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मैं किसान हूं

Pawan Kumar Sharma kavi kautilya

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मेरे सपनो का भारत अफसरशाही छोड़ , लोग राजनीति में आते ढेरो वादे कर जनता को , फिर भूल जाते हम लोग उन्हें सर आंखों पर बिठाते और हम भी उन्हें अपार वोटो से जिताते उन सभी को सांसद , विधायक बनाते वहा वो पीछे मुड़कर देख नही पाते सभी सुविधाएं पाते , पेंशन भी घर लाते करनी है देश सेवा , तो काहे ये सब सुविधा पाते हो । जन सेवा के नाम पर अपना घर , गाड़ी बंगला बनाते हो सीखो उन आजादी के मतवलो से जिन्होंने अपना सर्वस्व लुटाया सीखो उन प्रहरियों से जो सीमा पर तैनात है सीखो उन शहीदों से जिन्होंने देश सेवा में अपने प्राणों को गवाया क्यू लेते हो पेंशन , और सर्व सुविधा जब आपको करनी है देश सेवा जन सेवा सांसदो , और विधायकों को पेंशन हटाओ तभी आजादी के अमृत महोत्सव का सही अर्थ समझ में आएगा । जो पैसा नेताओं को पेंशन के लिए मिलता है वो देश के विकास और गरीबों तक जाएगा । देनी है पेंशन तो उस किसान को दो जो कड़ी धूप में हल चलाता है अतिवृष्टि , अनावृष्टि और ओलो की मार झेल खेतो में अन्न उपजाता है । हर जवान , और किसान ही पेंशन का हकदार है । सभी चाहते है डॉक्टर , इंजीनियर, नेता बनना किसान कोई नही बनता , किसानी भी नौकरी है नेताओ की पेंशन बंद कर किसानों को पेंशन दिलवाओ ,ऐसा भी एक कानून बनाओ पवन कुमार शर्मा कवि कौटिल्य धन्यवाद 

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