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1) पिशाच।

12 सितम्बर 2021

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                      " पिशाच। "



"रुक... कहां जा रही है अकेले।" अपनी बहन को घर के दरवाजे कि ओर जाते देख उसका बड़ा भाई बोला।

" वो,, सरिता के पास जा रही हूं। परीक्षा कि तैयारी करनी है उसके साथ मिलकर।" बहन ने दरवाजा खोला और भाग गई पड़ोस में सरिता के यहां।

"जान दे वसुधा को, आ जायेगी थोडी देर बाद।" मां ने कहा।

सरिता का घर।

"हे सरिता! क्या कर रही हैं?" वसुधा ने कहा। हॉल में सरिता बैठी हुई कोई किताब पढ़ रही थी कि अचानक से वसुधा कि आवाज सुनकर रुक गई।

" आ बैठ। यों ही ये कहानियों वाली किताब पढ़ रही थी।" सरिता ने कहा।
वसुधा भी उसके बगल में सोफे पर जा बैठी।

" हमेशा कि तरह भूत– प्रेत कि कहानियों वाली किताब होगी ये भी। हैं ना?"वसुधा ने कवर पृष्ठ को देखते हुए कहा।

" पिशाच", ये कहानी वाली किताब है। भूत प्रेत का पढ़ कर बोर हो गई थी तो इस बार पिशाच वाला पढ़ रही हूं। तू भी पढ़ेगी?" सरिता ने किताब उसके आंखो के आगे करते हुए कहा।

" न, बाबा ना । मुझे तो डर लगता हैं। सूर्यास्त हो गया है और अब रात होने को है बावरी।" वसुधा ने नजरे दूसरी ओर घुमाते हुए कहा। उसके चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा हैं।

" ओके, ठीक है मैं ही पढ़ लेती हूं।" सरिता ने किताब के पन्ने पलट कर देखते हुए कहा।
डोर बेल बजी। सरिता कि मां ने दरवाजा खोला।
" सरिता! देख कौन आया है।" उसकी मां ने कहा। दरवाजे पर से हाथ में एक किताब लिए 19 साल का लड़का हॉल में दाखिल हुआ। गोरा रंग, चेहरे पर चमक हल्की मुस्कुराहट होठों पर।

" ये तो वहीं है चपरासी भैया के चाचा के बेटे। मेरी किताब लेकर आए हैं मुझे देने।" सरिता ने किताब वही पर एक तरफ टेबल पर रखा और उठ खडी हुई।

"नमस्ते आंटी! पहली बार आया हूं यहां इसलिए आप....। " पैर छूते हुए वो बोला और आगे बोलता इसके पहले सरिता कि मां कि नरम आवाज हॉल में गूंजी।

" जब सरिता ने परिचय दे ही दी है तो भला अब क्या जानना बाकी रह गया है। अंदर आओ बेटे। मैं कॉफी बनाकर लाती हूं।" मुस्कुराहट होठों पर तैर गई। वे किचन कि ओर बढ़ गई।

" कम हियर! देखो नई हॉरर किताब " पिशाच" बहुत डरावनी है।" किताब को लेकर उस लड़के के हाथ में देते हुए सरिता ने कहा।

" मुझे तो अच्छी लगती है ऐसी कहानियां।" चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए वो बोला और वसुधा को अजीब तरह से देखने लगा।

" खड़े रहोगे क्या? बैठो भी। सरिता ने कहा। सरिता और वसुधा के सामने टेबल के दूसरी ओर सोफे पर वो जा बैठा।

" तुम्हे पता है कि पिशाच को हर दिन किसी का खून पीना पड़ता है नही तो उनकी नकारात्मक शक्ति क्षीण होने लगती हैं।" वो लड़का किताब के पन्नो को पलटते हुए बोला।

वसुधा को अजीब लगा। उसने सरिता कि ओर देखा। उसकी नजर अकस्मात सरिता के गले पर जाकर अटक गई।

" कहानियों में तो काफी पढ़ा है क्योंकि मुझे बहुत अच्छा लगता है हॉरर स्टोरीज बाकी रियल में तो पता नहीं।" सरिता ने कहा और उंगलियों के नाखून आपस में रगड़ने लगी।

" जब कोई पिशाच किसी इंसान के शरीर का खून पीता है तब उसके गले पर स्याह नीले रंग के निशान बन जाते हैं मैने देखा था।" वो बोला और फिर वसुधा को अजीब तरह से देखने लगा। वसुधा ने गौर से देखा तो पाया कि स्याह नीले रंग के निशान कान  के नीचे उसके गले पर  दाएं तरफ साफ नजर आ रहे हैं।  झेंपती हुईं वसुधा के मन में डर बढ़ता ही जा रहा है।


" लो बच्चो कॉफी पियो।" सरिता कि मां तीन कप कॉफ़ी ट्रे पर रखकर ले आई। बीच में टेबल पर ट्रे को रखकर चली गई।
तीनों ने ट्रे पर से कॉफ़ी का कप लिया और पीने लगे।

" अच्छा! ये लो तुम्हारी दी हुई किताब जो मैं तुम्हे देने आया था। चलता हूं रात हो जायेगी।" खाली कप को ट्रे पर रखते हुए वो बोला और उठ खड़ा हुआ।

" वसुधा का भी घर पास में ही है। इसे इसके घर छोड़ते चले जाना बेचारी डरती बहुत है।" वसुधा का पीला डरा हुआ चेहरा देखकर सरिता ने कहा तो लड़का मुस्कुराने लगा।

