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रश्मि गुप्ता के बारे में

मेरा जन्म रिवाड़ी (हरियाणा) में 10 अगस्त 1945 में हुआ। मेरे पिता का नाम श्री बनारसी दास था। वो सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी थे। मेरी माँ का नाम श्रीमती गिंदौड़ी देवी था। मैंने महारानी कालेज जयपुर से BA(Hon) किया। मेरे पति स्वर्गीय श्री सुशील गुप्ता एक उच्चाधिकारी थे। मुझे कविता, कहानी संस्मरण टिप्पणी सभी लिखने का शौक है। उम्र के आखिरी पड़ाव पर हूँ, पर हिम्मत बेतहाशा रखती हूँ। मेरी कविता बंधन मुक्त स्वतंत्र लेखन है। इसलिए हर रंग, हर रस से आप रुबरु होंगे। पाठकों की प्रशंसा ही मेरी प्रेरणा है। अपनी तरफ से अपनी रचनाओं से किसी व्यक्ति विशेष की भावनाओं को आहत नही करना चाहा है, फिर भी कुछ ऐसा हो, तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ। मैं आशा करती हूँ कि आप मुझे अधिकाधिक उत्साहित करेंगे। रश्मि।

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रश्मि गुप्ता की पुस्तकें

ख्वाब तो रुकते नहीं

ख्वाब तो रुकते नहीं

मैं इस पुस्तक की लेखिका रश्मि गुप्ता, उम्र के हर स्वाद का रसपान कर चुकी हूँ और कहीं भी इसे मैंने नीरस नहीं पाया है। हर चीज यहां अपना एक विशेष स्थान रखती है। चाहे फूल ही या कांटा, दोनों की बराबर अहमियत है । लीक से हटकर अंधेरे, समस्या

19 पाठक
51 रचनाएँ
26 लोगों ने खरीदा

ईबुक:

₹ 53/-

प्रिंट बुक:

201/-

ख्वाब तो रुकते नहीं

ख्वाब तो रुकते नहीं

मैं इस पुस्तक की लेखिका रश्मि गुप्ता, उम्र के हर स्वाद का रसपान कर चुकी हूँ और कहीं भी इसे मैंने नीरस नहीं पाया है। हर चीज यहां अपना एक विशेष स्थान रखती है। चाहे फूल ही या कांटा, दोनों की बराबर अहमियत है । लीक से हटकर अंधेरे, समस्या

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श्रीमद्भागवत गीता (घर घर गीता, गीत पुनीता)

श्रीमद्भागवत गीता (घर घर गीता, गीत पुनीता)

श्रीमद्भागवत गीता का सरल काव्य रूपांतरण

14 पाठक
18 रचनाएँ
34 लोगों ने खरीदा

प्रिंट बुक:

223/-

हार्डकवर:

423/-

श्रीमद्भागवत गीता (घर घर गीता, गीत पुनीता)

श्रीमद्भागवत गीता (घर घर गीता, गीत पुनीता)

श्रीमद्भागवत गीता का सरल काव्य रूपांतरण

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सुन सखी

सुन सखी

सुन सखी, मेरा अपने प्रिय पाठकों से मिलने का नया बहाना है। आप सब की प्रेरणा और प्रशंसा दोनों ही मुझे जल्दी जल्दी आप से कुछ कहने और सुनने के लिए ललायित कर रहीं हैं। यदि आपका प्यार यूं ही बरसता रहा तो क़ोई आश्चर्य नही कि बाढ़ आ जाये। वो बाढ़ नहीं जो वि

9 पाठक
27 रचनाएँ
23 लोगों ने खरीदा

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₹ 53/-

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164/-

सुन सखी

सुन सखी

सुन सखी, मेरा अपने प्रिय पाठकों से मिलने का नया बहाना है। आप सब की प्रेरणा और प्रशंसा दोनों ही मुझे जल्दी जल्दी आप से कुछ कहने और सुनने के लिए ललायित कर रहीं हैं। यदि आपका प्यार यूं ही बरसता रहा तो क़ोई आश्चर्य नही कि बाढ़ आ जाये। वो बाढ़ नहीं जो वि

