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“झरोखे से झाँकती सुबह”

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“झरोखे से झाँकती सुबह”अमूमन हर रात को आने का अंदेशा पूर्ववत होता ही है शायद इस रात को भी खबर है कि आज नहीं तो कल मैं भी जरूर आऊँगी पर जब आई तो भावनाओं को झंझोड़कर एक नई सुबह कर गई और याद आने लगे वे दिन जो कभी रात को रात होने ही नहीं देते थे। कितना प्रकाश था उस विशाल मन में

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