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भावुकता स्नेहिल ह्रदय ,दुर्बलता न नारी की ,

8 अप्रैल 2016

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भावुकता स्नेहिल ह्रदय ,दुर्बलता न नारी की ,

संतोषी मन सहनशीलता, हिम्मत है हर नारी की .

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भावुक मन से गृहस्थ धर्म की , नींव वही जमाये है ,

पत्थर दिल को कोमल करना ,नहीं है मुश्किल नारी की.

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होती है हर कली पल्लवित ,उसके आँचल के दूध से ,

ईश्वर के भी करे बराबर ,यह पदवी हर नारी की .

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जितने भी इस पुरुष धरा पर ,जन्मे उसकी कोख से ,

उनकी स्मृति दुरुस्त कराना ,कोशिश है हर नारी की .

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प्रेम प्यार की परिभाषा को ,गलत रूप में ढाल रहे ,

सही समझ दे राह दिखाना ,यही मलाहत नारी की .

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भटके न वह मुझे देखकर ,भटके न संतान मेरी ,

जीवन की हर कठिन डगर पर ,इसी में मेहनत नारी की .

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मर्यादित जीवन की चाहत ,मर्म है जिसके जीवन का ,

इसीलिए पिंजरे के पंछी से ,तुलना हर नारी की .

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बेहतर हो पुरुषों का जीवन ,मेरे से जो यहाँ जुड़े ,

यही कहानी कहती है ,यहाँ शहादत नारी की .

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अभिव्यक्त क्या करे ''शालिनी ''महिमा उसकी दिव्यता की ,

कैसे माने कमतर शक्ति ,हर महिका सम नारी की .

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                      शालिनी कौशिक 

                               [कौशल ]


शब्दार्थ -मलाहत-सौंदर्य 

                                     

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8 मार्च 2018

रवीन्द्र  सिंह  यादव

रवीन्द्र सिंह यादव

स्त्री संघर्ष की सशक्त अभिव्यक्ति .

12 दिसम्बर 2016

चंद्रेश विमला त्रिपाठी

चंद्रेश विमला त्रिपाठी

बेहतर हो पुरुषों का जीवन ,मेरे से जो यहाँ जुड़े , यही कहानी कहती है ,यहाँ शहादत नारी की . ................................................................... अभिव्यक्त क्या करे ''शालिनी ''महिमा उसकी दिव्यता की , कैसे माने कमतर शक्ति ,हर महिका सम नारी की ...................उम्दा लेखनी !

9 अप्रैल 2016

रवि कुमार

रवि कुमार

बेहद सुंदर

9 अप्रैल 2016

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रचनाएँ
shalinikaushik2
0.0
नित नयी घटनाएँ मन को झकझोरती हैं और मानव प्रकृति कुछ न कुछ अभिव्यक्त करने को प्रेरित करती है बस इसी में दिखता है ''कौशल '' घटनाओं पर विरोध जताने की भावना में और मन में निरंतर उठती भावनाओं को अभिव्यक्त करने में .
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हिम्मतें दुश्वारियों में दोस्त बन जाएँगी .

5 दिसम्बर 2015
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ज़िंदगी की मुश्किलें हर रोज़ आज़माएंगी ,डरते-डरते गर जियेगा यूँ ही ज़ान जाएगी ...................................................................इस जहाँ में कोई तेरा साथ देगा ही नहीं ,यूँ डरेगा ,परछाई भी साथ छोड़ जाएगी ...............................................................आये हैं तन्हा सभी

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हिम्मतें दुश्वारियों में दोस्त बन जाएँगी .

5 दिसम्बर 2015
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ज़िंदगी की मुश्किलें हर रोज़ आज़माएंगी ,डरते-डरते गर जियेगा यूँ ही ज़ान जाएगी ...................................................................इस जहाँ में कोई तेरा साथ देगा ही नहीं ,यूँ डरेगा ,परछाई भी साथ छोड़ जाएगी ...............................................................आये हैं तन्हा सभी

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यही कामना हों प्रफुल्लित आओ मनाएं हर क्षण को .-2016

30 दिसम्बर 2015
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अमरावती सी अर्णवनेमी पुलकित करती है मन मन को ,अरुणाभ रवि उदित हुए हैं खड़े सभी हैं हम वंदन को .............................................................अलबेली ये शीत लहर है संग तुहिन को लेकर  आये  ,घिर घिर कर अर्नोद छा रहे कंपित करने सबके तन को .....................................................

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तलवार अपने हाथों से माया को सौंपिये.

28 फरवरी 2016
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बेबाक बोलना हो बेबाक बोलिये,पर बोलने से पहले अल्फाज तोलिये......................................................दावा-ए-सर कलम का करना है बहुत आसां,अब हारने पर अपने न कौल तोडिये........................................................बारगाह में हो खडे बन सदर लेना तान,इन ताना-रीरी बातों की न मौज लीजिए.

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'' न कोशिश ये कभी करना .''

26 मार्च 2016
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दुखाऊँ दिल किसी का मैं -न कोशिश ये कभी करना ,बहाऊँ आंसूं उसके मैं -न कोशिश ये कभी करना.नहीं ला सकते हो जब तुम किसी के जीवन में सुख चैन ,करूँ महरूम फ़रहत से-न कोशिश ये कभी करना .चाहत जब किसी की तुम नहीं पूरी हो कर सकते ,करो सब जो कहूं तुमसे-न कोशिश ये कभी करना .किसी के ख्वाबों को

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भावुकता स्नेहिल ह्रदय ,दुर्बलता न नारी की ,

8 अप्रैल 2016
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भावुकता स्नेहिल ह्रदय ,दुर्बलता न नारी की ,संतोषी मन सहनशीलता, हिम्मत है हर नारी की ........................................................................भावुक मन से गृहस्थ धर्म की , नींव वही जमाये है ,पत्थर दिल को कोमल करना ,नहीं है मुश्किल नारी की.................................................

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कोई और कहे न कहे - मैं तो कहूँगी - ''कृतज्ञ दुनिया इस दिन की .''

1 अक्टूबर 2017
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एक की लाठी सत्य अहिंसा एक मूर्ति सादगी की, दोनों ने ही अलख जगाई देश की खातिर मरने की . .......................................................................... जेल में जाते बापू बढ़कर सहते मार अहिंसा में , आखिर में आवाज़ बुलंद की कुछ करने या मरने की . ..................................

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गणतंत्र फ़साना बना हे ! हिन्दवासियों

25 जनवरी 2018
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फ़िरदौस इस वतन में फ़रहत नहीं रही , पुरवाई मुहब्बत की यहाँ अब नहीं रही . ...................................................................................... नारी का जिस्म रौंद रहे जानवर बनकर , हैवानियत में कोई कमी अब नहीं रही . .................................

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