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जिनसे वजूद है

जिनसे वजूद है

ये पुस्तक स्वतंत्रता सेनानी, स्वर्गीय श्री बनारसी दास गोटे वाले की जीवन गाथा है। मै रश्मि गुप्ता इस पुस्तक की लेखिका, सौभाग्यशाली हूँ कि मैं उनकी पुत्री हूँ । जितना करीब से जाना, देखा है, उसे सब के समक्ष रखना चाहती हूँ । मुझे पूर्ण आशा है कि उनक

5 पाठक
7 रचनाएँ
44 लोगों ने खरीदा

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₹ 53/-

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146/-

जिनसे वजूद है

जिनसे वजूद है

ये पुस्तक स्वतंत्रता सेनानी, स्वर्गीय श्री बनारसी दास गोटे वाले की जीवन गाथा है। मै रश्मि गुप्ता इस पुस्तक की लेखिका, सौभाग्यशाली हूँ कि मैं उनकी पुत्री हूँ । जितना करीब से जाना, देखा है, उसे सब के समक्ष रखना चाहती हूँ । मुझे पूर्ण आशा है कि उनक

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हौसले बुलंद हैं

हौसले बुलंद हैं

मेरे प्रिय पाठकों, जिसमें दुधमुहे बच्चों से लेकर उम्रदराज मेरे भाई बहन और बेटी बेटे जैसे युवा और स्कूल, कालेज जाने वाले टीन एजर सभी शामिल हैं । चौकिये मत, दुधमुहे इसलिए लिखा है कि बचपन की मधुर थपकियों से ही तो नींव बनती है । इसलिए जिसे बचपन प्यार

4 पाठक
8 रचनाएँ
12 लोगों ने खरीदा

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₹ 40/-

प्रिंट बुक:

139/-

हौसले बुलंद हैं

हौसले बुलंद हैं

मेरे प्रिय पाठकों, जिसमें दुधमुहे बच्चों से लेकर उम्रदराज मेरे भाई बहन और बेटी बेटे जैसे युवा और स्कूल, कालेज जाने वाले टीन एजर सभी शामिल हैं । चौकिये मत, दुधमुहे इसलिए लिखा है कि बचपन की मधुर थपकियों से ही तो नींव बनती है । इसलिए जिसे बचपन प्यार

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वो बात सुनहरी हैं

वो बात सुनहरी हैं

एक बार फिर मैं आपके पास आई हूँ। आपका और मेरा अपना मन बहलाने । फुर्सत के कुछ पलों का आनंद उठाने। कहने वाले को तभी तो कहने में स्वाद आता है, जब सुनने वाला तल्लीन होकर सुनता है जाहिर सी बात है, घिसिपिटि बातों को तो कोई सुनता नहीं। मैं लेकर आ

3 पाठक
52 रचनाएँ
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वो बात सुनहरी हैं

वो बात सुनहरी हैं

एक बार फिर मैं आपके पास आई हूँ। आपका और मेरा अपना मन बहलाने । फुर्सत के कुछ पलों का आनंद उठाने। कहने वाले को तभी तो कहने में स्वाद आता है, जब सुनने वाला तल्लीन होकर सुनता है जाहिर सी बात है, घिसिपिटि बातों को तो कोई सुनता नहीं। मैं लेकर आ

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रश्मि गुप्ता के लेख

अठारहवां अध्याय : मोक्ष संन्यास योग

16 जुलाई 2023
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 अर्जुन बोले----  हे महाबाहो! हे अंतर्यामी!   हे वासुदेव! हे घनश्याम!   मेरी इच्छा है मैं जानूँ,   असल रुप में ज्ञान।   त्याग और संयास का,   भेद मैं जाऊ जान।   18----1     कुछ पंडित तो कहते

