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प्रेम

6 अप्रैल 2022

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मेरे नजरिये में प्रेम बहुत ही गूढ शब्द है जिसे शब्दों में बयां कर पाना अत्यंत ही मुश्किल है। यह एक अनुभूति है ,लगाव है ।प्रेम का स्वभाव एक ही है परंतु उसके रूप अनेक है ।माता पिता का अपने संतति के प्रति अगाध प्रेम दुनिया का सबसे परिष्कृत प्रेम है ।बाकी प्रेम के रिश्ते में तो एक स्वार्थ भी छिपा होता है परंतु यह प्रेम निस्वार्थ होता है ।स्त्री पुरुष के मध्य होने वाला प्रेम जो कि दैहिक लालसा से परे हो वह भी दुनिया का अद्वितीय प्रेम है। किसी की खुशी के लिए निस्वार्थ भाव से पूर्ण रूप से समर्पित हो जाना ही प्रेम है ।फिर चाहे वह प्रकृति प्रेम हो या मानव या फिर कोई अन्य प्राणी
विशेषके प्रति लगाव हो।
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रचनाएँ
दैनंदिनी मन की आवाज
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इस पुस्तक में आपको मेरे जीवन के बारे में ,समाज के बारे में, आसपास प्रचलित मान्यताओं के बारे में, मेरे विचार पढ़ने को मिलेंगे । अन्याय मैं सहती नहीं सच कहने से डरती नहीं दुख की प्रबल धाराओं में हार कर बहती नहीं। . .
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मूर्ख दिवस

1 अप्रैल 2022
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1 अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाने का रिवाज विदेशी पृष्ठभूमि से भारत में आया। हम भारतीय तो पहले से ही मूर्ख है बिना सोचे समझे, बिना इसका कारण जाने इसे भी पश्चिम के अंधानुकरण में सहजता से अपना लिया कभी इसके

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हमशे है जमाना

5 अप्रैल 2022
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कहीं मुझे यह वाक्य पढने को मिला था "जिसकी जवानी उसका जमाना "पर ऐसा सोचना मेरे नजरिए में अनुचित है। यह बात अलग है कि युवा व्यक्ति नई ऊर्जा नयी, जोश और उत्साह से भरा होता है ।उसकी नई सोच नई कल्पनाए

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प्रेम

6 अप्रैल 2022
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मेरे नजरिये में प्रेम बहुत ही गूढ शब्द है जिसे शब्दों में बयां कर पाना अत्यंत ही मुश्किल है। यह एक अनुभूति है ,लगाव है ।प्रेम का स्वभाव एक ही है परंतु उसके रूप अनेक है ।माता पिता का अपने संतति के प्रत

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मित्रता

7 अप्रैल 2022
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<div><img style="background: gray;" src="https://shabd.s3.us-east-2.amazonaws.com/articles/61728b208b70523f4ff91fc0_1649338830020.jpg"></div>

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मित्रता

7 अप्रैल 2022
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<div><img style="background: gray;" src="https://shabd.s3.us-east-2.amazonaws.com/articles/61728b208b70523f4ff91fc0_1649338830020.jpg"></div>

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प्यारी सखी

9 अप्रैल 2022
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9/4/22प्यारी सखी ,आज बहुत दिन बाद अपने मन को तुम्हारे सामने खोलने की इच्छा पड रही है ।वर्षों से अपने जज्बातों को खुद में जब्त किये जिन्दगी के प्रवाह मे जिये जा रहीं हूँ ।सखी वैसे तो हर इंसान के जीवन म

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