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HANUMANTSHAYRI

हनुमंत कुमार तिवारी

4 अध्याय
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hanumantshayri

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पुस्तक के भाग

1

कविता

7 जून 2016
0
5
1

"पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो,आँसू छिपाते हो फेर कर नज़रें,इतना फीका मुस्कुराया न करो, पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो!!हिदायत से घर भर की लाइट्स बुझाते,सोंच कर भी न कितने सामान खरीदते,गाड़ी का माइलेज चेक करते रहते,मेरे हाथ में ए टी एम थमाया न करो... पापा मुझे छोड़ने स्टेशन आया न करो।पानी की बॉटल

2

मेघ

2 जुलाई 2016
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1
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ए खुदा मौसम को इतना रोमांटिक भी ना करकुछ लोग ऐसे भी है जिनका महबूब नहीं...

3

फ़िज़ा महसूस कराती है

2 जुलाई 2016
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2
0

फ़िज़ा महसूस करवाती कि जैसे अब यहाँ तुम हो,मगर सबसे निराली है जगह वो ही जहाँ तुम हो,यकीं होता नहीं मुझको मिलन को इक बरस बीताजुलाई आ गई फिर से कहो अब गुम कहाँ तुम हो ?

4

बस पानी

3 जुलाई 2016
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3
0

"ये भूख-प्यास-तलब जिसकी है मेहरबानी,उसी का काम है सब को मिले दाना-पानी ....."

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