3 अप्रैल...... रविवार.....
कैसी हो डियर डायरी...?
मैं बिल्कुल ठीक हूँ....। पता हैं कल मेरा रसोई घर कितना खुश हुआ था...! मुझसे ज्यादा तो वो खुश था क्योंकि सिवाय चाय के कल उसका इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया...। पिछले सत्रह सालों में शायद ऐसा पहली बार ही हुआ होगा...। वरना चाहे किसी की शादी ब्याह हो या कोई त्यौहार....एक वक्त का खाना या फिर नाश्ता बनाने के लिए तो उसका इस्तेमाल होता ही आया हैं...। कल जैसा की मैने बताया सुबह का नाश्ता सोसाइटी में रखा गया था...। उसके बाद हम झांकी ( शोभायात्रा) देखने गए...। शाम को आतें आतें बहुत देर हो गई तो रात का खाना भी बाहर से ही मंगवा लिया..।
शायद कल मेरी जिंदगी का भी सबसे खूबसूरत दिन था... सोसाइटी में हमारे इष्टदेव झूलेलाल जी का जन्मदिवस और चेटीचंड मनाया गया... जिसने हमारी भाषा ( सिंधी) में गाने चलाए गए.... और उनको सुनते ही एक अलग ही जोश आ जाता हैं...। बस फिर क्या था नान स्टाप बिना रुके तीन घंटों तक मैं लगातार नाचती रहीं..। कुछ घंटों के लिए अपनी उम्र और सेहत को भी भूल गई थीं...। सच बताऊँ डियर तो मेरी जिंदगी में ऐसे मौके ना के बराबर ही आते हैं.... इसलिए जब भी आतें हैं मैं सब कुछ भूल जातीं हूँ...। तुम्हे पता हैं रात को जब घर पर आई तो पैरों में छाले पर गए थें... जिसका मुझे आभास भी नहीं था...।
कितने सुकून भरे वो पल थें... शब्दों में बयां ही नहीं कर सकतीं...। जैसा की मैने आपको बताया था इस सोसाइटी में मुझे आए हुए कुछ महीने ही हुवे हैं.... और मुझे घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं हैं तो मैं किसी से भी इतना घुली मिली नहीं हूँ.... होली में भी सोसाइटी की सखियाँ आई थी पर मुझे इजाजत नहीं दी गई तो मैं अपनी बालकनी में से उन सभी को देखकर ही खुश हो रहीं थीं...। लेकिन कल तो पूरे परिवार को बोला गया था और फिर हमारा महापर्व था.... हालांकि घर से ही मुझे हिदायत दी गई थीं की जल्दी वापस आ जाऊँ... लेकिन वहाँ जाने के बाद पता नहीं मुझे कैसा जूनून छा गया था...। सोसाइटी में सभी मेरे इस जोश और जूनून को देखकर आश्चर्य में पड़ गए थे....।
सच में कल का दिन मेरे लिए यादगार दिन रहा....।