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"फिज़ा" एक गज़ल

रोहित कुमार "मधु"

50 अध्याय
2 लोगों ने खरीदा
33 पाठक
18 नवम्बर 2022 को पूर्ण की गई

यह एक ग़ज़ल संग्रह है जिसमे में काफ़ी छोटी उम्र में मोहब्बत के मोहल्ले से गुजरते हुए शाइर ने कुछ कहने का प्रयास किया है, गजले है 11 - 12 कक्षा में मोहब्बत के आंगन में खिलती हुई नई कलियों की, तिलियो की, भॅंवरो की, जो की अब इस समय संसार में जीवन व्यापन हेतु धन एकत्रित करने की इक्शा से अलग-अलग शहरो में संघर्ष रत है, फूल अपनी तितलियों से दूर है, तितलियां अपने फूलो से, परंतु यह वेदना जन्म दे रही है संवेदना को, शायरी को। पढ़िए नई उम्र के दिल को , सुझाव दीजिए, आशीर्वाद दीजिए 🙏🏻🙏🏻 धन्यवाद। 

quot fija quot ek gajal

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पुस्तक के भाग

1

गज़ल..1, कुछ महीने हो गए हैं

4 नवम्बर 2022
6
1
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कुछ महीने हो गए हैं हम अकेले हो गए हैं हम तुम्हारे तो नही हैं हम तुम्हारे हो गए हैं

2

गज़ल..2, फूल थोड़े से सुहाने देखतीं हैं

4 नवम्बर 2022
1
1
0

फूल थोड़े से सुहाने देखतीं हैं तितली भी सपनो के दाने फेंकतीं हैं खेलते हैं लोग दिल से, साथ उसके सब दिलो के साथ में जो खेलती हैं

3

गज़ल..3, हमीं दिल ये अपना जला बैठते हैं

5 नवम्बर 2022
2
1
0

हमीं दिल ये अपना जला बैठते हैं खुदी और देने हवा बैठते हैं नदी के किनारे कहीं बैठ करके नई इक नदी हम बहा बैठते हैं

4

गज़ल..4, मोहब्बत इतनी है तुमको मोहब्बत से

6 नवम्बर 2022
2
2
0

मोहब्बत इतनी है तुमको मोहब्बत से मोहब्बत छेड़ते जाओ मोहब्बत सेदिलो को तोड़ना ही है मोहब्बत क्या दिलो को तोड़ते जाओ मोहब्बत से मोहब्बत रूठती

5

गज़ल..5, मुसाफ़िर तो रस्ता समझ बैठते है

6 नवम्बर 2022
1
0
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मुसाफ़िर तो रस्ता समझ बैठते है नए कुछ खज़ाना समझ बैठते है यहाॅं कोई भी तो नही है हमारा हमीं सबको अपना समझ बैठते है

6

गज़ल..6, प्यार कैसे नज़र में होता है

8 नवम्बर 2022
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प्यार कैसे नज़र में होता है कुछ अलग सा ज़िगर में होता है सीने में कैसे है ये हंगामे दिल तिरे जब नगर में होता है

7

गज़ल..7, जब हमारा नही

9 नवम्बर 2022
1
0
0

जब हमारा नही कोई मसला नही थीं बहुत पास वो दिल भी धड़का नही

8

गज़ल..8, एक हॅंसी नाम जोड़े जा रहे हैं

9 नवम्बर 2022
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एक हॅंसी नाम जोड़े जा रहे हैं हम भी आहिस्ता से छोड़े़ जा रहे हैं ये भी आख़िर कैसी मोहब्बत है जानाॅं लोग है के फूल तोड़े जा रहे हैं

9

गज़ल 9, ये गम भी क्या कम है जानाॅं

9 नवम्बर 2022
1
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ये गम भी क्या कम है जानाॅं तुम तुम हो हम हम है जानाॅं जी हम इक करले दोनो का सीने में जी कम है जानाॅं

10

गज़ल..10, बिना मय के शराबी भी रहे थे हम

9 नवम्बर 2022
0
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बिना मय के शराबी भी रहे थे हम ये आख़िर कौन सी मय पी रहे थे हम तुम्हे ये जान कर हैरानी तो होगी बिना कैसे तुम्हारे जी रहे थे हम

11

गज़ल..11, तेरी जब बात आती है

9 नवम्बर 2022
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तेरी जब बात आती है बस तिरी बात आती है थोड़ से और बैठो तो बस ‌अभी‌ ग्लास आती है

12

गज़ल..12, उस ने फिर से कसम अपनी भी तोड़ दी

9 नवम्बर 2022
1
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उस ने फिर से कसम अपनी भी तोड़ दी उस ने सच्ची कसम खानी ही छोड़ दी हाथ उसने मिलाया हमे फिर से जब उसने उँगली ‌ भी फिर से वही मोड़ दी

13

गज़ल..13, माॅंगते है जो नही पाते हैं

9 नवम्बर 2022
0
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उसने वो बात नही की हमसे बात हम कह जो नही पाते हैं वह तो सोता है किसी बाहों में हम यहाॅं क्यूॅं सो नहीं पाते हैं

