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mother

चंद्रेश विमला त्रिपाठी

14 अध्याय
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विविध विषयों-प्रसंगों पर आधारित मौलिक गीतों की लड़ियाँ, जो मौलिक संगीत की सरगम में पिरोयी जा सकती हैं... 

mother

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पुस्तक के भाग

1

. . . सबसे अलग है भईया, अपने कानपुर का नाम . . .

22 सितम्बर 2015
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स्टाइल की हो बात, या हो ट्रैफिक का जाम, मस्ती में डूबा दिन, जहां रंगीन सारी शाम, कंटॉप-लल्लनटॉप, फाडू-जुगाडू काम, . . . सबसे अलग है भईया, अपने कानपुर का नाम . . .  आई. आई. टी., ग्रीनपार्क, रेव-थ्री का रॉक,  मेट्रोसिटी में लहियापट्टी स्नैक्स का शॉक, बीसीबाज़ी ऐसी, हर जुबान हो जाये लॉक, कनपुरिया कल्चर

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मन की मंजिल ढूँढ लो …

23 सितम्बर 2015
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सागर को बांध लो, नदियों को सींच दो, उड़ जाओ संग हवा के, मुड़ जाओ संग दिशा के, कुछ सपने बुन भी लो, मन की मंजिल ढूँढ लो ... क्योँ हो खोये? सोये-सोये? खुश होकर भी, लगते हो रोये-रोये! संदेशे सोच लो, अंदेशे छोड़ दो, उड़ जाओ संग हवा के, मुड़ जाओ संग दिशा के, कुछ सपने बुन भी लो, मन की मंजिल ढूँढ लो ...  ज़िन्दगी

3

. . . हम तुझसे कोई शिकायत, अब ना करेंगें . . .

24 सितम्बर 2015
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दर्द सहेंगे सहते रहेंगे, दावा है मेरा, मिलके रहेंगें,प्यार किया है, करते रहेंगें,तेरी जुदाई, दिल की दुहाई, गिनते रहेंगें,हम तुझसे कोई शिकायत, अब ना करेंगें. . . हो चाहत का असर, ये ज़रूरी नहीं,हो रोशन हर एक नज़र, ये ज़रूरी नहीं,देखेंगे हम भी आपकी, अब बेरुखी का दम,ज़ुल्मों-सितम में आपकी हँसके बहेंगें हम,आ

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. . . ओये मितरां, प्यार पे मर मिट जावां . . .

25 सितम्बर 2015
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चल चलिए यारा, मितरां नूं गड्डी वे,हम हैं यार, खिलंदड़, चंगे चड्डी वे,सड्डे जोश का फटका, रगों विच लहू दा झटका,इक कुड़ी, मुंडियां नूं कहानी, ज़िंदड़ी है बस, मस्त ज़वानी,सोढ़ा दिन, सोढ़ी रात है साँवा, इस प्यार पे मर मिट जावां,ज़िंद नाम तेरे कर जावां, इस प्यार पे मर मिट जावां, ओए मितरां, प्यार पे मर मिट जावा

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... मुझ तक भी गा रही है ...

30 सितम्बर 2015
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कई दिन से दिल की बात, लब तक आ रही है,आँखों को चूम के, बहुत दूर जा रही है,ये बात सुन रहें हैं, मुझे आप चुन रहें हैं,सांसों की आपकी धुन, मुझ तक भी गा रही है.....कुछ और देखतें हैं, सौ बातें भी करते हैं, नज़र मेरी, उन पर, जो ठहरे,बस मुझको घूरते हैं, सौ इशारें भी करते हैं, हटा

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. . . अब भी कोई, रोशनी है . . .

5 अक्टूबर 2015
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बंजरसपने, मन में अपने, कब तक, जलते-बुझते रहेंगे ?खंजरबनके, तन में मेरे, कब तक, चुभते-दुखते रहेंगे ?सस्तीआहें, लुटती पनाहें, बेमतलब सी मिलती राहें,अंधियारीहैं, चारों दिशाएं,पर,टूटते तारों की गरमी, इन सर्द हवाओं की नरमी,भरतीमुझमें, नई सी ज़िंदगी है,मेरेमन में छुपी, अब भी कोई, रोशनी है ..... सजते-संवरते

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सिग्नेचर ट्यून : बंधन कहीं टूट ना जाये (टी वी सीरियल-प्रस्तावित) (कॉपीराइट)

6 अक्टूबर 2015
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किसीसे पल ना खो जाये,मिलेजो छांव के साये,के,अब तो साथ रहना है,भंवरमें यूं ही बहना है,किस्मतहमसे रूठ ना जाये,येबंधन, ये बंधन, ये बंधन,ओरब्बा, बंधनकहीं टूट ना जाये.....  

