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JYOTI PRASAD RATURI की पुस्तकें

रतूड़ी की डायरी✍️

रतूड़ी की डायरी✍️

खास कुछ नही बस जो कुछ भी घटा देखा वो लिख दिया । कुछ आप बीती कुछ औरों की ।

6 पाठक
8 रचनाएँ

निःशुल्क

रतूड़ी की डायरी✍️

रतूड़ी की डायरी✍️

खास कुछ नही बस जो कुछ भी घटा देखा वो लिख दिया । कुछ आप बीती कुछ औरों की ।

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दिल की आवाज़

दिल की आवाज़

ख्यालों में ही गुजर कर ली हमने "ताउम्र" कुछ ही बची है । अब आ भी जाओ रूबरू कर दे , इक बार दिल को । रस्म ए दीदार अभी बाकी है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी 🙏मुझे आशा है की "दिल की आवाज़" आपको पसंद आयेगी ।

5 पाठक
27 रचनाएँ

निःशुल्क

दिल की आवाज़

दिल की आवाज़

ख्यालों में ही गुजर कर ली हमने "ताउम्र" कुछ ही बची है । अब आ भी जाओ रूबरू कर दे , इक बार दिल को । रस्म ए दीदार अभी बाकी है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी 🙏मुझे आशा है की "दिल की आवाज़" आपको पसंद आयेगी ।

5 पाठक
27 रचनाएँ

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रिसता घाव

रिसता घाव

यह सत्य घटना पर आधारित है पात्र के नाम और जगह काल्पनिक है ।

1 पाठक
1 रचनाएँ

निःशुल्क

रिसता घाव

रिसता घाव

यह सत्य घटना पर आधारित है पात्र के नाम और जगह काल्पनिक है ।

1 पाठक
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JYOTI PRASAD RATURI के लेख

मैं समय के साथ बदला हूं , या समय मेरे साथ ।

16 जुलाई 2024
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मैं समय के साथ बदला हूं , या समय मेरे साथ । जो भी हो पर अब , अंतर पहले से बहुत हो गया है । लाली गुम और , गाल गुठली आम हो गया है । उमर अभी खास नहीं मगर , लगते बुजुर्ग 60 पार हो गया है ।।

यनु भी क्या शरील पर , बिति ग्याई कि....

10 जुलाई 2024
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यनु भी क्या शरील पर , बिति ग्याई कि , जिणों को मोह जू त्यारू ,भंग ह्वे ग्याई । अभी त उमर बाळापन मान , थोडा ही उबे होई । क्या दिखि क्या लाई गाडी , अभी बाबा ! जु ई ज्वानि सि , मन भोरै ग्याई । अभ

कहूं क्या इस दर्द ए हाल में

20 जून 2024
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 कहूं क्या इस दर्द ए हाल में , अब अल्फाजों ने जुबां से , रुखसत ले ली । आ करीब कुछ और हमारे , वक्त न जाने कब हमें , खामोश कर दे ।। ठहर कुछ देर और ऐ जिंदगी , कुछ देर और  उन्हें मैं , गल

कहूं क्या इस दर्द ए हाल में

20 जून 2024
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 कहूं क्या इस दर्द ए हाल में , अब अल्फाजों ने जुबां से , रुखसत ले ली । आ करीब कुछ और हमारे , वक्त न जाने कब हमें , खामोश कर दे ।। ठहर कुछ देर और ऐ जिंदगी , कुछ देर और  उन्हें मैं , गल

गुजर गए वो वक्त अब......

18 जून 2024
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गुजर गए वो वक्त अब , अच्छा या बुरा जैसा भी रहा होगा । फिक्र तो अब आगे की है कि , वक्त अब आगे का कैसा होगा ? ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

यादों के झरोखों से..

12 जून 2024
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यादों के झरोखों से आज, तेरी याद चली आई है । ऐ मेरे बचपन तू , अब तो लौट आ । कई बहार आई और गुजर गई , इस रंगीन जमाने में । बे रंग सी जिंदगी है अब हमारी , सदियों की तन्हाई है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

सुनो कांग्रेस वालों और कांग्रेस के...

23 मई 2024
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सुनो कांग्रेस वालों और कांग्रेस के संग सहयोगियों, अपनी ऊर्जा , व्यर्थ में न जाया करो । देश भक्त जनता देश की , संग बीजेपी के है । यह बात तुम सब , मान जाया करो । नहीं बहकने वाले अब जनशक्ति ,

हे प्रभु ! कुछ पल के लिए ही सही , मुझे वो सकूं दे दे ।

11 मई 2024
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हे प्रभु ! कुछ पल के लिए ही सही , मुझे वो सकुन दे दे । न अहसास गम का , न खुशी का ही । न मैं खुद को जान सकूँ , और न किसी को पहचान सकूँ । सब , देख लिया है यहां । बदल रहा है हर कोई , मौसम की तरह ।

तेरी कातिल आंखें है...।

29 अप्रैल 2024
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तेरी कातिल आंखें है , यह लोग कहते है । इक बार इधर तो देखो ,ये हुस्न ए बाहर । हम इन आंखों से, कत्ल होना चाहते है । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी

वो मेरे आंसू थे...

23 अप्रैल 2024
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वो मेरे आंसू थे , जो छलक गए  अंखियों के झरोखों से । आह...! आई किसी की याद आज ,  सच कई दिनों से । ✍️ज्योति प्रसाद रतूड़ी ।

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