14

गज़ल 14, गिरता - फिरता पटरी पे आ जाता है

13 नवम्बर 2022
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गिरता - फिरता पटरी पे आ जाता है भौंरा खुलती कलगी पे आ जाता है क्या करें हम इस भटकते दिल का भी हर टहलती तितली पे आ जाता है

15

गज़ल - 15, सुनो मात राधा सुनो मात राधा

16 नवम्बर 2022
2
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सुनो मात राधा सुनो मात राधा बिना कृष्ण तेरे हैं वो आध राधा दिवाने है हम भी तिरी जैसे मैया दिवानी हो जैसे तिरी मीर राधा

16

गज़ल -16, दिल लगाने तक की बात थी

16 नवम्बर 2022
0
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दिल लगाने तक की बात थी सांस दूसरे के हाथ थी इश्क उम्र भर तो चल गया साल ख़ांड़‌ और बात थी

17

गज़ल -17, ढल गई हुस्न-ए-बारात अब

18 नवम्बर 2022
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ढल गई हुस्न-ए-बारात अब पूछे कौन उसके हालात अब सबसे हॅंस-हॅंस के करती हो हमसे करतींं नहीं बात अब

18

गज़ल -18, अब जुबां पे जो आ रहीं हैं

18 नवम्बर 2022
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दिल की तो आप बख्श दे जाॅं आखों को आप भा रहीं हैं दिल धड़कना भी छोड़ दे क्या आप क्यो पास आ रहीं हैं

19

गज़ल -19, सर्दी की जद में फिर जमाना है

18 नवम्बर 2022
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सर्दी की जद में फिर जमाना है हमको अब फिर से दिल लगाना है हम ही पत्थर है वो उघड़ खाबड़, जिसको नाज़ुक सा दिल बनाना है

20

गज़ल-20, किल्लत-ए-पानी 'जानी' बहुत

25 नवम्बर 2022
2
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किल्लत-ए-पानी 'जानी' बहुत ऑंख फिर भी न मानी बहुत टूटा था दिल हमारा भी जब, फोटो ना थीं पुरानी बहुत

21

गज़ल -21, मुझ को बस इतना कहना है

28 नवम्बर 2022
1
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मुझ को बस इतना कहना है मुझको तुमसे कुछ कहना है मुझसे मिलने कब आओगी, मुझको भी अब खुश रहना है

22

ग़ज़ल - 22, नही कुछ भी दुनिया मिरे साने में

16 अप्रैल 2024
0
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नही कुछ भी दुनिया मेरे साने में वो लड़की है अब्बल कि समझाने में यहाॅं तो कहीं भी नही लगता दिल मज़ा क्या है फिर तोड़ के जाने में

23

गज़ल 23, इतनी सच्ची हो तुम

16 अप्रैल 2024
2
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इतनी सच्ची हो तुम छोटी बच्ची हो तुम फूल खुद लाई हो कितनी अच्छी हो तुम

24

ग़ज़ल 24, किसी ने दिल जला डाला किसी ने घर जला डाला

17 अप्रैल 2024
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किसी ने दिल जला डाला किसी ने घर जला डाला अकेले हम थे सो हमने समंदर हर जला डाला कहा था के बनेगी इससे दर्द-ए-दिल की मरहम फिर हुआ क्या ये के दर्द-ए-दिल दवा देकर बढ़ा डाला

25

गज़ल 25, दिल में कुछ ऐसा नही है

17 अप्रैल 2024
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दिल में कुछ ऐसा नही है गर ये तुम जैसा नहीं है वो समझता क्यों नही कुछ ज़ी मिरा अच्छा नहीं है

26

ग़ज़ल 26, कौन थी वो क्या थी वो

17 अप्रैल 2024
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कौन थी वो, क्या थी वो लड़की भी कया थी वो रूठी ही नही हमसे इस तरह खफा थी वो

27

ग़ज़ल 27, फिर बात वही सुनी सुनाई

17 अप्रैल 2024
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फिर बात वही सुनी सुनाई हमने भी वही सुनी सुनाई हमने नही बोला प्यार में कुछ सबने हमे बे-दिली सुनाई

28

ग़ज़ल 28, तुझको देखे ही सब फीका हो जाता है

17 अप्रैल 2024
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तुझको देखे ही सब फीका हो जाता है तेरे बोसो से तीखा मीठा हो जाता है तेरे होठों को हम मैला क्यों करते है हमको भी आखिर ऐसा क्या हो जाता है

29

ग़ज़ल 29, आज फिर पैर में छत लग गई है

18 अप्रैल 2024
1
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आज फिर पैर में छत लग गई है चाॅंद को भी तिरी लत लग गई है चाॅंद को देख के छत चांदनी से बस लिपट कर के गले लग गई है

30

ग़ज़ल 30, छत पे फिर रोशनी सी दिखी

18 अप्रैल 2024
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चार दिन दिल के चक्कर में हम चार चक्कर में दिल की दिखी

31

ग़ज़ल 31, रात में बात उन आंखों की

21 अप्रैल 2024
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रात में बात उन आंखों की जाॅं निकल जाए इन आंखों की

