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हे काव्यांजलि

4 मार्च 2022

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कितना सुकून तेरी बाँहो मे, 
आज प्रेम साकार हुआ ,
 तेरी आहों मे ,
ये काव्यांजलि

निग़ाहों मे तेरी हर काव्य संकलित 
चंचल चपला सी तू ,
मेघो से उतरती दिखती
ये कव्यंजली

ह्दय प्रेम घुटी पीकर
शिवा तांडव करता है
तेरे केश के कचकुटुम्भ में
घन घोर संकलित दिखता है
ये काव्यांजलि

हर शब्द हीन हर रूप कुरूप
तेरी इस कंचन काया पर
क्या काव्य लिखूं 
ये काव्यांजलि 

(काव्यजलि आकाशीय बिजली है)


आंचल सोनी 'हिया'

आंचल सोनी 'हिया'

खूबसूरत.... यूं ही लिखते रहिए💐👍

12 अप्रैल 2022

आशुतोष मिश्रा (अनभिज्ञ)

आशुतोष मिश्रा (अनभिज्ञ)

12 अप्रैल 2022

धन्यवाद जी

काव्या सोनी

काव्या सोनी

Bahut hi shandaar Likha aapne 👌👏👌

4 मार्च 2022

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रचनाएँ
Poet's dream
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यह किताब को पुस्तक नही कहेगे शायद यह मेरी आत्मा है यह मेरे द्वारा की गई कल्पना और उसको कविता के रूप में संकलित करना और लिख देना ही मैं हूँ । इसको किताब कहना लेखक का अपमान है । यह ह्दय है इस संकलन में आपको कविताएँ मिलेगी जो मेरे द्वारा लिखी गयी है आप पढ़े आनंद ले । धन्यवाद 🙏
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हे काव्यांजलि

4 मार्च 2022
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कितना सुकून तेरी बाँहो मे, आज प्रेम साकार हुआ , तेरी आहों मे , ये काव्यांजलि निग़ाहों मे तेरी हर काव्य संकलित चंचल चपला सी तू , मेघो से उतरती दिखती ये कव्यंजली ह्दय प्रेम घुटी पीकर शि

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भोर का तारा

4 मार्च 2022
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उंगलिया पकड़ लो और दिखा दो बचपने को इस प्रकृति के भोरके तारो को अस्तित्व हनन करके अपना जिह्नोने तम को रौशन किया प्रकृति की मधुर वीणा पर नाचता हुआ नृतकप्रिय मोहता जग को पकड़ उंगलिया दिखा दो प्रकृ

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मन

4 मार्च 2022
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मन भी बड़ा चंचल , कभी उदास , कभी निराश, कभी टूटती आशाए, कभी उत्त्साह की लहर दिखाए। कभी पहुँच जाए उन यादों पर, जो दिल मे एक ख़ुशी ले आए, कभी कभी अतीत पन्नें , बार बार उही दिखलायें, कभी बचपन की उन गलियो म

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बहरूपिया

4 मार्च 2022
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वो चाँद को पलट कर देख ! चाँदनी का गुरुर उसे, उधार की रोशनी से, सिंगार जो कर रहा, अपने रूप के गुरूर मे, चूर अब हो रहा, आसमा मे नहीं टिक रहा ,मेरे साथ साथ चल रहा, हर कदम पर मेरेनज़र वो देख रख रहा, कभी प्

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हौसला

4 मार्च 2022
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बढ़ते रहो कदम जब तक न थके , तोडो न हौसला सांसे जब तक न रुके , चलते रहो मंजिले जब तक न मिले , &nbsp

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तेरा साथ हो !

4 मार्च 2022
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जिंदगी चल रही है तुम हो तो सही न हो तो सही मुझे क्या बदलना तुम बदलो तो सही न बदलो तो सही हाथ मे जाम लिए जिंदगी जियो तो सही हम नही तो सही ! (आशु)

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माँ

4 मार्च 2022
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माँ सा प्रेम स्नेह नही मिलता किताबे मिलती पर पढ़ाने वाली उंगलिया नही दिखती निच्छल अब गोद नही मिलती आँख में आँस पर लोरी के वो बोल नही मिलते तसवीर में क्यों छिपकर बैठी माँ तेरे बिन कलेजे को ठंडक नही मि