" लेकिन मैं चली जाऊंगी। ज्यादा दूर थोड़ी है।" वसुधा के माथे पर पसीने उभर आए। हकलाते हुए वो बोली।

" बट मैं भी तो जा ही रहा हूं तो क्यों न साथ में चला जाए।" बहती गंगा में हाथ धोते हुए वो बोला। वसुधा के शब्द हलक में अटक गए। उसने देखा कि वो लड़का जीभ निकालकर होठों पर फिरा रहा है और उसके जीभ मानों खून से लथपथ या गहरे लाल नजर आ रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि उसने कॉफी नही ताजा खून पीया है किसी इंसान का।

" गुड नाईट यार।" सरिता ने वसुधा को हल्के से लगे लगाते हुए कहा।

" गुड नाईट एंड स्वीट ड्रीम्स।" लड़के ने कहा।

" प्लीज चलिए। मैं आपको आपके घर तक छोड़ता जाऊंगा। कोई चिंता करने कि जरूरत नहीं है बेफिक्र रहिए।" वो लड़का गर्वीली मुस्कान होठों पर लाते हुए बोला।

न चाहते हुए भी वसुधा उसके साथ चल पड़ी।

सरिता और वसुधा का घर तीन और घरों के बाद है।

" इतनी डरी हुई क्यों हो?" मैं तुम्हे पिशाच दिख रहा हूं क्या?" 😈  वसुधा के आगे चलते हुए भी उसने गर्दन पीछे कि ओर करके कहा। बिना मुड़े गर्दन को पीठ कि ओर करके डरावने अंदाज में पेश आने लगा। वसुधा ने जैसे ही देखा कि उसका चेहरा पीठ कि ओर है तो मानों उसका कलेजा मुंह को आ गया। सांसे बढ़ गई। पसीने छूटने लगे।

" बस खून चहिए मुझे फिर चली जाना अपने घर।" इस बार उसने मुंह खोला तो उसके दांत खून से सने हुए और बड़े– बड़े नजर आए। वो अब बदहवास सी होकर भागने लगी।

सायं सायं हवा बह रही है। सरपट रस्ते पर दौड़ते हुए उसे कुछ सुझ ही नहीं रहा हैं। परछाई उसके पीछे पड़ी हुईं है और ऊपर से वो ठहरी डरपोक लड़की।


अचानक से उसे ठोकर लगी। जमीन पर जा गिरी। परछाई ने उसे घेर लिया। चेहरा खौफनाक। लाल खूनी झुर्रियों वाली चमड़ी, दांत खून से सने हुए, हाथ बेहद लंबे और नाखूनों वाले, आंखे कभी लाल तो कभी सफेद नजर आ रही है और पैर उल्टे और बिल्कुल सफेद।
वो साया अब वसुधा के दोनों पैर पकड़कर अपनी ओर खींचने को उद्यत हुआ। आसमान में काले डरावने बादल छाए हुए हैं। सियारों कि रोने कि आवाज सुनाई दे रही है। भयानक आवाजे और माहौल भी भययुक्त।

" प्लीज छोड़ो मुझे।" अपना पैर छुड़ाते हुए वो बोली।

" पिशाच हूं मैं। हर दिन किसी इंसान चाहे वो लड़का हो या लड़की का खून पीना पड़ता है मुझे और इससे मेरी शक्तियां बढ़ती है तो अब मैं तुम्हारे शरीर का खून पीने जा रहा हूं।" वो परछाई भी दृढ़ निश्चयी स्वर में बोला।
" तो,,तुम,,, पिशाच हो। तुमने सरिता,,वो,,खून,,।" उसके होठ कांप उठे। भयानक अट्टहास करते हुए वो परछाई उसके सामने जा खड़ा हुआ।

" हां, उसका खून पीता हूं मैं रात को। मैं किसी भी चपरासी के चाचा का बेटा नहीं हूं। ये सब मेरा नाटक था सरिता को बहलाने का। जवां रहने के लिए और बालयुक्त रहने के लिए मुझे खून चहिए,,,खून।" वो जोर से अट्टहास करते हुए चीख पड़ा। वसुधा उठ कर भागने कि सोच ही रही थी कि परछाई यानि कि उस लड़के ने अपने हाथ ऊपर कि ओर उठाए। धारदार नाखूनों वाली पांच उंगलियों को देखते हुए वो अपना हाथ वसुधा के चेहरे के पास ले गया। वसुधा जोर से चीख पड़ी। उसके चेहरे पर नाखूनों के निशान बन गए और खून कि लकीरें खींच गई।
वसुधा बेहोश हो गई।

अगली सुबह।

हॉस्पिटल में वसुधा एडमिट है। वो कोमा में जा चुकी हैं। चेहरे पर अभी भी डर साफ नजर आ रहा है। गले पर स्याह नीले रंग के निशान और चेहरे पर घाव के निशान हैं।
उसके परिवार के किसी  भी सदस्य कि समझ में नहीं आ रहा है कि ये वसुधा के साथ कैसे हो गया। ये तो वसुधा ही जानती है कि एक " पिशाच" ने  ही उसकी जिंदगी बर्बाद कि है।



।समाप्त।।


5
रचनाएँ
हॉरर स्टोरीज
5.0
कुछ डरावनी कहानियां।

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