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नील पदम् के दोहे

दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"

50 अध्याय
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13 पाठक
25 मार्च 2024 को पूर्ण की गई
निःशुल्क

मन में अनायास ही उपजे दोहे  

neel padm ke dohe

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पुस्तक के भाग

1

शीत लहर

7 जनवरी 2024
3
1
0

शीत लहर कितनी बढ़ी, हुआ नहीं आभास, ये जादू तब तक मगर,  जबतक तुम मेरे पास ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"

2

शीतलहर से

7 जनवरी 2024
3
1
0

शीतलहर की शीत से, विचलित मन घबराय,  इस सर्दी में आप क्यों,   रूठे हमसे जाय ।       (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"          

3

शीतलहर से अनुबन्ध

7 जनवरी 2024
2
1
0

शीतलहर से हो गए,  सर्द सभी अनुबन्ध, जाने क्या-क्या बह गया,  जब टूटे तटबन्ध ।         (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"             

4

नावें

7 जनवरी 2024
1
1
0

बंधीं तटों से नाव  तो,  क्या लहरों से सम्बन्ध, इनकी गाँठें खोल दो, हों ये भी तो कुछ उद्दण्ड ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                          

5

सर्दी गर्मी

7 जनवरी 2024
1
1
0

सर्दी कितनी भी बढ़े,  गर्म रखो अहसास,  सर्दी गर्मी तय करे,  क्या सम्बन्धों में ख़ास ।      (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"               

6

मसान

9 जनवरी 2024
0
0
0

मनवा आज उदास है,  जैसे बीच मसान, जगा जागरण जोग सा, जाग गया इंसान ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                   

7

पानी

9 जनवरी 2024
0
1
0

ज्ञानी  ये  कहते खर्च कर, जैसे बहाया पानी, लेकिन एक दिन आएगा,  लेगा बदला पानी । (C)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"

8

पैसे

9 जनवरी 2024
0
1
0

जाग रहा है रात को, जाग रहा है दिन,  साँसों की चिंता नहीं, पैसे रहा है गिन।         (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"        

9

महल

9 जनवरी 2024
0
1
0

कोई महल न काम का, इतना लीजो जान, यहीं धरा रह जाएगा,  निकल जायेंगे प्रान । (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"

10

आस

9 जनवरी 2024
0
1
0

साँसें भरी हों आस में, तो सब कुछ होगा पास में,  जब सब कुछ होगा पास में,  तब भी होगा आस में ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                                     

11

ग़रीब

10 जनवरी 2024
0
1
0

ओ ग़रीब क्या  देखी नहीं, तूने अपनी औकात,  किससे पूछकर देखता, आगे बढ़ने के ख़्वाब ।              (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नीलपदम्"                 

12

हिंदी

10 जनवरी 2024
0
1
0

तकनीकी में अब रखो, हिंदी का उपयोग,  जिसको हिंदी आएगी, वो ही पायेगा भोग ।              (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नीलपदम्"                

13

रीत

10 जनवरी 2024
0
1
0

जीत के पीछे हार है,  हार के पीछे जीत,  रात गए दिन होत है, यही पृकृति की रीत ।              (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नीलपदम्"                  

14

श्री राम

10 जनवरी 2024
0
1
0

निश्चित ही हो जायेगी नौका, भवसागर   से पार,     राम पधारे अयोध्या, और हम अयोध्या के द्वार ।              (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नीलपदम्"             

15

सपना

10 जनवरी 2024
0
1
0

सपना  ऐसा देखिये , नींद नहीं फिर आए ,  सपना हो  साकार जब, चैन तभी मिल पाए । (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                

16

सर्दी के दोहे (हास्य प्रयास) -1

11 जनवरी 2024
0
1
0

शीतलहर  है चल रही, रखियो कोयला पास,  जैसी जितनी ठण्ड हो,  उतना लीजो ताप ।  (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                 

