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सहयोग की भावना

9 मार्च 2022

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9 मार्च 2022
   बुधवार
समय-06:05(शाम)


मेरी प्यारी सखी,
आज इतने दिनों बाद हमारी पुनः वापसी हैं। कल से हम सभी अपने कामों में व्यस्त हो जाएंगे।
      बच्चे अपनी पढ़ाई में, तो हम घर गृहस्थी में। जीवन पुनः अपनी रफ़्तार में चलने लगेगी।
         अभी ट्रेन में बैठी बैठी मैं, आने जाने वाले लोगों को निहार रही हूॅं। आते समय खाने के लिए कुछ भी खरीद नहीं पाए। जिस कारण ट्रेन में बेचे जाने वाले लंच को ही खरीद कर खाना पड़ा।
    ट्रेन में कितने ही प्रकार के लोग मिलते हैं। कई बिल्कुल चुप तो कहीं बहुत अधिक बोलने वाले। पतिदेव तो बस, उनकी बातचीत का सिलसिला आरंभ हो जाता है ट्रेन में।
   आज भी मार्ग में एक सज्जन जो इस्कान से ताल्लुक रखने वाले मिले। बस फिर क्या था चल निकला बातों का दौर।
   वैसे ट्रेन में पिताजी भी चलते हुए कई लोगों से बातें करते हुए जाते हैं। पिताजी आज भी कहते हैं जितने लोगों से बातें होगी उतनी ही जानकारियों का भंडार बढ़ता जाएगा। वैसे भी बात करने से कई चीजों की अनभिज्ञता दूर होने के साथ व्यक्तित्व में भी निखार आता है।
              यात्रा में जाते हुए पहले पैकिंग करना फिर उन सब चीजों को धो धाकर अपनी जगह व्यवस्थित करना। इतने दिनों बाद घर भी कूड़ेदान सा बन जाता है। बस बैठे बैठे मन में ही सारी व्यवस्थाएं सोच ली। जाकर साफ सफाई में लगना पड़ेगा।
    आज हम लोग तकरीबन 7 बजे तक घर पहुंच जाएंगे।  कल सुबह की ट्रेन से जेठ और जेठानी जी अपनी यात्रा पर निकलेंगे। संयुक्त परिवार की सबसे बड़ी खासियत यही है कि एक दूसरे पर हम निर्भर रह सकते हैं। जेठ जी अपने दोनों बच्चों को छोड़कर खुद अकेले ही यात्रा पर निकल रहें हैं।
  जेठानी जी के भाई के बेटे की शादी है। बेटी की परीक्षा है जिस कारण बेटे और बेटी दोनों को यही मेरे पास छोड़कर जा रहे हैं। वे शादी में शामिल होकर लौट आएंगे।
                     एक दूसरे का सहयोग करके ही तो परिवार चलता है। क्यों सही कहा ना मैंने???


 लेखिका
     पापिया
               



 











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