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मेरे अपने पन्ने

प्रवीण विक्रम सिंह

15 अध्याय
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अपनी कुछ अनसुलझी भावनाएं 

mere apne panne

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पुस्तक के भाग

1

दिल की तलबगार

7 सितम्बर 2021
2
10
0

<div>दे दो दिल का कुछ प्यार</div><div>बन जाओ मेरे तलबगार</div><div>हो जाओ मुझमें निसार</div><div>आ ज

2

तेरे बगैर मरते रहेंगे......!!

11 सितम्बर 2021
0
7
0

<div>चाहेंगे जरूर पर मरते रहेंगे ....!!</div><div>जीना है तेरे संग पर मरते रहेंगे ....!!</div><div>त

3

जग जग का भाग

1 अक्टूबर 2021
4
3
1

<div>अटरिया पर कब आओगे काग</div><div>पितरों को अब कैसे पहुंचेगा भाग</div><div>आधुनिकता के मानव अब तो

4

साथ मेरे

8 अक्टूबर 2021
1
2
0

<div>साथ मेरे एक प्याला चाय का पीने में बरसों लगा दिए</div><div>साथ मेरे कदम से कदम चलने में बचपन बी

5

मनमीत का बिछुडना

18 अक्टूबर 2021
1
2
0

<div>तेरी चाहत को अपनी नाकामी से डूबों देंगे</div><div><br></div><div>हम अपने हाथों से ही अपना गला घ

6

पुरनमासी की रात में

19 अक्टूबर 2021
3
2
4

पूर्णमासी की रात में और चांद तारों की बात में<div>कुछ रिमझिम फुहारें और कुछ एहसास में</div><div>कुछ

7

इकरार ए इश्क का रास्ता

7 नवम्बर 2021
1
1
1

<div>दिल की बेबसी दिल से बयान करो</div><div>कुछ बातें इशारों इशारों से बयान करो</div><div>अगर कर सको

8

प्यार का टूटा दरख़्त

7 नवम्बर 2021
1
1
1

<div>रुखसत ए जिंदगी एक मंजिल तो देजा</div><div>मंजिल नहीं तो एक संगदिल ही देजा</div><div><br></div><

9

पसंद ही क्यों ना पसंद आते हैं

22 नवम्बर 2021
1
1
0

<div>रंगों का खेल है अजब इस दुनिया की महफिल में</div><div>दिल से काले वाले पसंद आते हैं</div><div>और

10

तुन्हें तुम से ज्यादा

24 नवम्बर 2021
2
2
1

<div>कुछ और तस्वीर भेजो ना अपनी</div><div>तुम्हें तुमसे ज्यादा प्यार करना है</div><div><br></div><di

11

डूबों ना इतना

27 नवम्बर 2021
2
1
1

<div>इन दिलकश आंखों में इतना डूबे की होश ना रहा</div><div>इन प्यारी बातों में इतना घूमें की होश ना र

12

प्रेम बना देता है

29 नवम्बर 2021
0
0
0

<div>प्रेम पुरुष को शिशु बना देता है</div><div>प्रेम स्त्री को मातृ बना देता है</div><div>प्रेम शून्

13

प्यार है तो प्यार कीजिए

30 नवम्बर 2021
1
0
0

<div>प्यार करना है तो प्यार कीजिए</div><div>यूं ना कातिल नजरों से वार कीजिए</div><div>यूं ना दिल के

14

जीना है मुश्किल तो कीजिए मोहब्बत

1 दिसम्बर 2021
3
2
0

<div>सिर्फ जिस्मों की कहां है हम मर्दों की मोहब्बत</div><div>क्यों खुलेआम हमें बदनाम करते हैं</div><

15

मेरा प्यार ही था

11 अप्रैल 2022
0
0
0

जब पहली बार कोई शब्द नहीं था मेरे पास... तब भी वो मेरा प्यार ही पहूंचा था तुम तक ...!जब कई सारी शिकायतें होती थी तुमसे...तब भी वो मेरा प्यार ही रूठा था तुम से ...!जब बहुत सी बातें थी बतानी होती थ

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