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जमाना

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मुझे कहता ए जमाना बिगड़ा, मैं किसी की सुनतीं ही नहीं.. मुझसे रूठे है मेरे अपने, घर बाहर यार परिवार, अब कोई बात करता नहीं। मुझे कहता है जमाना बिगड़ा, मैं किसी की सुनतीं ही नहीं... मैं भी हूं आखिर इंसान, कब तक मैं झुकती रहूं.. दिल पर लगें हैं कितने घाव, ये किसी ने कभी पूछिया ही नहीं, सब अपने गए हैं रू

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