17

सर्दी के दोहे (हास्य प्रयास) -2

11 जनवरी 2024
0
1
0

लकड़ी जल कोयला बनी,  कोयला बन गया राख़ , अब तो आलू निकाल ले, हो  गए  होंगे  ख़ाक  । (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"

18

सर्दी के दोहे (हास्य प्रयास) -3

11 जनवरी 2024
0
1
0

शीतलहर में ओढ़ लो,  कान ढांक कर लिहाफ़, मारो चाय की चुस्कियाँ, और पढ़ते रहो किताब। (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्" 

19

अश्रु का उपकार

25 मार्च 2024
1
2
2

दो अश्रु नैनन ढले, किया समन्दर खार,  मन कितना हल्का किया, ये मन पर उपकार।              (c)@ दीपक कुमार श्रीवास्तव " नील पदम् "         

20

अश्रु और हाथ

25 मार्च 2024
0
1
0

अश्रु छोड़ें नैन जब,  छूटे तब दुःख का साथ,  मन हल्का तब और हो, जब कोई बढ़ाये हाथ।       (c)@ दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                 

21

अश्रु चीर

25 मार्च 2024
1
1
0

आँखों में अश्रु बसें,  और बसे हृदय में पीर,  नग्न पीर हो जात है, बहें अश्रु फटे ज्यों चीर।  (c)@ दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                         

22

अश्रु मोती आँख के

25 मार्च 2024
0
1
0

अश्रु मोती आँख के, रखियो इन्हें सम्भाल, जरा-जरा सी बात पे, काहे रहे निकाल।               (c)@ दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"   

23

बर्फ़ और धूप

25 मार्च 2024
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बर्फ़ पिघल गई दर्द की, निकली आशा की धूप,  अँधेरा तब तक रहा, जब तक न निकले कूप।         (c)@ दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"       

24

चौराहा

25 मार्च 2024
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0

चौराहे पर आ खड़े, अब जायें किस ओर,  नहीं पता था आएगा, जीवन में ये भी दौर।  (c)@ दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                      

25

शतरंज

25 मार्च 2024
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जीवन ऐसे चल रहा, ज्यों बाजी शतरंज,  जब लगता सब ठीक है, त्यों होवे बदरंग।  (c)@ दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                    

26

दो रोटी

25 मार्च 2024
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1
0

दो रोटी की चोट से,  पीर पोर तक होय,  मन साधे तो तन दुखे, तन साधे मन रोय।            (c)@ दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"       

27

बावरा

16 अप्रैल 2024
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जहर भर गया जेहन में,  कैसा जादू होय,  जैसे कूकुर बावरा,  बिना बात के रोय ।                (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"      

28

सोना

16 अप्रैल 2024
0
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0

सोना उतना ही भला,  जितने से काम चल जाये, ज्यादा सोया,  ज्यादा पाया,  तन या मन ढाल जाये । (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"

29

चक्की

16 अप्रैल 2024
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चलती चक्की साँस की,  जाने कब रुक जाय, जोड़-घटा और गुना-भाग में, काहे समय गँवाय ।                (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                 

30

अंकुर

16 अप्रैल 2024
0
1
0

सूरज  की  एक  रौशनी,   देती  अंकुर  फोड़,  अपने मतलब की सीख को, लेवो सदा निचोड़ ।                (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"               

31

मरने का अपराध

18 अप्रैल 2024
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0

घड़ी- घड़ी क्यों कर रहा,  मरने का अपराध,  जीवन ही अनमोल है,  मलते रह जइयो हाथ।  (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                     

32

थाली में छेद

18 अप्रैल 2024
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जिस थाली में खा रहा,  उसमें करता छेद,  ऐसे जन पहचानकर, कभी न कहियो भेद।                (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"    

33

प्रचलन

18 अप्रैल 2024
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0

प्रचलन दुष्टों का बढ़ा, बढ़ता कलियुग आज,  सीधा-सरल और सादगी, बन बैठे अपराध ।                (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव "नील पदम्"                 

