भी हैं किन्तु ऐसे लोगों का किसी

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६८)

1 फरवरी 2024
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कुछ पल में लगता है ,''जिंदगी में कुछ भी नहीं ,हमीं हैं ,जो ज़िंदगी को इतना मुश्किल बना देते हैं, किन्तु ज़िंदगी ऐसा समझने की, हमारी भूल को, तुरंत ही सुधार भी करती नजर आती है ,कि ज़िंदगी को इतने हल्के में

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ६९)

3 फरवरी 2024
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बस में बैठी ,पार्वती जी सोच रही थीं ,कितनी दोहरी मानसिकता के लोग हैं ?एक तरफ पत्नी घर संभालने के लिए चाहिए ,दूसरी तरफ बहु वंश बढ़ाने के लिए चाहिए ,किन्तु बेटी ,जो किसी का घर सजा -संवार सकती है , ऐसी ब

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७०)

3 फरवरी 2024
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नीलिमा अब निश्चिन्त थी ,अब उसका साथ देने के लिए ,उसकी मम्मी जो आ गयी थी।अगले दिन उसने बड़े उत्साह से अपनी दोनों बेटियों को तैयार कर स्कूल भेजा ,अपनी मम्मी और अपने लिए नाश्ता बनाया। अथर्व का खाना उसकी द

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७१)

5 फरवरी 2024
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मम्मी ! मैं जा रही हूँ ,शीघ्र ही आ जाउंगी ,कहकर नीलिमा घर से बाहर निकली ,उसके पैरों में तो जैसे बिजली लगी थी ,वो द्रुत गति से चले जा रही थी ,उसे आज सुरेंद्र ने पैसे देने के लिए जो बुलाया था। चलो ,उसस

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७२)

5 फरवरी 2024
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नीलिमा अचेत अवस्था में ,बिस्तर पर पड़ी थी ,तीनों दरिंदे उसके तन को ललचाई नजरों से घूर रहे थे ,आज वो कुछ भी कह ,सुन नहीं पा रही है ,उसे तो ये भी नहीं पता- कि उसके साथ क्या होने जा रहा है ?किन्तु

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७३)

11 फरवरी 2024
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नीलिमा और बच्चे अभी, अपने -अपने स्कूल के लिए निकले थे ,नीलिमा पढ़ाने गयी और बच्चे पढ़ने। पार्वती जी भी ,घर को व्यवस्थित करने में लगीं हैं ,अथर्व के पास कई सारे रंगीन खिलौने रखे हैं ,वो उन्हें देख रहा ह

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७४)

11 फरवरी 2024
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इंस्पेक्टर' विकास खन्ना ' के पास एक ग़ुमनाम फोन आता है ,कि धीरेन्द्र ने आत्महत्या नहीं की वरन उसकी हत्या हुई है। तब धीरेन्द्र गुप्त रूप से, उसके केस की तहक़ीकात कर रहा है। ये नहीं ,कि वो उस ग़ुमनाम फोन क

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७५)

23 फरवरी 2024
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नीलिमा को अपने जेठ के व्यवहार पर बहुत क्रोध आ रहा था ,कैसे मतलबपरस्त लोग हैं ? दूसरे की कमज़ोरी का लाभ उठाने से भी बाज नहीं आते। अब सोचा होगा ,ये परेशान होगी ,कमजोर क्षणों में मेरा दामन थाम लेगी। रिश्त

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७६)

25 फरवरी 2024
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नीलिमा के बुआ का लड़का उससे मिलने आता है ,उससे ढ़ेर सारी बातें करता है। नीलिमा थकावट के कारण उसकी बातें सुनते -सुनते सो जाती है। वो भी अपनी धुन में कुछ न कुछ कहे जा रहा था, किन्तु जब उसने नीलिमा की तर

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ऐसी भी ज़िंदगी (भाग ७७)

