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राजेश कमल की डायरी

राजेश कमल

5 अध्याय
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rajesh kamal ki dir

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पुस्तक के भाग

1

प्रेम-विवाह या वैवाहिक प्रेम?

21 जून 2016
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1

कहते हैं कि ईश्वर ने जब सृष्टि की रचना की तो सबसे अंत में अपनी सबसे खूबसूरत चीज़ बनाई – इंसान! उसने हमें न सिर्फ सुंदर शरीर दिया बल्कि विचारवान होने हेतु तर्क-शक्ति-संपन्न एक मष्तिष्क भी दिया. हमारी बुद्धि हमें शुष्क न बना दे इसलिए हमारे अन्दर भावनाओं का सागर, “हमारा मन” बनाया. आदमी आदमी इसलिए है क्य

2

शुक्रिया

23 जून 2016
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 1सुबह के आठ बजे हैं। यूँ तो इस वक़्त जीवन के हाथों में चाय का प्याला होता है किन्तु आज ऐसा नहीं है। बॉस ने कल ही ताकीद की थी कि कल दस बजे तक चाईबासा पहुँच जाना। कंपनी के नए विपणन कार्यालय का उद्घाटन होना है। सारे इंतजामात की जिम्मेदारी जीवन के सर डाल बॉस तो निश्चिन्त थे किन्तु जीवन? बेचारा! मरता क्य

3

अछूत (लघुकथा)

27 जुलाई 2016
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आज अट्ठाईस दिसंबर है। बच्चों की परीक्षाएँ ख़त्म हुए पूरे चार दिन बीत चुके हैं। इन चार दिनों में वे जितना खेलने की सोच सकते थे, उतना खेल चुके थे। आज छुट्टी का पाँचवा दिन है। शैतान-मंडली सुबह से ही सुस्त है। रौनी और चिंकी अपने दोस्तों के साथ सर्दी की अलसाई धूप में खुद भी अलसाये-अलसाये से लॉन में पड़े है

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एक मुलाकात: पहाड़ों की रानी से (दार्जीलिंग)

29 जुलाई 2016
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यूँ तो भारतवर्ष में उनतीस राज्य हैं और हर एक अपने आप में अनोखा-अनूठा है, पश्चिम बंगाल की बात ही निराली है. हो भी क्यों न? है कोई भारत का राज्य कि हिमालय जिसके सर का ताज हो और सागर जिसके पांव पखारता हो? गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ जिस धरती को पावन करती हों, और जिसने टैगोर और सुभाष जैसे पुत्र देश

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शहर की सैर : दार्जीलिंग में हमारा दूसरा दिन

2 अगस्त 2016
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1

पहला हिस्सा पढ़ने के लिए क्लिक करें: सुबह के सात बजे हैं और ये दार्जीलिंग में हमारे दूसरे दिन की शुरुआत है. यूँ तो हमें आठ बजे तैयार रहने को कहा गया था किन्तु मैंने ड्राईवर को नौ बजे आने को कहा था. मुझे लगा था कि लंबी यात्रा की थकान से उबरने में थोड़ा समय तो लगेगा ही. आठ बजते-बजते नाश्ता भी तैयार हो ग

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