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उड़ियाना

hindi articles, stories and books related to Udiyana


उड़ियाना छंद "विरह"क्यों री तू थमत नहीं, विरह की मथनिया।मथत रही बार बार, हॄदय की मटकिया।।सपने में नैन मिला, हँसत है सजनिया।छलकावत जाय रही, नेह की गगरिया।।गरज गरज बरस रही, श्यामली बदरिया।झनकारै हृदय-तार, कड़क के बिजुरिया।।ऐसे में कुहुक सुना, वैरन कोयलिया।विकल करे कबहु मिले, सजनी दुलहनिया।।तेरे बिन शुष्

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