32

ग़ज़ल 32, हम गज़ल कहते थे दस 'वी' क्लास में

24 अप्रैल 2024
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हम गज़ल कहते थे दस 'वी' क्लास में और वो थीं टेंथ 'ए' की क्लास में

33

ग़ज़ल 33, शाइरी करना कोई आसां नही

24 अप्रैल 2024
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शाइरी करना कोई आसां नहीं कौन है वो जो यहाँ रुसवा नहीं

34

ग़ज़ल 34, लड़की वो अक्सर ही ऐसा करती है

1 मई 2024
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लड़की वो अक्सर ही ऐसा करती है गुल पसंदीदा ही तोड़ा करती है

35

ग़ज़ल 35, जिंदगी भी जाने किधर गई

1 मई 2024
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हम इधर गए वो उधर गई जिंदगी भी जाने किधर गई

36

ग़ज़ल 36, हम भी शायद उसी की तरफ देखते

1 मई 2024
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हम भी शायद उसी की तरफ देखते सूखते फूल जिसकी तरफ देखते जब हमारी तरफ कोई नही देखता हम वही हैं जो तेरी तरफ देखते

37

ग़ज़ल 37, हम ये कैसे सीधे साधे हो रहे हैं

5 मई 2024
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हम मोहब्बत को तो प्यारे हो रहे हैं हम ये कैसे सीधे साधे हो रहे हैं वो हमे भी मार डालेगा कभी तो हम भरोसे जिसके सारे हो रहे हैं

38

ग़ज़ल,38 उन सूरज सी बाहों में जो सोता होगा

9 मई 2024
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उन सूरज सी बाहों में जो सोता होगा भगवन जाने फिर उसका क्या होता होगा उसके छूने से दिल जोरो से चलता है उस आँगन के फूलो का क्या होता होगा

39

गज़ल 39, हमारा दिल अगर ना कापता होगा

9 मई 2024
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हमारा दिल अगर ना कापता होगा हमारा फिर न तुझसे राब्ता होगा

40

ग़ज़ल 40, होश तुझको भी रहता नहीं है

13 मई 2024
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होश तुझको भी रहता नहीं है यार तू भी तो पीता नहीं है दूर हमसे वो रहता तो है पर दूर हमसे वो रहता नहीं है

41

ग़ज़ल 41, दाॅंव पे सब लगाया है मैने

17 मई 2024
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दाॅंव पे सब लगाया है मैने यानी की कुछ मुनाफा है मैने दिल लगाना , दिलो पे लगाना यानी कि दिल लगाना है मैने

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ग़ज़ल 42, हाथ पर वो हाथ रखना आपका

17 मई 2024
1
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हाथ पर वो हाथ रखना आपका और ऊपर से दुपट्टा आपका बाल खुल जाना अचानक आपके मारने का है इरादा आपका

43

ग़ज़ल 43, रास्ता दिल भटक गया शायद कुछ गले में अटक गया शायद

25 मई 2024
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रास्ता दिल भटक गया शायद कुछ गले में अटक गया शायद रात काली, ये रौशनी कैसी! सर से पल्लू सरक गया शायद

44

ग़ज़ल 44, दिल, दर्द अब सारा निकाला जायेगा

2 जून 2024
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दिल, दर्द अब सारा निकाला जायेगा रस्ते में जो आएगा मारा जायेगा रातों को आखिर चैन कैसे आएगा दिन में भी जब वो चांद देखा जायेगा

45

ग़ज़ल 45, कुछ न कहकर क्या कहा था तुमने

7 जून 2024
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कुछ न कहकर क्या कहा था तुमने "कुछ नही" इतना कहा था तुमने हम क्यों ना इश्क़ समझ के बैठें "कुछ तो समझो न" कहा था तुमने

46

ग़ज़ल 46, उमर तो मोहब्बत की है ना

10 जून 2024
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ये तुमने इमारत की है ना कमाई शराफ़त की है ना खुदा अब बुला भी रहा है मोहब्बत इबारत की है ना

47

ग़ज़ल 47, एक बरसात सी लड़की

10 जून 2024
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वो मेरे साथ की लड़की एक बरसात सी लड़की अपनी जिद पे अड़ी लड़की धूप में है खड़ी लड़की

48

ग़ज़ल 48, दिल की बातें न दिल में रखा कीजिए

11 जून 2024
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अपनी आखों से तो और क्या कीजिए अपनी आखों से दिल की दवा कीजिए दिल की बातें न दिल में रखा कीजिए इश्क़ है तो इसे भी बयां कीजिए

49

गज़ल 49, मौत भी तुम्हारे जैसी है

17 जून 2024
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बीच से ही लौट जाती है मौत भी तुम्हारे जैसी है जब हमे जी भर के रोना है क्यूॅं ये लड़की गुदगुदाती है

50

ग़ज़ल 50, दिनों दिन दिल जलाना होता है

19 जून 2024
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ग़ज़ल कहना क्या आसां होता है दिनों दिन दिल जलाना होता है तिरी महफ़िल से उठके जाना है यहाॅं हर दिल निशाना होता है

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