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नदी

hindi articles, stories and books related to nadi


एक एक है बूँद कीमती,बूँद बूँद से नदी है बनती।शैशव रूप में पहाड़ से चलकर,दीर्घ रूप मैदान में है लेती।।इधर इठलाती उधर बलखाती,कभी न वो एक सीध में चलती।कल कल कर वो बहती जाती,मधुर मधुर संगीत सुनाती।।बहुतेरे

वक्त ने सब कुछ उल्टा कर दिया । इस बार की छठ, टपऔर छत पर।सब कुछ सूना है, नहर,नदी,तालाब।

गंगा में विसर्जित अस्थियां आखिर जाती कहां हैं ? बहुत ही ज्ञानवर्धक लेख अवश्य पढ़े ! पतित पावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी है। श्री हरि और भगवान शिव से घ

यूँही।हाय बाय से दुनियाँ भौसागर चले।स्नान ध्यान से तनाव मनवा चले।रहे सदा प्रकृति बहे हवा मस्तानी।मिले रोशनी सूर्य चाँद और तारो की।पहाड़ में झरना झरे, नीर मिले नदी और सागर में।खा खाना हुई आवाज बुलंद, ज़ुबान चले मनमाना। महामारी से दिल कॉप गया,अब दुनियाँ चले उतना।

आँख में उम्र कैद बल्ब की रोशनी लकड़ी की मेज मे पड़ रही थी, मेज के ऊपर एक किताब जिसके मुख्यप्रष्ठ मे उभरता शब्द शहर की तरफ ले गया शहर नदी के किनारे बसा परछाई को उसके पानी मे पाता हैं| दिन की रोशनी और रात की रोशनी मे अलग-अलग दिखता| इन दोनों की परछाई मे एक बस्ती शामिल थी जिसकी परछाई नदी मे डूबी रहती|

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अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रम्प एवं उत्तरी कोरिया के तानाशाह किम जोंग डॉ शोभा भारद्वाज नदी के दो किनारे मिलना असम्भव है लेकिन राजनीति में सब कुछ सम्भव | लगभग एक

सुदूर पर्वत परबर्फ़ पिघलेगीप्राचीनकाल से बहतीनिर्मल नदिया में बहेगीअच्छे दिन कीबाट जोहतेकिसान के लिएसौग़ात बन जायेगीप्यासे जानवरों कागला तर करेगीभोले पंछियों कीजलक्रीड़ा मेंविस्तार करेगीलू के थपेड़ों की तासीरख़ुशनुमा करेगीएक बूढ़ा प्यासा अकड़ी

नदी को लगता हैकितना आसान हैसमंदर होनाअपनी गहराइयों के साथझूलते रहना मौजों परन शैलों से टकरानान शूलों से गुजरनान पर्वतों की कठोर छातियों को चीरकररास्ता बनानापर नदी नहीं जानती हैसमंदर की बेचैनी कोउसकी तड़प और उसकी प्यास कोकितना मुश्किल होता हैखारेपन के साथ एक पल भी जीनासमंदर हमेशा रहता हैप्यासाऔर भटकता

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