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कर्मण्य-सफलता व समृद्धि के प्रेरक मंत्र

कर्मण्य-सफलता व समृद्धि के प्रेरक मंत्र

Shyam Nandan Pandey

2 भाग
0 लोगों ने खरीदा
7 पाठक
25 मई 2022 को पूर्ण की गई
ISBN : 9798485417321

दुनिया विश्राम स्थल नहीं, बल्कि कार्यस्थल है, ज़िंदगी विचलने के लिए नहीं बल्कि कुछ कर दिखाने के लिए है। संसार का हर कण अद्वितीय है उसकी अपनी उपयोगिता है, किसी के लिए कोई चीज़ बेकार तो कोई बेकार चीजों का शिल्पकार है। आज दुनिया आधुनिक हो गयी विज्ञान और तकनीक बहुत आगे तक निकल आये है और हम मशीनों और केमिकल्स से घिरे हैं कुछ असली नहीं हर चीज़ में मिलावट है, हर चीज़ बहुत तेज़ घूम रही है और चल रही है, आज का आधुनिक व्यक्ति सोचता है कि पुरातन में लोग पिछड़े और अज्ञान थे जबकि रिसर्च से प्राप्त साक्ष्य और धर्म ग्रंथों से पता चलता है कि वो  ज्ञानी, शिक्षित और प्रकृति प्रेमी थे प्रकृति को अपना घर समझते थे उस से छेड़छाड़ नही करते थे जिससे संतुलन बना रहता था पर अब शिक्षा के मायने बदल गए हैं, भौतिकवाद, आर्थिक मजबूती , तकनीक और जीवन को आसान बनाने के नाम पर नए नए उपकरणों के निर्माण सिखाये जाते हैं, चरित्र निर्माण, नैतिकता और प्रकृति प्रेम पर जोर नही दिया जाता है, मैं खुद विज्ञान, तकनीक और प्रबंधन का विद्यार्थी रहा हूँ और प्रकृति और अंतरिक्ष की जानकारी लेने में रुचि रहती है पर मानव के विकास और आधुनिकता के नाम पर प्रकृति से छेड़खानी और नुकसान बहुत दुख देता है, विकास और बदलाव जरूरी है नए अविष्कार और तकनीक का भी स्वागत है पर ज्यादा रफ्तार ठीक नही फिलहाल ये तो अलग टॉपिक है। कुछ आधुनिक लोगों का मानना है कि धर्म हमे बांटता है, धर्म विकास का बाधक है, आधुनिक और तकनीक के इस युग मे धर्म को कोई अस्तित्व नही है  जबकि सच्चाई इसके उलट है इसलिए ये किताब के माध्यम से आपको ये समझाने का प्रयास करूंगा कि, आध्यात्म और धर्म गर्न्थो को साथ लेकर  चलने से कैसे हम एक सकारात्मक विकास की और अग्रसर रह सकते हैं, और सामंजस्य बनाकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। वेदों, गीता, कुरान, बाइबल और अन्य गर्न्थो में जीवन जीने का तरीका बताया गया है। आपकी शिक्षा, संस्कार, आशा, प्रयत्न कर्म, धर्म और परिश्रम आपका मार्गदर्शन कर आपको काबिल और सफल बनाते हैं और इन्ही चीजों को धर्म ग्रंथों में वर्णित श्लोकों, आयतों और नीतियों से समझाने का प्रयास इस किताब के माध्यम से किया जा रहा है। आप को उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से लबालब करने को यह किताब कोई अवसर छोड़ने वाली नही हैं, उम्मीद है यह किताब आपको आसान शब्दों व तरीकों से धर्म, कर्म, संस्कार, विकास और प्रबंधन को समझाते हुए आपके जीवन को सार्थक और सहज बनाएगी यह मेरी पहली किताब है, भावों को पूर्णतः व्यक्त करने के लिए भाषा और शब्दों को बंधन मुक्त रखा है, यदि यह किताब आप में से किसी भी पाठक को प्रेरित करने में सफल होती है तो बहुत खुशी होगी । यह किताब मेरे दशकों से अर्जित लेख, कविता, विचार, दर्शन शब्दकोश, सूक्तियां, चौपाईयां, श्लोक, आयतें और नीतिवचनों और अनुभवों के कुछ हिस्से का एक सर्वसमावेशी समुच्चय( Universal Set) है जिसे क्रमबद्ध लाईनों और पन्नो में संजोया है और उसकी सही और सटीक व्याख्या करने का प्रयास किया गया है। जो आप को जीवन के हर पड़ाव पर मार्गदर्शन कर पथ प्रसस्थ करेगी। किसी भी कोने में छिपा या पनपता हुआ भय जड़ से उखाड़ कर आपको आप के शिखर तक पहुचायेगी।  

