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"प्रथम शिक्षिका"

3 जनवरी 2022

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सर्व प्रथम महिला, जिसने कलम पुस्तक उठाई 
उस दौर, हर ठोर अपमान वो पाई
 यातना उनके संकल्प चीर ना पाई 
आज नारी उनकी बदौलत शिक्षित हो पाई
 क्रांति लाने वाली क्रांतिवीर थी सावित्रीबाई।।
खोखली परंपराएं तोड़कर आगे जो आई
 कष्ट भुला अपना ,समाज में नई अलख जगाई 
मार्ग अवरुद्ध करने हेतु, गई डराई धमकाई
 धर्म के अंधविश्वासी ठेकेदारों ने, कर दी कीचड़ से पुताई
 समाज की यातनाओं का जत्था,कदम उनके रोक ना पाई
 साहस रग रग में भरकर ,बेखौफ चल रही थी सावित्रीबाई।।
अंधेरों को तोड़ती हुई ,चिरागों के लिए जगह बनाई 
रूढ़िवादियों को अपनी, सत्ता डोलती नजर आईं
 यूं तो धीमी सी लौ थी,जब धरती पर वह आई 
ज्योतिबा सावित्रीबाई का मिलन, नई क्रांति लेकर आई 
मिलन के परिणामत: ,धीमी लौ से धधकती ज्वाला बन गई सावित्रीबाई।।
                            छाया🙂
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रचनाएँ
छाया
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मैं लेखिका छाया , मेरी यह पुस्तक समाज में जैसा दिखाई देता है और धरातल पर जो वास्तविक स्थिति है उसी पर आधारित आलेख या रचनाओं का संग्रह है। छाया की पुस्तक का प्रत्येक पृष्ठ मेरे जीवन का अक्ष है ,छाया एक पुस्तक मात्र नहीं है मेरे अनुभव का सार है , इन्सान के जीवन में बहुत ऐसे मोड़ आते हैं जिनमे इन्सान खुद को बहुत टूटा महसूस करता है और मेरी यह कृति शैतू पथ है जो उन लोगो के लिए कठिन लम्हों में खुद को बिखराव या हार से आहत हैं उन लोगों के लिए संबल है ।
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हिंदी

10 जनवरी 2022
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