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panditji

जतिन दीक्षित

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या तो बद्चलन हवाओं का रुख मोड़ देंगे हम , या खुद को वाणी पुत्र कसना छोड़ देंगे हम ।।। हिचकिचाएंगे जिस दिन भी सच लिखने से, कागज़ को फाड़ देंगे और कलम को तोड़ देंगे हम।।  

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