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Deepak Singh (Deepu) के बारे में

मेरा नाम दीपक सिंह है मेरी उम्र 21 साल है वैसे तो मेरा कोई साहित्यिक परिचय नहीं है लेकिन मेरी लिखने की रुचि ने मुझे इस मंच की ओर आकर्षित कर लिया और इसलिए अपनी मन की भावनाओ को किताब के पन्नो में लिखता हूँ | कृप्या किताब पढ़ने के बाद प्रतिक्रिया अवश्य दिया करें जिससे मुझे भी पता लग सके की आपको किताब कैसी लगी। प्रोफाइल फॉलो आप अपनी इच्छा से कर सकते हैं। धन्यवाद

पुरस्कार और सम्मान

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दैनिक लेखन प्रतियोगिता2023-07-28
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दैनिक लेखन प्रतियोगिता2023-06-19
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दैनिक लेखन प्रतियोगिता2023-03-17
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दैनिक लेखन प्रतियोगिता2023-03-03
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दैनिक लेखन प्रतियोगिता2023-03-02
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दैनिक लेखन प्रतियोगिता2023-02-15
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दैनिक लेखन प्रतियोगिता2023-01-28
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दैनिक लेखन प्रतियोगिता2023-01-23

Deepak Singh (Deepu) की पुस्तकें

मेरी दैनिक लेखनी

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दैनिक लेखन के लिए समर्पित

68 पाठक
29 रचनाएँ

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मेरी दैनिक लेखनी

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बचपन

बचपन

बचपन कैसे गुज़रता है पता नहीं चलता लेकिन ताउम्र बचपन की यादें हमारे ज़हन में जिन्दा रहती हैं |

18 पाठक
6 रचनाएँ
1 लोगों ने खरीदा

ईबुक:

₹ 32/-

बचपन

बचपन

बचपन कैसे गुज़रता है पता नहीं चलता लेकिन ताउम्र बचपन की यादें हमारे ज़हन में जिन्दा रहती हैं |

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ऐ दिल तु फिर किसी से ना लगे

ऐ दिल तु फिर किसी से ना लगे

Ek koshish ki hai सुनिएगा जरूर

16 पाठक
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ईबुक:

₹ 21/-

ऐ दिल तु फिर किसी से ना लगे

ऐ दिल तु फिर किसी से ना लगे

Ek koshish ki hai सुनिएगा जरूर

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🐒🦅🦚जंगल की पंचायत 🐅🐘🐊

🐒🦅🦚जंगल की पंचायत 🐅🐘🐊

ये किताब मेरी कल्पना की दुनियां है जो एक अनोखा जंगल है जहां सभी जानवरों को किरदार दिए गये हैं। ये सब जानवर हम इंसानों की तरह ही बात करते हैं और सब अपना जीवन कभी खुशी से और कभी दुख से जीते हैं, कभी आपस में लड़ते हैं और कभी मिलकर अपने दुश्मनों का सामना

निःशुल्क

🐒🦅🦚जंगल की पंचायत 🐅🐘🐊

🐒🦅🦚जंगल की पंचायत 🐅🐘🐊

ये किताब मेरी कल्पना की दुनियां है जो एक अनोखा जंगल है जहां सभी जानवरों को किरदार दिए गये हैं। ये सब जानवर हम इंसानों की तरह ही बात करते हैं और सब अपना जीवन कभी खुशी से और कभी दुख से जीते हैं, कभी आपस में लड़ते हैं और कभी मिलकर अपने दुश्मनों का सामना

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अनकहा सत्य

अनकहा सत्य

पौराणिक कथाओं का संग्रह

निःशुल्क

अनकहा सत्य

अनकहा सत्य

पौराणिक कथाओं का संग्रह

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किस्से कहानी

किस्से कहानी

मेरी लिखी किताबों की कुछ कहानियां इस किताब में निशुल्क पढ़ने के लिए दी गयी हैं |

4 पाठक
3 रचनाएँ

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किस्से कहानी

किस्से कहानी

मेरी लिखी किताबों की कुछ कहानियां इस किताब में निशुल्क पढ़ने के लिए दी गयी हैं |

4 पाठक
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फैसला आपका

फैसला आपका

इस किताब में कुछ कहानियाँ लिखी हैं जो यह दर्शाते हैं की कैसे एक फैसला आपके जीवन को बदल देता है तो एक बार पढियेगा जरूर

3 पाठक
4 रचनाएँ
1 लोगों ने खरीदा

ईबुक:

₹ 53/-

फैसला आपका

फैसला आपका

इस किताब में कुछ कहानियाँ लिखी हैं जो यह दर्शाते हैं की कैसे एक फैसला आपके जीवन को बदल देता है तो एक बार पढियेगा जरूर

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याद.... एक सहारा

याद.... एक सहारा

"आज मेरी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है अगर किसी को जानना है कि मैं क्या कह रहा हूँ उसके लिए, उसे मेरे आंतरिक विचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा। क्योंकि आजकल मैं एक भी शब्द बोलने की कोशिश नहीं कर सकता, मेरी आवाज खोई हुई सी है और मैं अपनी सारी भा

