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जब उसने मुझे भइया कहा ( हास्य कविता)

27 नवम्बर 2015

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मैंने ना जाने कितने सपने बुने
सपने बुने फिर वे धुने
किन्तु दिल का इकलौता अरमाँ आसुओं में बहा
जब उसने मुझे देखते ही भइया कहा।
होटल में गया वेटर को बुलवाया
बिरयानी और न जाने क्या क्या मंगवाया
किन्तु मेरा दिल वहाँ भी रोता ही रहा
बिल चुकता करने के बाद 
जब चिट पर लिख कर आया थैंक्यू भइया।
अन्त में मैंने पूछ ही लिया 
कि आखिर हम आपके हैं कौन
थोड़ी देर तो छाया रहा मौन
किन्तु अगले ही क्षण
दिल ने अति तीव्र दर्द को सहा
जब जवाब में उस दीदी ने 
एक बार फिर से मुझे भइया कहा।

     ----राजेश श्रीवास्तव

शिवम् ओझा

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गजब बहुत खूब...

24 अगस्त 2016

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वर्तिका

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धन्यवाद महातम मिश्रा जी!

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वाह बहुत खूब बहुत खूब

27 नवम्बर 2015

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रचनाएँ
halkifulkibaatein
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मच्छर चालीसा!

10 सितम्बर 2015
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ओम जय! मच्छर देवा,स्वामी जय! मच्छर देवा,रात को सोने ना दो तुम,काट-काट करते हो बेहाल तुम,खून पियों सबका,ओम जय! मच्छर देवा!मलेरिया एवं डेंगू के तुम हो दाता,किसी का निद्रा-सुख तुम्हे ना भाता,राग सुनाते हो ऐसा,ओम जय! मच्छर देवा!

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एअर कंडीशन नेता ( हास्य कविता )

27 अक्टूबर 2015
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ओ घोड़ी पर बैठे दूल्हे क्या हँसता है! ( हास्य कविता )

27 अक्टूबर 2015
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ओ घोड़ी पर बैठे दूल्हे क्या हँसता है!!देख सामने तेरा आगत मुँह लटकाए खड़ा हुआ है .अब हँसता है फिर रोयेगा ,शहनाई के स्वर में जब बच्चे चीखेंगे.चिंताओं का मुकुट शीश पर धरा रहेगा.खर्चों की घोडियाँ कहेंगी आ अब चढ़ ले.तब तुझको यह पता लगेगा,उस मंगनी का क्या मतलब था,उस शादी का क्या सुयोग था.अरे उतावले!!किसी

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हंसी एक्सप्रेस

27 अक्टूबर 2015
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सरदार पटेल

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हँसते-हँसते हो जाओगे लोटपोट!

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टीचर: सच ओर वहम में क्या फ़र्क़ है ?स्टूडेंट: आप जो हमें पढ़ा रही हैं वो सच है, लेकिन हम सब पढ़ रहे हैं ये आपका वहम है…….लड़की –बादल गरजे तोतेरी याद आती हैसावन आने सेतेरी याद आती हैबारिश की बुंदों मेंतेरी याद आती हैलड़का-पता है पता है तेरी छतरी मेरे पास पड़ी है लौटा दुंगा, मर मत….बंटू को सड़क पे 100

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मुस्कुराते रहो!

18 नवम्बर 2015
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पंखा पुराण (हास्य कविता)

23 नवम्बर 2015
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