सत्रहवा अध्याय : श्रृद्धात्रय विभाग योग

16 जुलाई 2023
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 अर्जुन पूछते हैं----  हे कृष्ण!   श्रृद्धा से जो पूजन करते,   पर करते शास्त्र विधि से रहित।   सात्विक, राजस या तामस,   किस गति में होते हैं वो,   स्थित।   17---1     भगवान् श्रीकृष्ण बताते

सोलहंवा अध्याय : दैवासुरसम्दविभागयोग

16 जुलाई 2023
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 भगवान् श्रीकृष्ण दैवी सम्पदा से युक्त पुरुष के लक्षण बताते हुए कहते हैं ---     जो होता है भयरहित,   और शुद्ध है, अंत:करण।   ज्ञान योग में रत रहे,   करे दान यज्ञ और इंद्रियों ,  का संयम।   पठ

पन्द्रहवां अध्याय : पुरुषोत्तम योग

16 जुलाई 2023
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 श्रीकृष्ण कहते हैं---  आदिपुरुष, परमेश्वर मूल वाले,   और ब्रह्मारुप मुख्य शाखा वाले।   इस संसार रुपी वृक्ष को,   कहते हैं अविनाशी।   चारों वेद कहे गए हैं,   पत्ते इसके।   मूलसहित(पूर्ण रुप से

चौदहवां अध्याय : गुणत्रय विभाग योग

16 जुलाई 2023
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 श्रीभगवान् बोले, ---     ज्ञानों में भी अति उत्तम है, ऐसा है वो परम ज्ञान।  मुनिजनों को मिली परमगति  उस परम ज्ञान को जान  14----1     प्राप्त करके इस ज्ञान को,  पुनर्जन्म नहीं पाते।  प्रलय क

तेरहवाँ अध्याय : क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

16 जुलाई 2023
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भगवान श्री कृष्ण बोले--- हे कौंतेय! इस शरीर को ही हम सब, कहते हैं क्षेत्र। और क्षेत्र को जानने वाला, कहलाता है क्षेत्रज्ञ। 13---1 हे अर्जुन! सब क्षेत्रों (शरीरों) में, मुझको ही तू जीवात्मा जा

बारहवाँ अध्याय : भक्तियोग

16 जुलाई 2023
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 अर्जुन पूछते हैं---  सगुण रुप में भजते तुझको,   या निर्गुण अविनाशी।   दोनों में से श्रेष्ठ कोन है,   बतलाओ घट ,घट वासी।   12----1     श्रीकृष्ण कहते हैं-----  सगुण रुप में लगा निरंतर,   भज

ग्यारहवां अध्याय : विश्वरुप दर्शन योग

16 जुलाई 2023
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 अर्जुन कहते हैं ---  मुझ पर अनुग्रह (कृपा) किया आपने,  दिया गोपनीय उपदेश।  हुआ नष्ट अज्ञान मेरा,  और पूर्ण हुआ उदेश्य।  11---1     हे कमल नेत्र!  पूर्ण रुप से सुनी है मैंने,  सब भूतों की उत्

दषम अध्याय : विभूति योग

16 जुलाई 2023
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 श्रीकृष्ण कहते हैं----  हे महबाहो!  एक बार फिर से सुनों,  परम रहस्यमय वचन।  करे प्रेम तू अतिशय (बहुत ज्यादा) मुझको,  तेरे हित में ही हैं ,ये वचन।  10---1     ना जाने कोई देवता,   और ना ही मह

नवम अध्याय : राजविद्या राजगुह्य योग

16 जुलाई 2023
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 भगवान श्री कृष्ण कहते हैं--     तू है, मेरा परम भक्त,   है तू, दोषदृष्टि से मुक्त ।   परम गोपनीय ज्ञान है ये,   ये है विज्ञान सहित।   9--_1     विज्ञान सहित ये ज्ञान है,   है, सब विद्याओं का

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