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सवा हाथ ज़िंदगी

नकुल कुमार

4 अध्याय
1 व्यक्ति ने लाइब्रेरी में जोड़ा
9 पाठक
1 फरवरी 2024 को पूर्ण की गई
निःशुल्क

प्रस्तुत पुस्तक एक ग़ज़ल संग्रह है जिसमें स्वरचित ग़ज़लें संग्रहित हैं। ग़ज़ल ऐसी विधा है जो वर्तमान में अधिक पसंद की जा रही है जिसके माध्यम से कठिन बातों को भी आसानी से कहा जा सकता है 

savaa haath zindagi

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पुस्तक के भाग

1

1. ग़ज़ल

4 जनवरी 2023
3
3
2

मैं  भी  कर  सकता  हूँ  पूरी  बारिशों की कमी छोड़ कर  तेरे  होठों  पे अपने  होठों  की  नमी कोई  चखे  या  ना  चखे, मुझे  तो   चखने  दे लगती   है  तू  पानी  की  कोई   बूँद  शबनमी तेरे   बदन  के

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2. ग़ज़ल

4 जनवरी 2023
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उलझे हुए हिसाब  की  किताब बन जाऊँगा बे-पैरहन तेरे जिस्म का लिबास बन जाऊँगा रूह बन  उतर  जाऊँगा  तेरे  जिस्म के अंदर तुझे  चाँद  कहुँगा और तेरा दाग बन जाऊँगा तू  बरसती  रहेगी  यूँ  ही  उम्र  भर  मु

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3. ग़ज़ल

4 जनवरी 2023
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चाय भी कि अब जैसे शराब हो गयी है ऐ इश्क़ मेरी ज़िंदगी ख़राब हो गयी है पहले तो हँसता था मैं सितारों के साथ अब हँसी भी मेरी तार-तार हो गयी हैं तेरी मुहब्बत में अब जागते न सोते हैं  रोते हैं यूँ कि

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4. ग़ज़ल

5 जनवरी 2023
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मतलबी है दुनिया इसमें कैसे रहना चाहिए क्या कहें किससे कहें और क्या ही कहना चाहिए और फिर यह चाहिए कि घट ना जाओ गांव से गांव के उस ताल में कुछ मेल रहना चाहिए हर कोई चाहेगा तुमको एक ये फन सीख लो झूठ

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