shabd-logo
Shabd Book - Shabd.in

करवटें

Poonam kaparwan

0 अध्याय
0 व्यक्ति ने लाइब्रेरी में जोड़ा
0 पाठक
निःशुल्क

करवटें बदलतें रहे रात भर हम.... आंखों की पलकों को बंद किए थे हम.... पलकें में बसी यादें जो अतीत पर भारी थी.... नींद की जुंबिश ठहर ठहर कर गुनगुनी रही थी.... सलवटें चादर की बयां कर रही थी कोई पहलू में बैठकर नजर भर देख रहा था ये मेरा अंतर्मन था या भ्रम पर दिल पर भारी लगता था स्वरचित .... 

karvaten

0.0(0)

पुस्तक के भाग

no articles);
अभी कोई भी लेख उपलब्ध नहीं है
---

किताब पढ़िए

लेख पढ़िए