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हौसलो की उड़ान

अनन्या राय

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एक बचपन का जमाना था जहाँ खुशियों का खजाना था चाहत चांद को पाने कि थी पर दिल तितली का दिवाना था उम्मीद से नही दिलो मे जान होती है पंखो से कुछ नही होता होसलो से उड़ान होती है मेरी जिंदगी भीअब इन्ही रहो पर चल रही है हर बार अपनी तस्वीर बदल रही है आई थी मेरी जिंदगी मे भी कई मुश्किले पर मेरे हौसले ने कहा तू खुल कर जी ले मै हू साथ तेरे पा ले अपने मंजिल को कंधो पर चलकर मेरे तेरे सपने के उड़ान की जिम्मेदारी मेरी होगी तेरी हर मुश्किल मे हिस्सेदारी मेरी होगी सफलता खुद चूमेगी तेरे कदम तू मिटा दे सबके भरम बचपन से दो सपना देखा उसे पूरा करके अब दिखा तेरा हौसला किता है बुलंद ये अब तू दुनिया को बता समय है पहचान ले अपने आप को शरीर से नही आत्मा से जान ले अपने आप को  

hauslo ki udaan

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