34

सबसे बड़ा चुनाव

18 अप्रैल 2024
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लोकतंत्र सबसे बड़ा, सबसे बड़ा चुनाव, मताधिकार का मान रख, सब पहुँचो अपने गाँव । (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नील पदम् "

35

वोट की चोट

18 अप्रैल 2024
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जिस नेता के काज गलत,  जिसकी नीयत में खोट,  पक्ष-विपक्ष न देखिये,  दीजो वोट की चोट ।  (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नील पदम् "                           

36

सर्प नेवला

18 अप्रैल 2024
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देश के हित को देखना,  जब करना मतदान,  कितना पानी दूध है कितना,  सर्प नेवला जान ।  (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नील पदम् "                          

37

गुप्तदान

18 अप्रैल 2024
0
1
0

गुप्तदान की महिमा बड़ी, जन्म सुफल हुई जाय,  मन रखियो चुपचाप सब,  जब मत दीजो जाय ।  (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नील पदम् "                            

38

राम नाम सर्वश्रेष्ठ है

18 अप्रैल 2024
1
1
0

राम का  नाम  सर्वश्रेष्ठ  है,  लिया आज़मा देख, राम ही असली नाम है, बाकी सब कुछ है फेक। (C)@ दीपक कुमार  श्रीवास्तव  "   नीलपदम्  " 

39

विश्वास

19 अप्रैल 2024
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काम न आया गर कभी,  दूर रखा हो विकास,  अस जब पहुँचे आप तक, मत कीजो विश्वास । (C)@ दीपक कुमार  श्रीवास्तव  "   नीलपदम्  "                       

40

षड्यंत्रों के बुनकर

19 अप्रैल 2024
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षड्यंत्रों को जो बुने बस, पाने को सत्ता राज,  सही वक़्त मतदान का, उन्हें ठोंक दो आज ।  (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नील पदम् "  

41

झाड़ू फेर दो

19 अप्रैल 2024
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जात-पात  की  बात जो,  देता  रोज  बताय, उस पर झाड़ू फेर दो, कितना भी बहकाय । (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "

42

जात-पात देखो नहीं

19 अप्रैल 2024
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जात-पात देखो नहीं,  न मजहब, पंथ या धर्म,  प्रत्याशी को वोट दो,  देख के उसके कर्म ।  (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "                                         

43

समय

20 अप्रैल 2024
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समय  बड़ा बलवान  है,  देत  पटखनी  जोर,  कभी ग़रीब की आँख का,  नहीं भिगोना कोर ।  (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "                       

44

आपकी खातिर

20 अप्रैल 2024
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जो जन समय निकाल ले, आपकी खातिर आज,  उसको कभी न भूलियो,  उसको रखियो याद  ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "                   

45

जो विपत्ति में

20 अप्रैल 2024
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जो  विपत्ति में   साथ  दे,  उसे  नहीं  बिसराओ,  काँधे से काँधा  दो मिला,  जब भी मौका पाओ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "                                      

46

मन की पीर

20 अप्रैल 2024
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कभी अघाया न थका, देते  तुम्हें  मन की पीर,  छह गज राखो फ़ासला,  जाओ न उसके तीर ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "                                     

47

आगे बढ़ता बालक

20 अप्रैल 2024
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चैन दिवस का उड़ गया,  उड़ी रात की नींद,  ऐसे बालक से रखो,  आगे बढ़ने की उम्मीद ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "                                   

48

सूखे तरु

20 अप्रैल 2024
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सोया,  खाया, करता रहा,   अमूल्य समय बर्बाद,  अस बालक सूखे तरु, चाहे जो डालो फिर खाद।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "                               

49

सबक

20 अप्रैल 2024
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पिता पुत्र को टोंकता,  यह कीजो वह नाय,  अपनी गलती के सबक, बेटे को समझाय।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "               

50

आशीर्वाद

20 अप्रैल 2024
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माता-पिता और बड़ों की बातें, समझो आशीर्वाद,  बीते  समय  के साथ  में,  बहुत  आयेंगे   याद ।   (c)@दीपक कुमार श्रीवास्तव " नीलपदम् "

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