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प्रतीक्षा

13 सितम्बर 2021

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अजनबियों से भरी दुनिया थी
पर उसमे एक खास मिला
शख्शियत उसकी खुदा सी
पर इंसानी जज्बातो से भरा मिला
      अदाएं जिसकी रूहानी थी
      उनसे ही वो बेखबर मिला
      जज्बातो से परे वो झाँकता
      इक अनोखा ख्वाब सा मिला
कहने को प्रतीक्षा नाम से पुकारा
पर रूहानियत की प्रतीक्षा करता मिला
उसके एहसासों के नजर तले
हमें अपना ख्वाब संजीदा मिला
   जन्म उसका शायद नूरानी था जो
   वो इंसान होकर भी वो खुदा सा मिला ।

Written by @ajain_words
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रचनाएँ
अधूरे अल्फ़ाज़
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यह संकलन सिर्फ़ शब्दों का नहीं बल्कि उन सभी एहसासों का है, जो शब्दो से सजकर भी अनछुए या अनकहे रह जाते है। एहसास बहुत सुनहरे होते है, एक ही एहसास किसी को ख़ुशी तो किसी को ग़म दे जाता है।एहसासों की दुनिया पूरे होने की दहलीज़ पर खड़ी रहती हैं, जो किसी के लिए पूरे तो सामने वाले के लिए अधूरे रह जाते है।
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