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🌹अलविदा 2021🌹(१)

31 दिसम्बर 2021

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🌹अलविदा 2021🌹
यह  मीठी घटनाओं दुखद घटनाओं और हंसी के फव्वारों का मिलाजुला वाला रहा । भारत ने जहां सामाजिक स्तर पर राजनीतिक स्तर पर सैन्य स्तर पर चुनौतियां झेलीं, और आज भारत कमोबेश में 2022 में नई चुनौतियों के साथ जूझने जा रहा है, भारत में इन दिनों कुछ खास ट्रेंड चल रहा है क्या खाएं ना खाएं क्या पियें  ना पीयें । भारत बहु पंथवादियों बहुसांस्कृतिक विशेषताओं से मिला जुला एक सुंदर बगीचे की तरह बहुआयामी राष्ट्र है । 
आजकल यह हो रहा है हम क्या मनायें क्या न मनायें ? एक तबका क्रिसमस,  न्यू ईयर, ईद व मुहर्रम का मखौल उड़ायेगा तो एक तबका होली , दिपावली व देवी देवताओं का माखौल । जिन्होंने सम्पूर्ण भारत को जाना नहीं वह स्वयं को सम्पूर्ण संस्कृति के वाहक मानकर चल रहे हैं |  मुझे निजी तौर पर लगता है, अपने त्यौहारों को मनायें , लेकिन अन्य त्यौहारों का भी सम्मान करें | भारतीय सेना सभी त्यौहारों को जोशओखरोश से मनाती है | मुझे मेरे साथी सूबेदार अब्दुल को भी स्मरण में रखना है,  मुझे कैप्टन जेवियर को भी नहीं भुलाना है | हम महामना जयन्ती मनायें,  हम तुलसी पूजन करें, अटल जयन्ती मनायें, हम गुरुओं के बलिदान को याद रखें न्यू ईयर 2022 भी मनायें नव संवत्सर भी मनायें  |  अन्य पंथ व मतों के त्यौहारों का सम्मान अवश्य करें | रामाकृष्ण मिशन जिसके स्वामी विवेकानंद संस्थापक थे, वहां स्वामी जी के समय से ही अन्य पंथों के त्यौहारों को सम्मान दिया जाता है , व बेलूरमठ में क्रिसमस विशेष रूप से मनाया जाता है  | गायत्री परिवार अपने मुखपत्र अखण्ड ज्योति में  सभी मतालंबियों के संतों, प्रवर्तकों को अपने आलेख में स्थान देता है | आज अन्य मतालंबियों के लिये मंथन का विषय है कि वर्षों से हिन्दू संस्कृति (सनातन, जैन, बौद्ध, सिख) से कट कर रहने व उनके जमात के लोगों (इमाम बुखारी, जाकिर नाईक, ओवैसी बन्धु, आजम खान, प्रो. दिनाकरन व अन्य) द्वारा अपशब्द कहने के कारण व मिशनरियों द्वारा अवैध धर्मान्तरण के कारण  ही स्थिति प्रतिक्रिया स्वरूप ऐसी बन पड़ी है |  इस्लामिक मान्यताओं के बहुत से मतालंबी व ईसाई समाज के बहुत मतालंबी अपनी मज़हबी तकरीरों या चंगाई सभाओं में अपने पंथ, अपनी पुस्तक को ही श्रेष्ठ मानते हैं, हिन्दू मान्यताओं का माखौल उड़ाते हैं व छोटी छोटी बातों पर लामबंद होते हैं  | नतीजतन वर्तमान  में सहिष्णु समझे जाने वाला हिन्दू समाज शनै शनै वही अवधारणा लागू करता जा रहा है | विद्वेष का वातावरण एक दिन में ही तैयार नहीं होता है | मुझे बार्डर फिल्म का एक संवाद बहुत प्रिय है "हम ही हम हैं तो क्या हम हैं ! तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो" | इसे सभी को याद रखना चाहिए | माता पिता की सेवा हो, राष्ट्र, संस्कृति पल्लवित, पोषित होती रहे ... 
साल 2021 खत्म होने में अब कुछ ही दिन बाकी है. इस मौके को पूरी दुनिया सेलिब्रेट करती है और नए साल का स्वागत करती है ।  हालांकि ये साल कोरोना महामारी की दूसरी लहर और किसान आंदोलन जैसी घटनाओं की वजह से काफी याद किया जाएगा । इसके अलावा ये साल कुछ बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का भी गवाह रहा ।
आइए जानते हैं कि इस साल को याद रखने के लिए ऐसी ही 9 बड़ी घटनाओं के बारे में -

शब्द mic
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