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दिल का दर्द

7 मार्च 2023

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ग़ज़ल (३)

दिल का दर्द वो भुलाने लगे हैं।
यार हमें ऐसे ही सताने लगे हैं।।

भुला दी उसने यादें पल में ही।
अपना बनाने में जमाने लगे हैं।।

जिन्हें रिश्तों की कद्र नहीं थी।
वही घरों में आने जाने लगे हैं।।

"चंदन" नहीं तुम मायूस होना।
गीत तुम्हारे गुनगुनाने लगे हैं।।

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रचनाएँ
मौसम-ए-इश्क
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