2 पाठक
2 रचनाएँ

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याद.... एक सहारा

याद.... एक सहारा

"आज मेरी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है अगर किसी को जानना है कि मैं क्या कह रहा हूँ उसके लिए, उसे मेरे आंतरिक विचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करना होगा। क्योंकि आजकल मैं एक भी शब्द बोलने की कोशिश नहीं कर सकता, मेरी आवाज खोई हुई सी है और मैं अपनी सारी भा

2 पाठक
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प्रेम का सागर

प्रेम का सागर

ये कहानी एक प्रेम कहानी है जो अन्य सभी कहानी की तरह ही है लेकिन इसके किरदार सामान्य नहीं हैं। इस कहानी में एक ऐसे मुद्दे के बारे में बात की गई है जिसके बारे में ना ही कोई बात करना चाहता है और न कोई लिखना। ये कहानी समलैंगिक प्रेम पर आधारित है और इस कह

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प्रेम का सागर

प्रेम का सागर

ये कहानी एक प्रेम कहानी है जो अन्य सभी कहानी की तरह ही है लेकिन इसके किरदार सामान्य नहीं हैं। इस कहानी में एक ऐसे मुद्दे के बारे में बात की गई है जिसके बारे में ना ही कोई बात करना चाहता है और न कोई लिखना। ये कहानी समलैंगिक प्रेम पर आधारित है और इस कह

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ACCOUNTANCY

ACCOUNTANCY

यह किताब कॉमर्स वर्ग के पाठक के लिए बनायीं जा रही है |

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ACCOUNTANCY

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Deepak Singh (Deepu) के लेख

देर भली

28 जुलाई 2023
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यह कहानी है एक ऑटो वाले और एक नवयुवक प्रशांत की जो उस रात अपने घर को जल्दी पहुंचना चाहते थे। लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था इसीलिए दिन उन दोनों का सफर एक ही था । इस कहानी को उस दिन की सुबह से शु

जंगल का पायल चोर

27 जुलाई 2023
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दृश्य: मोरनी मामी नदी के किनारे बैठ कर रो रही है और सारे जानवर उसको पूछ रहे हैं कि तुम क्यों रो रही हो?कोयल(चाची): मोरनी बहन क्या हुआ क्यों परेशान हो?मोरनी(मामी): क्या बताऊं बहन पिछले महीने ही सोने की

दौड़ अभी बाकी है।

27 जुलाई 2023
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विषय : निरंतरता ही सफलता की कुंजी हैआज शुक्ला जी बेटा चार साल बाद घर वापस आ रहा है उनका बेटा विदेश में अपने कारोबार को स्थापित करने गया था और आज उनका बेटा (सार्थक) एक जाना माना कारोबारी है, उसका

जंगल का राजा कौन?

25 जुलाई 2023
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दृश्य: जंगल में राजा शेरसिंह की सभा चल रही है सभी जानवर अपनी अपनी जगह पर बैठे हैं तभी बंदर(गोलू) राजा से एक सवाल पूछता है।बंदर(गोलू) : महाराज आपको राजा किसने बनाया? शेर (राजा शेरसिंह) : क्या कहना

परिवर्तन ही सत्य है

25 जुलाई 2023
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एक नौ वर्षीय बालक काशी के मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियों पर बैठा हुआ था | उसकी आँखों से निकले हुए आंसू जो आग की गरमाहट से सूख से गए थे लेकिन उसका हृदय अभी भी विचलित था | घाट पर जल रही अनेकों चिताओं से निकल

आदिपुरुष एक फिल्म या भावना

19 जून 2023
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16 जून 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म आदिपुरूष आजकल खूब सुर्खियां बटोर रही है जिसके पीछे का कारण इसके पात्रों का चरित्र चित्रण और उनके द्वारा बोले गए डायलॉग हैं।फिल्म के टीजर के समय भी प

पिता की पीड़ा

18 जून 2023
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आज एक पिता अपने मन की भावना को लिख रहा है है जिसने अपनी बेटी की दुर्दशा को शब्दों में व्यक्त किया है।नटखट सी थी वो थोड़ी, थोड़ी शैतान थी।बेटी नहीं थी वो मेरी नन्ही सी जान थी।थोड़ी सी थी वो चंचल थोड़ी

द्रोपदी में अर्जुन से अधिक प्रेम करती है?

28 मार्च 2023
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जब पांचाली की मृत्यु हो गई, तो युधिष्ठिर ने पांडवों को जवाब क्यों दिया कि वह अन्य पांडवों की तुलना में अर्जुन से अधिक प्रेम करती है? मैंने सुना है कि द्रौपदी सभी पांडवों को समान रूप से प्यार करती थी।

यह बचपन फिर लौट कर आता नहीं

27 मार्च 2023
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आज का विषय: अलविदा बचपनएक कविता के रूप में......खिलखिलाती सी एक उम्र को जी लियाएक मुस्कराहट से हर गम को पी लियाऊँगली थाम के अब कोई चलाता नहींयह बचपन फिर लौट कर आता नहींन भूख की चिंता थी और न थी कल की

जब तू अपना सा लगता है

21 मार्च 2023
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क्यों न चाहूं तुझको तू खास जो इतना लगता है मैं गैरों से क्यों आस करूं जब तू अपना सा लगता है क्यों न मांगू तुझको रब से एक फरिश्ता सा तू लगता है मैं ओरों की क्यूँ चाह करूँ जब तू अपना सा

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