कर्मण्य-सफलता व समृद्धि के प्रेरक मंत्र

कर्मण्य-सफलता व समृद्धि के प्रेरक मंत्र

Shyam Nandan Pandey

2 भाग
0 लोगों ने खरीदा
7 पाठक
25 मई 2022 को पूर्ण की गई
ISBN : 9798485417321

दुनिया विश्राम स्थल नहीं, बल्कि कार्यस्थल है, ज़िंदगी विचलने के लिए नहीं बल्कि कुछ कर दिखाने के लिए है। संसार का हर कण अद्वितीय है उसकी अपनी उपयोगिता है, किसी के लिए कोई चीज़ बेकार तो कोई बेकार चीजों का शिल्पकार है। आज दुनिया आधुनिक हो गयी विज्ञान और तकनीक बहुत आगे तक निकल आये है और हम मशीनों और केमिकल्स से घिरे हैं कुछ असली नहीं हर चीज़ में मिलावट है, हर चीज़ बहुत तेज़ घूम रही है और चल रही है, आज का आधुनिक व्यक्ति सोचता है कि पुरातन में लोग पिछड़े और अज्ञान थे जबकि रिसर्च से प्राप्त साक्ष्य और धर्म ग्रंथों से पता चलता है कि वो  ज्ञानी, शिक्षित और प्रकृति प्रेमी थे प्रकृति को अपना घर समझते थे उस से छेड़छाड़ नही करते थे जिससे संतुलन बना रहता था पर अब शिक्षा के मायने बदल गए हैं, भौतिकवाद, आर्थिक मजबूती , तकनीक और जीवन को आसान बनाने के नाम पर नए नए उपकरणों के निर्माण सिखाये जाते हैं, चरित्र निर्माण, नैतिकता और प्रकृति प्रेम पर जोर नही दिया जाता है, मैं खुद विज्ञान, तकनीक और प्रबंधन का विद्यार्थी रहा हूँ और प्रकृति और अंतरिक्ष की जानकारी लेने में रुचि रहती है पर मानव के विकास और आधुनिकता के नाम पर प्रकृति से छेड़खानी और नुकसान बहुत दुख देता है, विकास और बदलाव जरूरी है नए अविष्कार और तकनीक का भी स्वागत है पर ज्यादा रफ्तार ठीक नही फिलहाल ये तो अलग टॉपिक है। कुछ आधुनिक लोगों का मानना है कि धर्म हमे बांटता है, धर्म विकास का बाधक है, आधुनिक और तकनीक के इस युग मे धर्म को कोई अस्तित्व नही है  जबकि सच्चाई इसके उलट है इसलिए ये किताब के माध्यम से आपको ये समझाने का प्रयास करूंगा कि, आध्यात्म और धर्म गर्न्थो को साथ लेकर  चलने से कैसे हम एक सकारात्मक विकास की और अग्रसर रह सकते हैं, और सामंजस्य बनाकर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। वेदों, गीता, कुरान, बाइबल और अन्य गर्न्थो में जीवन जीने का तरीका बताया गया है। आपकी शिक्षा, संस्कार, आशा, प्रयत्न कर्म, धर्म और परिश्रम आपका मार्गदर्शन कर आपको काबिल और सफल बनाते हैं और इन्ही चीजों को धर्म ग्रंथों में वर्णित श्लोकों, आयतों और नीतियों से समझाने का प्रयास इस किताब के माध्यम से किया जा रहा है। आप को उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से लबालब करने को यह किताब कोई अवसर छोड़ने वाली नही हैं, उम्मीद है यह किताब आपको आसान शब्दों व तरीकों से धर्म, कर्म, संस्कार, विकास और प्रबंधन को समझाते हुए आपके जीवन को सार्थक और सहज बनाएगी यह मेरी पहली किताब है, भावों को पूर्णतः व्यक्त करने के लिए भाषा और शब्दों को बंधन मुक्त रखा है, यदि यह किताब आप में से किसी भी पाठक को प्रेरित करने में सफल होती है तो बहुत खुशी होगी । यह किताब मेरे दशकों से अर्जित लेख, कविता, विचार, दर्शन शब्दकोश, सूक्तियां, चौपाईयां, श्लोक, आयतें और नीतिवचनों और अनुभवों के कुछ हिस्से का एक सर्वसमावेशी समुच्चय( Universal Set) है जिसे क्रमबद्ध लाईनों और पन्नो में संजोया है और उसकी सही और सटीक व्याख्या करने का प्रयास किया गया है। जो आप को जीवन के हर पड़ाव पर मार्गदर्शन कर पथ प्रसस्थ करेगी। किसी भी कोने में छिपा या पनपता हुआ भय जड़ से उखाड़ कर आपको आप के शिखर तक पहुचायेगी।

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पुस्तक की झलकियां
1

अधूरा इश्क़

2 फरवरी 2023

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