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. . . उनपे देते हैं जां, कोशिश हज़ार करते हैं . . .

6 अक्टूबर 2015
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उनपेदेते हैं जां, कोशिश हज़ार करते हैं,नबनें नूर उनकी आँखों का,जानेकिसकी, वो आस करते हैं ? रेंगतीउम्मीदें, इक ख्वाब की जताते हैं,अश्कहोंठों पे, मुस्कान का पिलाते हैं,नजमे रंग मेरे हाथों का,जानेकिस्मत में वो, किसकी तलाश करते हैं? आँखेंखुलीं कि, मंज़र में धुँआ गहराया,सांसेंबोझिल, ग़मों का दर्द जैसे लहराय

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... हर घड़ी तू राहत है ...

7 अक्टूबर 2015
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नज़रों में चाहत है,बेहिसाब इनायत है,हर सुबह की वो पहली, पाकफ़रमाइश है,मुहब्बत शहर का बाशिंदा,खुदा का एक नेक बंदा,दिल में लिखी एक, ख़ूबसूरतआयत है,हाँ राहत है, हाँ राहतहै,हर घड़ी तू राहत है | इबादत है वो रब की, मेरीआदत है,दुआओं में मिल गई, मेरीशहादत है,रेशम के धागे की रिदा,हर पल मै जिसपे फ़िदा,बुझती हुई सा

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... किसी रोज़ तुमको बतायेंगे हम ...

7 अक्टूबर 2015
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किसी रोज़ तुमको बतायेंगेहम,फ़कत आशिक़ी है क्या,दिखायेंगे हम,राधा ही कान्हा है,कान्हा है राधा,रीत वफ़ा का नया,सिखायेंगे हम,किसी रोज़ तुमको बतायेंगे हम,फ़कत आशिक़ी है क्या, दिखायेंगे हम... ज़माने को हर पल, अपनी फ़िकर है,जहां और क्या है, बस एक सिफ़र है,आरज़ू में दम न हो तो, सब कुछ ख़तम है,चाहेंगे मरते दम तक, आपकी

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... नज़र ज़ब आपसे मिले ...

12 अक्टूबर 2015
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कितना अच्छा हो वो शहर, जहां हम आपसे मिले,कितना अच्छा हो वो पहर, जहां हर होंठ हों सिले,बातें हों बेहिसाब, मगर खामोशी हो ज़वाब,नज़र ज़ब आपसे मिले..... आपकी अनजानी आहट, मेरी बेकरारियां बढ़ाये,आपकी अनछुई मुस्कराहट, मेरी तन्हाईयां मिटाये,रेशमी ज़ुल्फों की नरम छाया, गरम बाहों का हो साया,मौसम हो फागुनी, खिली हो

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... नज़र ज़ब आपसे मिले ...

9 नवम्बर 2015
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कितना अच्छा हो वो शहर, जहां हम आपसे मिले,कितना अच्छा हो वो पहर, जहां हर होंठ हों सिले,बातें हों बेहिसाब, मगर खामोशी हो ज़वाब,नज़र ज़ब आपसे मिले..... आपकी अनजानी आहट, मेरी बेकरारियां बढ़ाये,आपकी अनछुई मुस्कराहट, मेरी तन्हाईयां मिटाये,रेशमी ज़ुल्फों की नरम छाया, गरम बाहों का हो साया,मौसम हो फागुनी, खिली हो

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तेरे लिए, तेरे लिए, मेरे चारों पहर अब तेरे लिए.

4 जनवरी 2016
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चलते रहे, चलते रहे, यादों में यूं ही बहते रहे,जीते रहे, मरते रहे, हंसते रहे कभी रोते रहे,किसके लिए ? किसके लिए ?मेरी शामो-सहर अब किसके लिए ?मेरे लिए, मेरे लिए, तेरी रूह-नज़र अब मेरे लिए,किसके लिए ? किसके लिए ?मेरा चैनो-सुकून अब किसके लिए ?मेरे लिए, मेरे लिए, तेरा जिश्मों-जुनून अब मेरे लिए...तेरे लिए,

14

प्यार की खेलो होली ओ मेरे हमजोली (बिना जल की होली का मौलिक गीत)

22 मार्च 2016
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दागो दिल की गोली,बचे न कोई चोली, मस्ती में कर छिछोली,प्यार की खेलोहोली, ओ मेरे हमजोली!<!--[if !supportLists]-->-   <!--[endif]-->फूलों के हो रंग बिन पानीके संग, मोड़ों नाही कलईयाँ, न करोमोहे तंग,नस-नस दौड़ पड़ा है प्रेम कातेरा भंग,दुनिया की अब बोली, गुलालहो या हो रोली,दागो दिल की गोली,बचे न कोई चोली,मस

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