सन् २०१३ में कार्यस्थल पर महिला ओं के यौन उत्पीड़न अधिनियमको पारित किया गया था।जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं
- यह कानून क्या करता है?यह क़ानून कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को अवैध करार देता हैI
- यह क़ानून यौनउत्पीड़न के विभिन्न प्रकारों को चिह्नित करता है, और यह बताता है कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की स्थिति में शिकायत किस प्रकार की जा सकती है।
- यह क़ानून हर उस महिला के लिए बना है जिसका किसी भी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ होI
- इस क़ानून में यह ज़रूरी नहीं है कि जिस कार्यस्थल पर महिला का उत्पीड़न हुआ हैI
- कार्यस्थल कोई भी कार्यालय/दफ्तर हो सकता है
शिकायत कौन कर सकता है?
जिस महिला के साथ कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न हुआ है, वह शिकायत कर सकती है I
शिकायत किसको की जानी चाहिए ?
- अगर आपके संगठन/ संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति हैतो उसमें ही शिकायत करनी चाहिए। ऐसे सभी संगठन या संस्थान जिनमें १० से अधिक कर्मचारी हैं, आंतरिक शिकायत समिति गठित करने के लिए बाध्य हैं
- अगर संगठन ने आंतरिक शिकायत समिति नहीं गठित की है तो पीड़ित को स्थानीय शिकायत समिति में शिकायत दर्ज करानी होगील दुर्भाग्य से कई राज्य सरकारों ने इन समितियों को पूरी तरह से स्थापित नहीं किया है और किससे संपर्क किया जाए,
यह जानकारी ज्यादातर मामलों में सार्वजनिक नहीं हुई है।
शिकयत कब तक की जानी चाहिए? क्या शिकायत करने की कोई समय सीमा निर्धारित है?
शिकायत करते समय घटना को घटे तीन महीने से ज्यादा समय नहीं बीता हो, और यदि एक से अधिक घटनाएं हुई है तो आखरी घटना की तारीख से तीन महीने तक का समय पीड़ित के पास हैI
क्या यह समय सीमा बढाई जा सकती है?
हाँ, यदि आंतरिक शिकायत समिति को यह लगता है की इससे पहले पीड़ित शिकायत करने में असमर्थ थी तो यह सीमा बढाई जा सकती हैI
शिकायत कैसे की जानी चाहिए?
शिकायत लिखित रूप में की जानी चाहिए। यदि किसी कारणवश पीड़ित लिखित रूप में शिकायत नहीं कर पाती है तो समिति के सदस्यों की ज़िम्मेदारी है कि वे लिखित शिकायत देने में पीड़ित की मदद करें I
उदाहरण के तौर पर, अगर वह महिला पढ़ी लिखी नहीं हैऔर उसके पास लिखित में शिकायत लिखवाने का कोई ज़रिया नहीं है तो वह समिति को इसकी जानकारी दे सकती है I
सरल हिंदी मैं अधिक जानकारी के लिए यहां पढ़ें http://nyaaya.in/hi/law-explainers/sexual-harassment/