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कविताएं

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टुकड़ा भर हूंद्वारा:-प्राची सिंह "मुंगेरी"अभी तो टुकड़ा भर हूंख़ुद को समेट लिया तो आसमां बनुंगी बादलों से थोड़ी ऊपर हूं,आसमां तो अभी नहीं हूं,महकती बूंदों की तरहरिमझिम बरसात बनूंगी कोई गीत ब

ज़िन्दगी का क्या, ज़िंदगीभर साथ नहीं देती,ख्वाहिशों का क्या, ख़त्म भी तो नहीं होती,जख्म हो तो मरहम भी मिल जाता है;दवा की जरुरत किसे है दुवा हो बस जो ख़त्म नहीं होती। Tejaswita Khidake: ख्वाहिश

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