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कूड़ा

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कूड़े के ढेर तले दबी मेरी मां धरती है बिन कसूर यह हरदम क्यों हर्जाना भरती है ?जो देश कभी हुआ करता था सोने की चिड़िया वो बना आज गंदगी का सरताज है जिन चीजों से होता है कचरा क्यों आज हम उन्हीं चीजों के मोहताज है इस मनुष्य के कृत्य से, यह धरती पल-पल मरती है बिन कसूर यह हर

हीरा था, हीरा है देश हमारा।जौहरी पहचान न सका, उस हीरे को जो उसके नजरो के सामने था। हीरा की भी गलती थी, वह भी जौहरी से कह न सका, मैं हीरा हूँ। एक दिन काँच समझ कर जौहरी ने फेंक दिया कूड़े के ढेर में। देर सबेर हीरा एक बच्चे के हाथ मे वह भी उसे उठा लाया कूड़े के ढेर से कंचा समझ कर। लोग आज भी कन्फ्यूज है क

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