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मुमकिन भाग 4

17 दिसम्बर 2023

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भाग 3 में आप लोगों ने देखा कि किस तरह सुनील पैसों की व्यवस्था में खुद को पूरी तरह भूल चुका था सुनील को तकरीबन पांच लाख रुपयों की जरूरत थी ताकि वो अपने पुत्र की फीस और अन्य जरूरतें पूरी कर कानपुर में उसके रहने के सभी प्रबंध कर सके और अपने छोटे पुत्र जो कि हाल ही में हाई स्कूल की परीक्षा में उत्तीर्ण हुआ था उसका भी दाखिला NEET की तैयारी के लिए एक अच्छे से कोचिंग संस्थान में करवा सके l

अगले ही दिन वो सुबह अपनी पत्नी से इस बारे मे बात करता है और फिर उसकी सलाह पर एक साहूकार के पास जाकर पांच लाख रुपये ब्याज पर मांगता है जिस पर साहूकार उसकी हालत देखकर पैसे देने से इंकार कर देता है फिर सुनील निराश मन से घर पर आकर अपनी असमर्थता पर इतना चिन्तित हो जाता है कि उसे खाने तक का होश नहीं रहता और गर्मी के मौसम में भरी दोपहर में बिना कुछ खाए पीए पैसों की जुगाड़ में निकल पड़ता है अपने हर एक सगे संबंधियों और रिश्तेदारों के सामने हाथ फैलाकर भी जब उसे निराशा ही हाथ लगती है तो एक पल के लिए जीवन से उसका मोह ही खत्म हो जाता है पर उसके सपने उसे जिन्दा रहने पर मजबूर कर रहे थे इसलिए परिस्थितियों का मारा बेचारा मौत के घूंट पीकर भी जिन्दा रहा l

           मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है

हर एक पल एक नया इम्तिहान होता है

           जो भाग गया मैदान से उसे क्या मिला

जो लड़ता है उसके कदमों में जहां होता है 

अंत मे जब उसे कोई राह नजर न आयी तो उसने अपना घर बेचने का निर्णय लिया और अपने पिता से इस बारे मे जिक्र किया तो अपने पुत्र की हालत पर वो बुढ़ा बाप अपने आंसुओ को न रोक पाया और उसके निर्णय से सहमत होकर उसने घर के कागजात अपने पुत्र को दे दिए जिसे लेकर पुत्र दुबारा से साहूकार के पास गया और चार लाख रुपयों में अपने घर का सौदा कर दिया अब इस नई विपत्ति का सामना करने के लिए सुनील का पूरा परिवार राम भरोसे निकल पड़ा किन्तु जाना कहां था ये किसी को नहीं पता l

राह न बदली, पर सफर नया था l

            दुख दर्द बना, हमसफर नया था ll

जिद के आगे झुका नहीं, वो l

            भले टूटकर, बिखर गया था ll


मीनू द्विवेदी वैदेही

मीनू द्विवेदी वैदेही

बेहतरीन लेख 👌👌 आप शब्द माइक पर अपनी कविता का पाठ कर सकते हैं।👍

20 दिसम्बर 2023

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रचनाएँ
मुमकिन
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मुमकिन कहानी आधारित है अपने बच्चों के लिए एक पिता के द्वारा सृजित सपनों की l जिन्हें पूरा करने के लिए पिता मुश्किलों के उस दौर से गुजरा जहां से परिस्थितियों के प्रतिकूल होने पर भी उस पिता ने हार न मानी और अंततः उसकी जोरदार जीत से कई आलोचकों के मुंह पर करारा तमाचा लगा जो उसकी गरीबी का मज़ाक बनाया करते थे l
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मुमकिन भाग 1

17 दिसम्बर 2023
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एसा क्या है जो किया नहीं जा सकता डर से खुलकर क्यूं जिया नहीं जा सकता कहते है कि इस दुनिया में कोई भी कार्य असंभव नहीं होता जरूरत है तो बस थोड़े से हौंसले कि और कुछ कर गुज़रने के चाहत की l हमारी य

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मुमकिन भाग 2

17 दिसम्बर 2023
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भाग-1 में आप लोगो ने देखा कि किस तरह गांव वाले सुनील का मज़ाक उड़ाया करते थे परन्तु सुनील अपने सपनों पर अडिग था और इन सब बातों का उस पर कोई खास प्रभाव न पड़ता थाl  वक़्त गुज़रता गया और सुनील भी जी त

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मुमकिन भाग 3

17 दिसम्बर 2023
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भाग-2 में आप लोगों ने देखा कि गांव वालों के मज़ाक से सुनील की मानसिक दशा खराब होती जा रही पर सुनील भी एक रबर की भांति अडिग था कोई कितना भी तोड़ मरोड़ ले पर अंत मे वह अपना आकार फिर से ले ही लेता है l

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मुमकिन भाग 4

17 दिसम्बर 2023
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भाग 3 में आप लोगों ने देखा कि किस तरह सुनील पैसों की व्यवस्था में खुद को पूरी तरह भूल चुका था सुनील को तकरीबन पांच लाख रुपयों की जरूरत थी ताकि वो अपने पुत्र की फीस और अन्य जरूरतें पूरी कर कानपुर में

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मुमकिन भाग 5

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इस कथा के सबसे मार्मिक दृश्य भाग 4 में आपने देखा कि किस तरह सुनील अपने परिवार के साथ घर छोड़कर निकल पड़ता है और इस गांव में उसका कोई भी दूसरा ठिकाना नहीं था और अपने आत्मसम्मान के कारण किसी भी रिश्तेदा

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मुमकिन भाग 6

17 दिसम्बर 2023
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भाग 5 में आपने देखा कि किस प्रकार एक बच्चे को अपने पिता के संघर्षों की दास्तान सहसा ही पता चल जाती है शायद ये ईश्वर की ही रज़ा थी कि बच्चे को भी अपने पिता के संघर्षों के बारे मे जानने का मौका मिला और

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मुमकिन भाग 7

17 दिसम्बर 2023
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भाग 6 में आप लोगों ने देखा कि किस तरह सुनील अपने साथ हो रही इस ख़ुशनुमा बातों को लेकर हैरान था इसलिये सारा माजरा समझने के लिये वो वापस अपने पुराने गांव मे अपने परिवार के साथ लौट जाता है और वहां पहुं

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