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बिछड़ना

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आख़िरी बात तुम से कहना है अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलेंगेजाते जाते आप इतना काम तो कीजिये मेराजाइए तो फिर मुझे सच-मुच भुलाते जाइएक्योंकि यादों का हिसाब रख रहा हूँ मैंरह गई उम्मीद तो बरबाद हो जाऊँगा मैं......-अश्विनी कुमार मिश्रा

खुश रहे वो ,इसलिए ये दर्द भी सहना पड़ा,मन न था ,फिर भी मुझे ,उसे अलविदा कहना पड़ा,थी नहीं हसरत कभी जीना पड़े उसके बिना,उसके लिए हर वक़्त ही मरते हुए जीना पड़ा, एक उसके बिन अकेला इस कदर मैं हो गया,हर जख्म तनहा अकेले खुद मुझे सीना पड़ा,उसकी ख्वाहिस थी की मैं जिन्दा रहू,मेरा नाम हो,बस इसलिए ही जिन्दगी का ये

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