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पूनम की रात

4 मार्च 2022
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वह देखो सूर्य ढल गया चांद भी आज निखर गया उधार लेकर आया रौशनी फिर खिल गया पूनम में सिंगार कर गया चिड़ियों ने समझा कि फिर भोर हो गया आज चांद सूरज सा चमक गया पूनम की रात में सिं

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वश्या

4 मार्च 2022
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एक नया रूप नारी का देखो कभी थी बेटी किसी आँगन की जो बिक गयी दानव के हाथो एक नया रूप मानव का देखो वो कोठे में बैठी किये सिंगार बिक रहा जिस्म हर रात है देखो नारी का यह

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मन भी बड़ा चंचल

4 मार्च 2022
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मन भी बड़ा चंचल , कभी उदास , कभी निराश, कभी टूटती आशाए, कभी उत्त्साह की लहर दिखाए। कभी पहुँच जाए उन यादों पर, जो दिल मे एक ख़ुशी ले आए, कभी कभी अतीत पन्नें , बार बार उही खुलवाएं कभी बचपन की उन गलियो मे,

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पाती ।।।

4 मार्च 2022
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अनजान पाती !!! सुनहरा ग़ुलाबी ख़त आज आँगन में मिला शायद आंस में पता भटक चली प्रेम से भरा पर उदास बिछड़ने के बाद दिख रही मिलन की आस पाती अनजान न जान न पहचान ढूढ रही अपनी पहचान मैं अनजान मैं अनजान (आशु)

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रो रही हिंदी

4 मार्च 2022
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रो रही है हिंदी आज के हिंद मे माँ की लोरियां वो नानी की कहानियां गुम है किताबो में मर रही है हिंदी रो रही है हिंदी यह हिन्द है पर यहाँ हिंदी नही भाषाओं के चक्रव्यूह में अब बिंदी नहीं

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हिंदुत्व

16 मार्च 2022
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सिंह की भाँति चलअन्याय को तू कुचलह्दय में देश प्रेम लेसमाज को बदलसंस्कार को जीवंत करहिँदुत्व की राह पर चल तुझमे क्षमता है खून से नहला दे शत्रुओं कोसिंह की भाँति गरज निडर होकर समाज को बद

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रंग वंग भंग

17 मार्च 2022
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रंग - वंग हो भंग संग में,छोटा-बड़ा सब एक रंग में,रंगो तनो और मनो रंगो,नाचे सब एक संग में,बड़े प्रेम से प्रेमी मिले,रंगो के इस रंग-मंच में,रंग-वंग हो भंग संग में,रंगे हुए सब एक रंग में,मीठा-सीठा खट्टा-वट

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होरी

17 मार्च 2022
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रंगो के इस रंगा रंग मे,प्रेम मिलन के इस रंग मंच मे,जाति धर्म सब लग गए किनारे,एक रंग मे रंगे है सारे,पीला नीला हरा गुलाबी,बने हुए सब एक नयी प्रजाती,प्रेम के रंग मे सभी रंगे,रंगों के इस रंग मंच मे,गोरा

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कदम

31 मार्च 2022
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बढ़ते रहो कदम जब तक न थके ,तोडो न हौसला सांसे जब तक न रुके , चलते रहो मंजिले जब तक न मिले ,

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निराश की आशा

31 मार्च 2022
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निराशा फिर आशा को तोड़ गई , बढ़ते हुए कदमो को रोक गई ,कुछ करने कि मुझमें समझ नहीं ,अब आगे बढ़ने की ललक नही ,

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विरांगना

31 मार्च 2022
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आओ आज सुनाता एक कहानी ,एक थी बड़ी वीरागना नारी ,सावॅल सा तन था जिसका ,मन में दया की ख़ान भरी थी , आँखो में अपना खाब

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लिख दो

31 मार्च 2022
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लिख दो किताबों पर वह जो इतिहास बन जाएँ, कुछ ऎेसा लिखो , कि आप की कलम तलवार बन जाएँ, &nbs

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क्या लिखूं

31 मार्च 2022
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क्या लिखू क्या लिखू , &

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पत्नी - पनौती

12 अप्रैल 2022
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शादी एक पवित्र रिश्ता तो है इसमें कोई शक नही है पर शादी के बाद पत्नी पनौती बन जाती है दोस्तो द्वारा सुना अभी तो !! अनुभव तो है नही मुझे😯 कुछ पुरुषो का दर्द कविता के माध्यम से लिख रहा हूं यह मात्र एक

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