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बारिश पर कविता

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पहली बारिश होते ही मन प्रफुल्लित हो जाता है। कवि को बारिश का मौसम में अपनी लेखनी के लिए सबसे उपयुक्त लगता है। बारिश में हरे-भरे पेड़-पौधे, भरे-भरे ताल-तलैये, पानी, कीचड़, छाता, कागज़ की नाव इत्यादि। ans:बादल, पानी, रिमझिम, बूँदे, कागज़ की नाव इत्यादि शब्द मन में आते हैं। तो उठाइए कलम और लिखिये अपनी मौलिक बारिश पर कविता


फिर आसमान में काली घटा छाई है, पत्नी ने फिर दो बाते सुनाई हैदिल कहता है सुधर जाऊँ, मगर पडोसन फिर भीग के आई है

ज़र्रा-ज़र्रा समेट कर खुद को बनाया है हमने,हम से यह ना कहना की बहुत मिलेंगे हम जैसे! 

दिल से किसी का हाथ अपने हाथो में लेकर देखोफिर मालूम होगा कि अनकही बातों को कैसे सुना जाता है

दिल का दर्द छुपा कर बाहर से मुस्कुरा देना, कैसे कहें क्या होता है किसी को पाकर गँवा देना! 

जिन लोगों को आपसे मिलने की चाहत ना हो, उन्हें बार-बार आवाज लगाया नहीं करते!

कहीं फिसल न जाओ जरा संभल के चलना, मौसम बारिस का भी है और मोहब्बत का भी! 

बरसातों के बादल अब दिल पर चूॅंयेगें तुम इन ऑंखों से अब गालों पर आओगी

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