25 फरवरी 2024
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नीलिमा की बुआ का लड़का 'राघव 'नीलिमा से मिलने आता है और उससे उसके मन की बातें ,लेना चाह रहा था। क्या अब भी वो विवाह के लिए तैयार है ,या नहीं ?किन्तु इससे पहले की नीलिमा उसकी बातों को सुन या समझ पाती ,व

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ७८)

25 फरवरी 2024
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राघव नीलिमा से मिलने आता है किन्तु रात्रि में उसका भी ,वो ही रूप नीलिमा को नजर आता है। वो अचानक उठकर ,नीलिमा के बिस्तर पर आ जाता है। नीलिमा चाहती तो शोर मचाकर ,उसे भगा भी सकती थी किन्तु वो ये नहीं समझ

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ऐसी भी ज़िंदगी, ( भाग ७९)

11 मार्च 2024
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नीलिमा अपनी बातों से ,राघव को समझाती है किन्तु उसके समझाने का राघव पर विपरीत असर होता है। वो उसकी बातों से चिढ जाता है ,अपना आना उसे व्यर्थ लगने लगता है ,उसे लगता है ,इसके मन में अब सम्मान तो रहा नहीं

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ८०)

11 मार्च 2024
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राघव के जाने के पश्चात ,नीलिमा बहुत 'परेशान 'थी ,वो ये नहीं समझ पा रही थी -कि राघव इस तरह अचानक कैसे चला गया ? इतना तो उसे यक़ीन था, कि उसके रौद्र रूप को देखकर तो नहीं भागा होगा।इस बात को हुए कई

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ८१)

16 मार्च 2024
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नीलिमा के दफ्तर में उससे मिलने एक लड़की आती है ,जिसका नाम है ''प्रभा शर्मा ''जो एक लेखिका है। वो कहानियाँ लिखती है किन्तु अपनी उन कहानियों में भी ,वो जीवन लिखना चाहती है यानि कल्पना की नहीं बल्कि किसी

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ८२)

16 मार्च 2024
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''प्रभा शर्मा '' नीलिमा के जीवन पर आधारित एक उपन्यास बनाती है और नीलिमा से उसकी कहानी सुनती है किन्तु उसकी कहानी में प्रभा को कुछ झोल लगता है ,यानि संदेह लगता है। अपने उसी संदेह को मिटाने के लिए ,पुन

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ८३)

29 मार्च 2024
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' प्रभा शर्मा '' नीलिमा की ज़िंदगी पर, एक उपन्यास लिखना चाहती है ,किन्तु जब वो ,उसके जीवन की बातें लिखने बैठती है।[ जब वो उस उपन्यास की रुपरेखा तैयार करती है ]तब वो एक जगह आकर अटक जाती है ,कुछ बिंदु उस

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ८४)

29 मार्च 2024
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नीलिमा प्रभा को अपनी रणनीति बतलाती है, कैसे ?उसने सुरेंद्र ,तपन और रोहित को सबक़ सीखाने का सोचा -वो बताती है ,कभी -कभी घटिया लोगो को सबक सिखाने के लिए ,उन्हीं की तरह ओछा बन जाना पड़ता है। और मैंने वो

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ८५)

5 अप्रैल 2024
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नीलिमा प्रभा को अपनी योजना से रूबरू कराती है ,कि किस तरह वो ,सुरेंद्र ,तपन और रोहित से अपने अपमान का बदला लेती है ? उस समय उसके पास न ही पैसा था ,न ही कोई पावर ,तब वो किस तरह चालाकी से अपना बदला लेती

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ऐसी भी ज़िंदगी ( भाग ८६)

5 अप्रैल 2024
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आज संस्था में ,बहुत सारे रंगीन पतंगी कागज़ों से सजावट हुई है ,आज फर्श पहले से अधिक साफ -सुथरा हो रहा है। सभी कमरों के दरवाजों पर वंदनवार लगे हैं ,आम और अशोक के पत्तों और गुलाब ,गेंदा के फूलों से सजावट

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