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शुभांगी की डायरी

शुभांगी

4 अध्याय
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shubhangi ki dir

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पुस्तक के भाग

1

स्नेह

11 जून 2018
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1
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स्नेह ये शब्द कितना मिलता है . लेकिन अगर इसे गौर से पढ़ा जाये तो ये अपने करीब लगने लगता है . अगर ये दुश्मन के सामने भी बोलै जाये तो भी अपना सा और प्यारा सा लगने लगता है . है ना .

2

प्यार

11 जून 2018
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प्यार एक ऐसा शब्द है जो सुनते ही मन खिल उठता है.......प्यार से प्यारा इस दुनिया में कुछ भी नहीं है. .....प्यार दो दिलो की दास्ताँ है .....प्यार दो दिलो का संगम है .........प्यार के बिना ज़िन्दगी अधूरी है .........प्यार के बिना जीवन अधूरा है .........लेकिन प्यार में

3

क्रोध

13 जून 2018
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पड़ोस के अंकल बहोत ही ग़ुस्सा करते है. हमेशा ग़ुस्सेमेंही रहते है . आज सुबह घूमने निकली तो सामने अंकल बेवजह ग़ुस्सा कर रहे थे . मैंने यही पूछा ... क्या हुआ अंकल आज फिर से ग़ुस्सा क्यों .अंकल. ..... अरे वो कब जायेंगे क्या पता,

4

मन

13 जून 2018
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